क्या है AI का MANAV फ्रेमवर्क, जिसकी PM नरेंद्र मोदी ने की समिट में बात; समझें पूरी बात

Feb 19, 2026 11:07 am ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पीएम मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इस बात पर फोकस करने की जरूरत है कि कैसे इसे AI-मानव सेंट्रिक बनाया जाए। इससे लोगों के जीवन स्तर को सुधारा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि AI गवर्नेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क बनना चाहिए।

क्या है AI का MANAV फ्रेमवर्क, जिसकी PM नरेंद्र मोदी ने की समिट में बात; समझें पूरी बात

पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के भारत मंडपम में AI समिट को संबोधित किया है। उन्होंने इस दौरान AI गर्वनेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क की जरूरत बताई। पीएम मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इस बात पर फोकस करने की जरूरत है कि कैसे इसे AI-मानव सेंट्रिक बनाया जाए। इससे लोगों के जीवन स्तर को सुधारा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि AI गवर्नेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क बनना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सवाल यह नहीं है कि AI से भविष्य में क्या होगा। अहम बात यह है कि वर्तमान में हम उसके साथ क्या करते हैं।

उन्होंने कहा कि AI भी एक ट्रांसफॉर्मेटिव पावर है। यदि वह दिशाहीन हुई तो बर्बादी और यदि सही दिशा में मिली तो बदलाव होगा। हमें यह समझना होगा कि कैसे AI को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाया जाए। ग्लोबल AI समिट का यही उद्देश्य है और भारत AI को किस नजरिए से देखता है, इसका प्रतिबिंब इस आयोजन की थीम में है। हमारा मंत्र ही है, सर्वजन सुखाय और सर्वजन हिताय। यही हमारा बेंचमार्क नहीं है। AI के लिए इंसान सिर्फ डेटा पॉइंट ना बन जाए, इसलिए उसे लोकतांत्रिक बनाना होगा। इसे लोगों को सशक्त बनाने के लिए प्रयोग करना होगा और इसके लिए तकनीक समावेशी होनी चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा कि जीपीएस की ही बात करें तो वह हमें रास्ता सुझाता है, लेकिन हमें किस दिशा में जाना है। उस पर आखिरी फैसला हमारा ही होता है। आज हम AI को जिस दिशा में लेकर जाएंगे, वैसा ही हमारा भविष्य तय होगा। उन्होंने कहा, 'मैं एआई के लिए MANAV विजन प्रस्तुत करता हूं। इसका अर्थ मनुष्य होता है। यह विजन कहता है कि AI एथिकल गाइडेंस पर आधारित हो। इसके अलावा राष्ट्रों की संप्रभुता का ख्याल रखा जाए। इसका अर्थ हुआ कि जिसका डेटा है, उसका अधिकार रहे। एकाधिकार ना हो। इसके अलावा वैलिड यानी नियमानुसार हो।'

पीएम मोदी ने कहा कि भारत का यह MANAV विजन 21वीं सदी की एआई आधारित दुनिया में मानव कल्याण का आधार बनेगा। सालों पहले जब इंटरनेट की शुरुआत हुई तो कोई सोच भी नहीं पाता था कि इससे कितनी नौकरियां बनेंगी। आज कल्पना करना मुश्किल है कि भविष्य में इससे कैसे-कैसे रोजगार पैदा होंगे। हमारे लिए भविष्य में कई अवसर छिपे हैं। यह ऐसा युग है कि ह्यूमन और इंटेलिजेंस सिस्टम मिलकर काम करेंगे।

'पूरी दुनिया के साथ शेयर होनी चाहिए AI तकनीक, छिपाकर ना रखा जाए'

