
रिपोर्ट में गैस संकट को लेकर भी चिंता जताई गई है। दुनिया का 20 फीसदी एलएनजी हॉर्मुज से गुजरता है। इसकी रुकावट 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई गैस कटौती से कहीं अधिक गंभीर होगी।

थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.7 अरब डॉलर पेट्रियट जैसे एयर डिफेंस इंटरसेप्टर सिस्टम पर खर्च किए गए हैं, जबकि 1.5 अरब डॉलर मिसाइलों और अन्य आक्रामक हथियारों पर किए गए हैं।

Explainer: क्रिकेट मैच के दौरान जब आप सेलेब्स को देखते हैं तो आपके मन में भी आता होगा न कि ये सेलेब्स भी आम लोगों की तरह टिकट लेते हैं? अगर, हां, तो यहीं आपको जवाब छिपा है।

LGM-30G Minuteman III डूम्स्ड मिसाइल नॉर्थ कोरिया और चीन समेत ज़्यादा से ज़्यादा 13,000 KM (8,000 मील) की दूरी तक तीन अलग-अलग टारगेट किए गए Mk 12A न्यूक्लियर वॉरहेड ले जा सकते हैं।

Nitish Kumar: 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले दम पर शानदार प्रदर्शन किया, जबकि जदयू मात्र 2 सीटों पर सिमट गई। यह पहला संकेत था कि बिहार में भाजपा का जनाधार अब स्वतंत्र रूप से बढ़ चुका है।

Toxic Release Date: सुपरस्टार यश की फिल्म 'टॉक्सिक' की रिलीज डेट अचानक बदल गई। यश ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि उन्होंने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से ये फैसला लिया है।

टेक्सस में लैंड करने के बाद, शाम 4:03 बजे ट्रंप ने फिर से रिपोर्टरों से कहा कि वह बातचीत से खुश नहीं हैं, लेकिन उन्होंने यह बताने से मना कर दिया कि उन्होंने मिलिट्री एक्शन को मंजूरी दी है या नहीं।

पहलवी काल में ईरान ने तेल की कमाई के दम पर तेज आर्थिक विकास किया था। तेहरान जैसे शहरों को उस समय मिडिल ईस्ट का मॉडर्न चेहरा कहा जाता था, जहां ऊंची इमारतें, चौड़ी सड़कें, सिनेमा हॉल, पश्चिमी कपड़े और खुला सामाजिक माहौल आम बात थी।

जानिए सेनाएं Claude और ChatGPT जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल हथियारों के बजाय इंटेलिजेंस और रणनीतिक योजना के लिए कैसे कर रही हैं। पेंटागन और एंथ्रोपिक की डील का खास न्यूज एक्सप्लेनर।

जानिए कैसे ईरान के सस्ते 'शाहेद-136' और कामिकेज ड्रोन्स यूक्रेन से लेकर लाल सागर तक आधुनिक युद्ध की तस्वीर बदल रहे हैं। महाशक्तियों के लिए ये 'सस्ते' हथियार क्यों बने बड़ा सिरदर्द? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

भारत के लिए चिंता की बात यह है कि संयुक्त अरब अमीरात में 30 फीसदी आबादी भारतीय मूल की है। इसलिए हमारे हित ईरान से ज्यादा खाड़ी देशों से जुड़ते हैं। चाबहार पोर्ट और तेल को लेकर हमारे संबंध रहे हैं, लेकिन उनमें कमी है। बीते कुछ सालों में खामेनेई ने भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणियां की थीं।

आखिर चीन इस जंग को लेकर चुप क्यों है। वह इस पर कुछ बोलने से बच क्यों रहा है? चीन की ओर से ईरानी नेता के कत्ल की निंदा की गई है। लेकिन उस एक बयान के आगे बढ़ने की जहमत चीन ने नहीं उठाई है। उसने अमेरिका या इजरायल पर किसी तरह के आर्थिक प्रतिबंध या सख्ती की बात भी नहीं की है।

सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान ने पड़ोस के मुसलमान देशों पर हमला करके गलती की। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि गल्फ कॉपरेशन काउंसिल के वाले इन 6 देशों ने अब ईरान के खिलाफ साझा बयान जारी किया है। इन देशों का कहना है कि हम भी जवाब देने का अधिकार रखते हैं।

यदि इस यु्द्ध का विस्तार हुआ तो इसका असर पूरे मिडल ईस्ट पर होगा। इसके लक्षण तब दिखने भी लगे, जब ईरान ने अकेले ही 8 देशों पर हमला किया है। इस हमले का सीधा असर भारत पर भी अगले कुछ दिनों में देखने को मिल सकता है।

Tamilnadu Politics: ओ पनीरसेल्वम जिन्हें दोस्त और दुश्मन OPS कहते हैं, शुक्रवार को चेन्नई में DMK के हेडक्वार्टर अन्ना अरिवालयम में मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और DMK के सीनियर नेताओं की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हो गए।

Nepal Parliamentary Election: पिछले साल नेपाल में हुए विरोध प्रदर्शनों ने देश में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को लेकर युवाओं की हताशा को उजागर किया था, जहां लगभग 20 फीसदी युवा बेरोजगार हैं।

इजरायल और भारत के संबंधों के नाम पर पाकिस्तान को लेकर भी कयास लगने लगे हैं और कतर के मीडिया संस्थान अलजजीरा ने इसे उसकी सुरक्षा से जोड़ा है। अलजजीरा लिखता है कि पीएम मोदी का यह इजरायल दौरा ऐसा था, जिसमें उन्होंने खूब दिखाने की कोशिश की कि इजरायल के भारत कितना करीब है।

बौखलाए पाकिस्तान ने जंग में भी भारत को घसीटने की कोशिश की है। पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान पर जब से तालिबान का शासन आया है, उसने अपने मुल्क को भारत की कॉलोनी यानी उपनिवेश बना लिया है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी के मुकाबले भारत से रूस की तेल खरीद 40 फीसदी तक कम हो सकती है। इसके अलावा ईरान से पहले ही तेल खरीद में कमी की जा चुकी है। ऐसी स्थिति में दोनों देशों के लिए चीन ही सबसे बड़ा खरीददार बचा है और उसे ही फुल डिस्काउंट के साथ तेल ऑफर किया जा रहा है।

ERAM एक स्टैंड-ऑफ क्रूज़ मिसाइल है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे दुश्मन की सीमा से काफी दूर रहते हुए ही दागा जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य हाई टारगेट पर सटीक हमला करना है। खास बात यह है कि इसकी लागत काफी कम रखी गई है।