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रूस-अमेरिका की परमाणु संधि खत्म, 50 साल में पहली बार कोई नियम नहीं; अब क्या होगा? समझिए

रूस-अमेरिका की परमाणु संधि खत्म, 50 साल में पहली बार कोई नियम नहीं; अब क्या होगा? समझिए

संक्षेप:

रूस और अमेरिका के बीच आखिरी परमाणु हथियार नियंत्रण संधि 'न्यू स्टार्ट' खत्म हो गई है। रूस ने अब सीमाओं को मानने से इनकार कर दिया है, जिससे वैश्विक परमाणु हथियारों की दौड़ फिर से शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है।

Feb 05, 2026 08:07 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, मॉस्को
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रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों पर लगी आखिरी बड़ी कानूनी पाबंदी खत्म हो गई है। आज यानी 5 फरवरी 2026 को न्यू स्टार्ट संधि (न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी) की अवधि समाप्त हो गई। अब लगभग 50 साल बाद पहली बार दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु हथियारों, जैसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, सबमरीन से लॉन्च मिसाइलें और बॉम्बर पर कोई बाध्यकारी सीमा या नियम नहीं बचा है। इससे दुनिया में परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू होने का खतरा बढ़ गया है, और विशेषज्ञ इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मान रहे हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

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सबसे पहले- New START संधि क्या है?

न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (New START) परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने के लिए 2010 में किया गया एक ऐतिहासिक समझौता था। 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने इस पर साइन किए थे। यह संधि 2011 में लागू हुई थी। इसका उद्देश्य उन रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करना था, जो किसी देश के प्रमुख राजनीतिक, सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होते हैं। तैनात हथियार वे माने जाते हैं जो सक्रिय सेवा में हों और तुरंत इस्तेमाल किए जा सकें।

संधि कैसे बनी? पूरी कहानी

परमाणु हथियारों पर रोक लगाने की कोशिश शीत युद्ध के समय से चली आ रही है। 1969 से अमेरिका और सोवियत संघ (बाद में रूस) ने कई दौर की बातें कीं।

  • 1970 के दशक में SALT समझौते: हथियारों की संख्या पर सीमा लगाई, लेकिन कम नहीं किए।
  • 1991 में START I: पहली बड़ी कटौती, जॉर्ज बुश और गोर्बाचेव के समय। हजारों हथियार कम हुए।
  • 1993 में START II: और कटौती, लेकिन पूरी तरह लागू नहीं हुई।
  • 2002 में SORT (मॉस्को संधि): बुश और पुतिन ने वारहेड्स 1,700-2200 तक कम करने पर सहमति, लेकिन जांच-पड़ताल कम थी।

फिर आई न्यू स्टार्ट। 2009 में बराक ओबामा (अमेरिका) और दिमित्री मेदवेदेव (रूस) ने बात शुरू की। 8 अप्रैल 2010 को प्राग (चेक गणराज्य) में हस्ताक्षर हुए। अमेरिकी सीनेट ने 2010 में मंजूरी दे दी थी। रूसी संसद ने 2011 में दी। आखिरकार संधि 5 फरवरी 2011 से लागू हुई। इसका मूल समय 10 साल तक ही था। हालांकि इसे एक बार 5 साल बढ़ाने का प्रावधान भी था, जो 2021 में जो बाइडेन ने इस्तेमाल किया और 2026 तक बढ़ा दिया।

2021 के बाद क्या हुआ?

2023 में रूस ने संधि में हिस्सा रोक दिया जैसे निरीक्षण बंद कर दिए, लेकिन सीमाओं का पालन करने का दावा जारी रखा। वजह बताई कि यूक्रेन युद्ध में अमेरिका मदद कर रहा है। आखिरकार आज (5 फरवरी 2026) संधि खत्म हो गई। अब दोनों देश स्वतंत्र हैं - जितने चाहें हथियार बढ़ा सकते हैं।

रूस बोला- अब परमाणु हथियारों की सीमा से मुक्त

रूस ने कहा है कि वह अब अमेरिका के साथ रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करने वाली न्यू स्टार्ट संधि से अब बंधा नहीं है, क्योंकि यह संधि गुरुवार को समाप्त हो रही है। इस बयान से वैश्विक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए “गंभीर क्षण” करार दिया है।

रूसी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि अमेरिका ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें दोनों देशों से 12 महीने तक संधि के तहत मिसाइलों और तैनात परमाणु वारहेड्स की सीमाओं का पालन जारी रखने की बात कही गई थी। मंत्रालय ने कहा- हम मानते हैं कि न्यू स्टार्ट संधि के पक्षकार अब इसके तहत किसी भी दायित्व या पारस्परिक घोषणाओं से बंधे नहीं हैं। हमारी बातों को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है, जो गलत और अफसोसजनक है।

संधि खत्म होने के संभावित असर

संधि की अवधि समाप्त होने के साथ ही रूस और अमेरिका दोनों के लिए मिसाइलों की संख्या बढ़ाने और सैकड़ों अतिरिक्त रणनीतिक वारहेड्स तैनात करने का रास्ता खुल जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करना तकनीकी और लॉजिस्टिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा और इसमें समय लगेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले संकेत दिए थे कि वे संधि के विस्तार पर विचार कर सकते हैं, लेकिन जनवरी में उन्होंने कहा था कि अगर यह खत्म होती है तो कोई बेहतर समझौता किया जाएगा। ट्रंप ने भविष्य की किसी भी परमाणु वार्ता में चीन को शामिल करने की भी बात कही है।

परमाणु हथियारों का मौजूदा संतुलन

रूस और अमेरिका मिलकर दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक परमाणु हथियारों का भंडार रखते हैं। जनवरी 2025 तक रूस के पास 4,309 और अमेरिका के पास 3,700 परमाणु वारहेड्स थे। फ्रांस और ब्रिटेन के पास क्रमशः 290 और 225 वारहेड्स हैं, जबकि चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियार माने जाते हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से एक नई हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है, जिसमें चीन के परमाणु विस्तार का भी असर पड़ेगा। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा के अनुसार सबसे अधिकतम स्थिति में दोनों देश अपनी तैनात परमाणु क्षमताओं को लगभग दोगुना कर सकते हैं।

पोप लियो ने भी चेताया

संधि की समाप्ति से पहले, पोप लियो ने दोनों देशों से अपील की कि वे हथियारों पर लगी सीमाओं को न छोड़ें और भय व अविश्वास की राजनीति के बजाय साझा वैश्विक हितों को प्राथमिकता दें। उधर, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि आधी सदी से अधिक समय में पहली बार दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जब रूस और अमेरिका यानी दुनिया के सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देश पर कोई बाध्यकारी सीमा नहीं होगी।

उन्होंने चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का जोखिम दशकों में सबसे अधिक है और दोनों देशों से आग्रह किया कि वे जल्द से जल्द नई, सत्यापनीय और जोखिम कम करने वाली संधि पर बातचीत शुरू करें। गुतारेस ने कहा- दुनिया अब रूस और अमेरिका से उम्मीद कर रही है कि वे अपने शब्दों को कार्रवाई में बदलें और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तुरंत कदम उठाएं।

Amit Kumar

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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