AI के दौर में बढ़ेगी भरोसेमंद पत्रकारिता की ताकत, HT Digital CEO पुनीत जैन ने बताई वजह
AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच HT Digital के CEO पुनीत जैन ने चेतावनी दी है कि सिंथेटिक कंटेंट इंटरनेट पर भरोसे को कमजोर कर रहा है। उनका कहना है कि AI खुद भरोसा नहीं बनाता, बल्कि वर्षों की विश्वसनीय पत्रकारिता से बने भरोसे का इस्तेमाल करता है।

इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों यूजर्स को लंबे वक्त से इस बात पर भरोसा रहा है कि जो जानकारी वे पढ़ रहे हैं, उसके लिए कहीं ना कहीं कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद है। हालांकि, अब AI कंटेंट के दौर में यह भरोसा टूटता जा रहा है। आज कुछ ही सेकेंड में लेख, तस्वीरें, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट तैयार हो रहे हैं। इसी मुद्दे पर 15वें MMA IMPACT India 2026 में आयोजित ‘The Future of Discovery: Why Publishers Matter More in the Age of AI’ पैनल डिस्कशन के दौरान Hindustan Times डिजिटल के CEO पुनीत जैन और Inshorts और Public ऐप के CEO दीपित पुरकायस्थ ने गंभीर चिंता जताई।
दोनों का मानना है कि AI ने कंटेंट बनाना बेहद आसान कर दिया है, लेकिन जवाबदेही लगातार कम होती जा रही है। दीपित पुरकायस्थ ने कहा कि आज सोशल मीडिया पर राय देना और बड़ी मात्रा में कंटेंट तैयार करना बहुत आसान हो गया है। उन्होंने बताया कि समस्या सिर्फ फेक न्यूज तक सीमित नहीं है। कई बार ऐसा कंटेंट लोगों की सोच को उसी दिशा में ले जाता है, जिसे वे पहले से सही मानते हैं। इससे ‘इको चैंबर’ जैसी स्थिति बनती है, जहां लोगों को सिर्फ वही बातें दिखाई देती हैं, जिनसे वे सहमत होते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आज सच और झूठ के बीच एक बड़ा ग्रे एरिया बन चुका है। यही वजह है कि इंटरनेट पर भरोसा धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है। लोग अब किसी भी जानकारी को आंख बंद करके सच मानने से बचने लगे हैं।
कंटेंट का पड़ रहा है बुरा असर
पुनीत जैन ने बताया कि कुछ कैटेगरी में इंटरनेट पर इंडेक्स होने वाले 50 प्रतिशत से ज्यादा कंटेंट अब सिंथेटिक हो चुके हैं। उनके मुताबिक असली खतरा कंटेंट की संख्या नहीं, बल्कि उसका असर है। उन्होंने कहा कि पहले लोग यह मानकर किसी लेख को पढ़ते थे कि उसके पीछे कोई जिम्मेदार लेखक, पत्रकार या संस्था मौजूद है लेकिन जब पाठकों का भरोसा टूटता है, तो वे हर जानकारी पर शक करने लगते हैं। इसका असर सिर्फ एक प्लेटफॉर्म पर नहीं, बल्कि पूरी मीडिया इंडस्ट्री पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जब कोई यूजर AI से सवाल पूछता है, तो उसे आत्मविश्वास से भरा जवाब मिलता है लेकिन वह भरोसा AI ने खुद नहीं बनाया होता। वह भरोसा दशकों से पत्रकारों और भरोसेमंद मीडिया संस्थानों की ओर से तैयार किए गए कंटेंट से आता है। उनका कहना था कि AI की पूरी ताकत उन रिपोर्ट्स, लेखों और रिसर्च पर आधारित है, जिन्हें वर्षों से विश्वसनीय पब्लिशर्स ने तैयार किया है।
फैक्ट-चेकिंग और ट्रस्ट बेहद जरूरी
दीपित पुरकायस्थ ने भी कहा कि उनकी कंपनियां सिर्फ उन्हीं क्रिएटर्स और प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करती हैं, जहां फैक्ट-चेकिंग और भरोसा मौजूद हो। उनके मुताबिक भरोसा ऐसी चीज है, जिसके साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