उन्होंने कहा कि AI हमारे काम को और अधिक स्मार्ट एवं कामयाब बनाएगा। हम बेहतर डिजाइन करेंगे, तेजी से तैयार करेंगे। इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को सार्थक काम मिल सकेगा। यह इनोवेशन आने वाले समय में नए अवसरों को बढ़ाएगा। इसलिए हमें स्किलिंग, रीस्किलिंग और सीखने को एक जन आंदोलन बनाना होगा। यदि हम मिलकर आगे बढ़ें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी मानवता की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। पीएम मोदी ने कहा कि पारदर्शिता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। कुछ देश और कंपनियां मानते हैं कि यह एक रणनीतिक एसेट है। लेकिन भारत की सोच अलग है। हम मानते हैं कि यह तकनीक दुनिया के लिए तभी लाभकारी होगी, जब उसे शेयर किया जाएगा। उसके कोड ओपन होंगे और उन्हें दुनिया से शेयर किया जाएगा।

'यह पता चलना चाहिए कि असली क्या है और AI क्या है'

पीएम मोदी ने कहा कि आज की बहुत बड़ी आवश्यकता ग्लोबल स्टैंडर्ड्स बनाने की भी है। डीपफेक और बनावटी सामग्री दुनिया में अस्थिरता ला रहे हैं। फिजिकल वर्ल्ड में हम देखते हैं कि किस सामग्री में क्या मिला है। इसी तरह डिजिटल वर्ल्ड में भी कॉन्टेंट पर ऑथेंटिकेशन लेबल होने चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या AI से बनाया गया है। जैसे-जैसे AI ज्यादा टेक्स्ट, वीडियो और फोटो बना रहा है। वैसे-वैसे वॉटरमार्क की जरूरत भी बढ़ रही है। यह नीति हमें तकनीक में शुरुआत से ही लागू करनी होगी।

'AI में हमें भय नहीं बल्कि भाग्य दिखता है, तीन कंपनियों ने समिट में किए लॉन्च'

उन्होंने कहा कि हमें बच्चों की सेफ्टी पर भी सजग रहना होगा। AI स्पेस भी चाइल्ड सेफ और फैमिली गाइडेड होना चाहिए। आज दुनिया में दो तरह के लोग हैं। पहले वह जिन्हें AI में डर दिखता है। दूसरे वे हैं, जिन्हें AI में भाग्य दिखता है। मैं जिम्मेदारी से कहता हूं कि हमें भय नहीं है बल्कि भाग्य दिखता है। भारत को AI में भविष्य दिखता है। हमारे पास समझ भी है और क्षमता भी है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस समिट में तीन भारत कंपनियों ने अपने AI मॉडल और ऐप लॉन्च किए हैं।

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लेखक के बारे में

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दुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले सूर्यप्रकाश को पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। 10 वर्षों से ज्यादा समय से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यों से संबंधित खबरों का संपादन करते हैं एवं डेस्क इंचार्ज के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। समाचारों के त्वरित प्रकाशन से लेकर विस्तृत अध्ययन के साथ एक्सप्लेनर आदि में भी रुचि रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज प्रकाशित करने और खबरों के अंदर की खबर को विस्तार से समझाने में रुचि रखते हैं। हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को समझते हैं और उसके अनुसार ही पाठकों को खबरें देने के लिए तत्परता रखते हैं।


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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय महत्व के समाचारों में गहरी दिलचस्पी रखते हैं तो वहीं नैरेटिव वारफेयर के बारे में भी गहरा अध्ययन है। खबरों के अंदर की खबर क्या है और किसी भी समाचार के मायने क्या हैं? ऐसी जरूरी चीजों को पाठकों तक पहुंचाने में भी रुचि रखते हैं। लाइव हिन्दुस्तान में बीते 5 सालों से जुड़े हैं और गुणवत्तापूर्ण समाचार देने की मुहिम को बल प्रदान किया है। सूर्यप्रकाश को पाठकों की पसंद को समझने और उसके अनुसार समाचारों के प्रस्तुतिकरण में भी महारत हासिल है। कठिन विषयों को सरल शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने की रुचि है और इसी कारण एक्सप्लेनर आदि भी लिखते हैं।

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