AI पर भरोसा करना पड़ा भारी! अपने आप डिलीट करने लगा इंजीनियर के ईमेल्स

Feb 23, 2026 09:07 pm ISTPranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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Meta की AI सेफ्टी इंजीनियर का OpenClaw एजेंट बेकाबू होकर 200 से ज्यादा Gmail ईमेल डिलीट कर बैठा, जबकि उसे कन्फर्मेशन लेने का निर्देश दिया गया था। ऐसे में AI पर भरोसा करने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 

AI पर भरोसा करना पड़ा भारी! अपने आप डिलीट करने लगा इंजीनियर के ईमेल्स

सिलिकॉन वैली में हाल ही में चर्चा में आए ओपन-सोर्स AI टूल OpenClaw के भरोसे पर बड़ा सवाल उठ रहा है। इसे डिवलपर Peter Steinberger ने बनाया था और दावा किया गया था कि यह ऐसे ऑटोनॉमस AI एजेंट तैयार कर सकता है जो यूजर की ओर से खुद फैसले लेकर काम कर सकें। इब इससे जुड़े एक मामले ने दिखा दिया है कि AI पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना भारी पड़ सकता है।

मामला Meta की हेड ऑफ AI सेफ्टी एंड एलाइनमेंट Summer Yue से जुड़ा है। ऐसे में जो खुद AI सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती हैं, वही AI के गलत बिहेवियर का शिकार बन गईं। Yue ने OpenClaw एजेंट को अपने Gmail अकाउंट से ऐड किया था और साफ निर्देश दिया था कि किसी भी ईमेल को डिलीट करने से पहले कन्फर्मेशन लिया जाए। यानी AI को पूरी छूट नहीं, बल्कि चुनिंदा लिमिटेड राइट्स दिए गए थे।

वहीं, AI एजेंट ने बिना परमिशन लिए ईमेल डिलीट करना शुरू कर दिया। Yue के मुताबिक, वह लगातार उसे रोकने की कोशिश करती रहीं लेकिन एजेंट मानो अपने ही मिशन पर था। फोन से कंट्रोल करने की कोशिश नाकाम रही और उन्हें तुरंत अपने Mac mini तक भागना पड़ा जिससे इस परेशानी को रोका जा सके। हालांकि, तब तक 200 से ज्यादा ईमेल डिलीट हो चुके थे। बाद में एजेंट ने अपनी गलती स्वीकार की और माफी भी मांगी, लेकिन जो नुकसान हो चुका था उसे वापस नहीं लाया जा सकता।

AI पर ज्यादा भरोसा करना पड़ा भारी

मामला सिर्फ एक तकनीकी खामी का नहीं था, बल्कि AI पर ज्यादा भरोसा करने की कीमत इंजीनियर को चुकानी पड़ी। Yue ने पहले इस एजेंट का इस्तेमाल कम जरूरी ईमेल्स पर किया था, जहां यह ठीक काम कर रहा था। इसी भरोसे के चलते उन्होंने इसे अपने मेन इनबॉक्स तक ऐक्सेस दिया। हालांकि, जैसे ही सेंसिटिव और जरूरी डाटा दांव पर लगा, AI का बिहेवियर अजीब हो गया।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे कई मामले

Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, सॉफ्टवेयर इंजीनियर Chris Boyd ने भी OpenClaw को iMessage एक्सेस दिया था। बदले में यह हुआ कि एजेंट ने 500 से ज्यादा अनचाहे मेसेज भेज दिए और उनका एड्रेस बुक स्पैम से भर गया। यानी जहां AI को मददगार बनना था, वह खुद दिक्कत बन गया। खुद Peter Steinberger भी मान चुके हैं कि OpenClaw पूरी तरह तैयार प्रोडक्ट नहीं है। इसके बावजूद, जब ऐसे टूल्स को लाइव सिस्टम्स से जोड़ा जाता है, तो जोखिम कई गुना बढ़ सकता है।

Pranesh Tiwari

लेखक के बारे में

Pranesh Tiwari

प्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

विशेषज्ञता और कार्यशैली
प्राणेश की विशेषज्ञता गैजेट्स, टेक इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों में है। वे तकनीकी बारीकियों और कठिन शब्दावली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि एक सामान्य पाठक भी तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को आसानी से समझ सके। लेटेस्ट गैजेट्स का रिव्यू करना और नए मोबाइल ऐप्स के फीचर्स को आजमाना उनके काम का पसंदीदा हिस्सा है। उनकी लेखन शैली में स्पष्टता, रिसर्च और कहानी कहने का संतुलन देखने को मिलता है।

अब तक का सफर और उपलब्धियां
प्राणेश ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की। इसके बाद उन्होंने न्यूजबाइट्स (NewsBytes) में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में काम किया, जहां उन्होंने तकनीकी रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और अपनी प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित PTI अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं।

लेखन और व्यक्तिगत रुचियां
पत्रकारिता के साथ-साथ प्राणेश एक संवेदनशील और रचनात्मक लेखक भी हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ‘सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां’ नामक लघुकथा संग्रह लिखा, जिसमें रिश्तों की बारीकियों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

उन्हें स्मार्टफोन, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन से जुड़े विषयों पर गहराई से रिसर्च करना और पढ़ना पसंद है। काम के अलावा, उन्हें यात्रा करना भी बेहद पसंद है। उनके लिए यात्राएं केवल सुकून का जरिया नहीं, बल्कि नए अनुभवों और कहानियों को खोजने का तरीका हैं।

चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही होता है।

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