चर्चा के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या एआई भविष्य में पत्रकारों की जगह ले सकता है। इस पर पुनीत जैन ने साफ कहा कि Hindustan Times में एआई का इस्तेमाल पत्रकारों को हटाने के लिए नहीं, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कंपनी AI का इस्तेमाल एडिटोरियल प्रक्रिया मजबूत करने, यूजर एक्सपीरियंस बेहतर बनाने और एडवर्टाइजिंग प्रोडक्ट्स को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए कर रही है।
उन्होंने मार्केटर्स के लिए भी तीन अहम सवाल बताए। पहला, क्या उनका विज्ञापन भरोसेमंद कंटेंट पर दिखाई दे रहा है या सिर्फ AI से बने सिंथेटिक कंटेंट पर। दूसरा, क्या यूजर वास्तव में ब्रैंड के साथ जुड़ रहा है या सिर्फ क्लिक बढ़ रहे हैं। और तीसरा, क्या कंपनियां सिर्फ तुरंत मिलने वाले नतीजों के पीछे भाग रही हैं या लंबे समय में ब्रैंड बनाने पर ध्यान दे रही हैं।
ब्रैंड्स को अपडेट होने की भी जरूरत
दीपित पुरकायस्थ ने ब्रैंड सेफ्टी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा ब्रैंड सेफ्टी सिस्टम पुराने डिजिटल दौर के हिसाब से बनाए गए थे। वहीं, अब AI बेस्ड सिंथेटिक कंटेंट के दौर में उन्हें तेजी से अपग्रेड करने की जरूरत है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में इंटरनेट पर सबसे बड़ी चुनौती भरोसे को बचाए रखना होगी क्योंकि अगर लोगों का भरोसा पूरी तरह टूट गया, तो सिर्फ मीडिया इंडस्ट्री ही नहीं, बल्कि पूरा डिजिटल इकोसिस्टम प्रभावित होगा।
लेखक के बारे में
Pranesh Tiwariप्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से
टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के
क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के
लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।
विशेषज्ञता और कार्यशैली
प्राणेश की विशेषज्ञता गैजेट्स, टेक इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों में है। वे तकनीकी बारीकियों और
कठिन शब्दावली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि एक सामान्य पाठक भी तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को आसानी से समझ सके। लेटेस्ट
गैजेट्स का रिव्यू करना और नए मोबाइल ऐप्स के फीचर्स को आजमाना उनके काम का पसंदीदा हिस्सा है। उनकी लेखन शैली में स्पष्टता,
रिसर्च और कहानी कहने का संतुलन देखने को मिलता है।
अब तक का सफर और उपलब्धियां
प्राणेश ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की। इसके बाद उन्होंने न्यूजबाइट्स (NewsBytes) में
सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में काम किया, जहां उन्होंने तकनीकी रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारतीय जनसंचार
संस्थान (IIMC), नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और अपनी प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित PTI अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं।
लेखन और व्यक्तिगत रुचियां
पत्रकारिता के साथ-साथ प्राणेश एक संवेदनशील और रचनात्मक लेखक भी हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ‘सिर्फ दोस्त: नए जमाने की
प्रेम कहानियां’ नामक लघुकथा संग्रह लिखा, जिसमें रिश्तों की बारीकियों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
उन्हें स्मार्टफोन, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन से जुड़े विषयों पर गहराई से रिसर्च करना और पढ़ना पसंद है। काम के
अलावा, उन्हें यात्रा करना भी बेहद पसंद है। उनके लिए यात्राएं केवल सुकून का जरिया नहीं, बल्कि नए अनुभवों और कहानियों को
खोजने का तरीका हैं।
चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही
होता है।
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