
ब्रिटेन से लेकर बेल्जियम, कश्मीर पर झूठ बोल रहा था पाकिस्तान; अपनों ने ही कैसे कर दिया खेला
विरोध प्रदर्शन का सबसे मुखर चेहरा ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड में देखने को मिला। यहां पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के बैनर तले बड़ी संख्या में कश्मीरी जुटे।
कश्मीर के प्रति अपनी कथित हमदर्दी दिखाने की पाकिस्तान की वार्षिक कोशिश इस बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का सबब बन गई। हर साल 5 फरवरी को मनाए जाने वाले पाकिस्तान के तथाकथित कश्मीर एकजुटता दिवस (Kashmir Solidarity Day) को कश्मीरी प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी असंतुष्टों ने एक सुर में खारिज कर दिया। ब्रिटेन से लेकर बेल्जियम तक प्रदर्शनकारियों ने इसे दशकों की हिंसा, दमन और जनसांख्यिकीय हेरफेर को छिपाने के लिए रचा गया एक प्रोपोगेंडा स्टंट करार दिया।
यूरोप के विभिन्न शहरों में हुए इन प्रदर्शनों ने इस्लामाबाद के उस नैरेटिव को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया, जिसमें वह खुद को कश्मीरियों का रहनुमा बताता है। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पर जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध चलाने और अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में राजनीतिक अधिकारों को कुचलने का सीधा आरोप लगाया।
यह एकजुटता नहीं, विश्वासघात का दिन है
विरोध प्रदर्शन का सबसे मुखर चेहरा ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड में देखने को मिला। यहां पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के बैनर तले बड़ी संख्या में कश्मीरी जुटे। प्रदर्शनकारियों ने "हमारा राज्य हमारा है, कब्जा अस्वीकार्य है" और "राज्य प्रायोजित आतंकवाद बंद करो" जैसे नारों के साथ आसमान गुंजा दिया।
UKPNP के नेताओं ने इस दौरान रोंगटे खड़े कर देने वाले आंकड़े साझा किए। उन्होंने कहा कि पिछले 78 वर्षों में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद और छद्म युद्ध के कारण एक लाख से अधिक कश्मीरियों ने अपनी जान गंवाई है। ऐसे में पाकिस्तान का एकजुटता का प्रदर्शन करना वास्तविक पीड़ा का मजाक उड़ाने जैसा है।
जम्मू कश्मीर नेशनल इंडिपेंडेंस एलायंस (JKNIA) के अध्यक्ष महमूद अहमद कश्मीरी ने कहा कि पाकिस्तान की बयानबाजी उन लोगों का अपमान है जिनकी राष्ट्रीय पहचान और प्राकृतिक संसाधनों को व्यवस्थित रूप से नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारी कश्मीर की नदियों, भूमि और खनिजों का दोहन कर रहे हैं, जबकि वहां के लोगों की राजनीतिक आवाज को दबा दिया गया है।
UKPNP के केंद्रीय सूचना सचिव सरदार टिक्का खान ताहिर ने पाक के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में 'स्टेट सब्जेक्ट लॉ' के उल्लंघन का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए गैर-स्थानीय लोगों को वहां बसाया जा रहा है ताकि क्षेत्र की जनसांख्यिकी को बदला जा सके।
ब्रसेल्स और लंदन में भी गूंजा विरोध
सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ के मुख्यालय ब्रसेल्स में भी पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हुए। UKPNP की विदेश मामलों की समिति ने एक बयान में कहा कि 5 फरवरी अब केवल एक खोखली राजनीतिक रस्म बनकर रह गई है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की आंखों में धूल झोंकना है। UKPNP के अध्यक्ष जमील मकसूद ने स्पष्ट किया कि कश्मीरियों को मंचित एकजुटता की नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और अपने भविष्य का फैसला करने के अधिकार की आवश्यकता है।
प्रदर्शनों के दौरान वक्ताओं ने 22 अक्टूबर 1947 के उस काले दिन को भी याद किया, जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में कबायली लड़ाकों को भेजकर राज्य के विभाजन की नींव रखी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जो देश कश्मीर के विखंडन का मुख्य वास्तुकार रहा है, वह किस नैतिक अधिकार से आज सहानुभूति का ढोंग कर रहा है।
UKPNP के चेयरमैन सरदार शौकत अली कश्मीरी ने हिंसा और सांप्रदायिकता को खारिज करते हुए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रतिरोध के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों से हस्तक्षेप करने की अपील की।
बेनकाब हुआ पाकिस्तान
यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब खबरें आई थीं कि पाकिस्तान ने इस साल 5 फरवरी के लिए एक व्याप दुष्प्रचार अभियान शुरू किया था। इसमें पाकिस्तानी दूतावासों, शिक्षण संस्थानों और मीडिया का उपयोग करके कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की योजना थी। हालांकि, यूरोप की सड़कों पर उतरे असली कश्मीरियों ने पाकिस्तान के इस सावधानीपूर्वक बुने गए नैरेटिव को तार-तार कर दिया।

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