काम की बात: एक सेल्फी कर सकती है कंगाल, फोटो से फिंगरप्रिंट निकाल रहा AI, गलती से भी न दें यह पोज
सोशल मीडिया पर सेल्फी पोस्ट करना आपको महंगा पड़ सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि हैकर्स अब ऑनलाइन पोस्ट की गई नॉर्मल तस्वीरों से सीधे फिंगरप्रिंट की जानकारी निकाल सकते हैं। और हैरानी की बात यह है कि यूजर्स को इस खतरे का पता तब तक शायद न चले, जब तक कि बहुत देर न हो जाए।

शायद ही ऐसा कोई हो, जिसे सेल्फी खींचने पसंद नहीं है। मोबाइल हाथ में हो, तो लोग मौका मिलते हैं अलग-अलग पोज में सेल्फी लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाल देते हैं। अगर आपको भी सेल्फी लेकर लोगों को दिखाने का शौक है, तो सावधान हो जाइए। सेल्फी में 'पीस साइन' वाला क्लासिक पोज देखने में तो नॉर्मल लग सकता है, लेकिन साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स अब चेतावनी दे रहे हैं कि यह लोगों की सबसे ज्यादा संवेदनशील चीज को सामने ला सकता है और वो हैं आपके फिंगरप्रिंट, जिसके बारे में लोगों ने सोचा तक नहीं होगा। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के टूल्स ज्यादा एडवांस होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे यह खतरनाक भी होते जा रहे हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि हैकर्स अब ऑनलाइन पोस्ट की गई नॉर्मल तस्वीरों से सीधे फिंगरप्रिंट की जानकारी निकाल सकते हैं। और हैरानी की बात यह है कि यूजर्स को इस खतरे का पता तब तक शायद न चले, जब तक कि बहुत देर न हो जाए। 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह चेतावनी हाल ही में तब चर्चा में आई, जब सिक्योरिटी एक्सपर्ट ली चांग ने एक चीनी वर्कप्लेस रियलिटी शो में इस काम को करके दिखाया।
सेल्फी से उंगलियों के निशान कैसे निकाले जा सकते हैं
डेमो के दौरान, ली ने एक सेलिब्रेटी की सेल्फी का इस्तेमाल किया, जिसमें उसने 'पीस साइन' का पोज दिया था; इसके जरिए उन्होंने दिखाया कि आज के स्मार्टफोन फोटो में उंगलियों के निशान का कितना डेटा असल में दिखाई देता है।
ली ने शो के दौरान समझाया "अगर उंगलियों के पोर सीधे कैमरे की तरफ हों और लेंस से करीब 1.5 मीटर की दूरी से उनकी तस्वीर ली जाए, तो इस बात की बहुत ज्यादा संभावना है कि उंगलियों के निशान की जानकारी काफी साफ-साफ निकाली जा सकती है।"
उन्होंने आगे कहा कि 1.5 से 3 मीटर की दूरी से ली गई तस्वीरों में भी फिंगरप्रिंट के लगभग आधी डिटेल सामने आ सकते हैं।
पहली नजर में, इनमें से ज्यादातर तस्वीरें पूरी तरह से हानिरहित लगती हैं। लेकिन AI-एन्हांसमेंट और फोटो-एडिटिंग टूल्स का इस्तेमाल करके, ली ने कथित तौर पर धुंधले फिंगरप्रिंट पैटर्न को कहीं ज्यादा साफ बायोमेट्रिक तस्वीरों में बदल दिया।
इसका मतलब है कि कोई भी नॉर्मल सी चीज, जैसे कॉन्सर्ट की सेल्फी, घूमने-फिरने की तस्वीर, या क्रिकेट स्टेडियम में पोज देते हुए खींची गई फोटो, जिसे इंस्टाग्राम पर अपलोड किया जाता है, उससे आपकी निजी बायोमेट्रिक जानकारी लीक होने का खतरा हो सकता है।
यह पासवर्ड लीक से ज्यादा खतरनाक क्यों है?
पासवर्ड के उलट, फिंगरप्रिंट को आसानी से रीसेट नहीं किया जा सकता। सिक्योरिटी रिसर्चर का कहना है कि इसी वजह से बायोमेट्रिक चोरी ज्यादा चिंता की बात है। अगर कोई फिंगरप्रिंट डेटा तक पहुंच बना लेता है और उसका गलत इस्तेमाल करता है, तो नुकसान हमेशा के लिए हो सकता है। ली ने चेतावनी दी कि लीक हुआ बायोमेट्रिक डेटा आगे चलकर पहचान की चोरी, पैसों की धोखाधड़ी या संवेदनशील सिस्टम तक बिना इजाजत पहुंच बनाने का जरिया बन सकता है। जैसे-जैसे फोन, बैंकिंग ऐप, काम करने की जगहें और हवाई अड्डे फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन पर ज्यादा से ज्यादा निर्भर होते जा रहे हैं, इसके खतरे सिर्फ सोशल मीडिया की प्राइवेसी से कहीं ज्यादा बड़े होते जा रहे हैं।
क्या आपको फोटो पोस्ट करना बंद कर देना चाहिए?
विशेषज्ञ यह नहीं कह रहे हैं कि लोग फोटो खींचना पूरी तरह से बंद कर दें। लेकिन वे यह जरूर सलाह देते हैं कि हाई-रिजॉल्यूशन वाले क्लोज-अप शॉट्स को लेकर ज्यादा सावधान रहें, जिनमें उंगलियों के निशान साफ-साफ दिखाई देते हैं। कुछ आसान आदतें, जैसे कि कैमरे की तरफ सीधे उंगली न करना, पब्लिक अपलोड के लिए फोटो की क्वालिटी कम कर देना, या बहुत ज्यादा क्लोज सेल्फी न लेना, इनसे कुछ जोखिम कम हो सकते हैं।
लेखक के बारे में
Arpit Soniअर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।
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