Explainer: LPG के लिए त्राहिमाम, कैसे भारत का चलेगा काम; एक्सपर्ट ने बताए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के विकल्प
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर इसी तरह बंदी के हालात रहे तो आने वाले कुछ दिनों समस्या और बढ़ सकती है। ऐसे हालात में सवाल यही है कि आखिर इस संकट से निजात कब तक मिलेगी। इस संबंध में हमने भू-राजनीतिक मामलों की समझ रखने वाले हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विमल कश्यप से बात की।

ईरान में चल रही जंग के चलते भारत समेत कई देशों में तेल और गैस का संकट पैदा हो गया है। फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त रिजर्व है, लेकिन एलपीजी की सप्लाई में इसका तत्काल असर दिखने लगा है। देश के तमाम शहरों के रेस्तरां में गैस चूल्हे बंद होने की कगार पर हैं। इसके अलावा संसद में भी इस मुद्दे पर हंगामा बरपा है। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर इसी तरह बंदी के हालात रहे तो आने वाले कुछ दिनों समस्या और बढ़ सकती है। ऐसे हालात में सवाल यही है कि आखिर इस संकट से निजात कब तक मिलेगी। इस संबंध में हमने भू-राजनीतिक मामलों की समझ रखने वाले हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विमल कश्यप से बात की।
उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से देश की जरूरत का गैस और तेल का बड़ा हिस्सा आता है। इसलिए ईरान में यदि जंग के चलते यह रूट प्रभावित है तो भारत पर उसका सीधा असर बना ही रहेगा। लेकिन इस संकट में कुछ विकल्पों की बात भी उन्होंने की। उन्होंने कहा कि पहला विकल्प यह है कि अमेरिका ने भारत को एक महीने के लिए मोहलत दी है। इस दौरान हम रूसी तेल की खरीद कर सकते हैं। हमें प्रयास करना चाहिए कि इस अवधि में अपने ऑइल रिजर्व को बढ़ा लें। हमारे पास कुछ वैकल्पिक स्रोत भी हैं, जैसे ब्रूनेई। यहां बहुत ज्यादा उत्पादन नहीं होता है, लेकिन 1990 के दशक तक हम यहां से खरीद करते रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का विकल्प हो सकता है स्ट्रेट ऑफ मलक्का?
फिलहाल ब्रूनेई से तेल और गैस की खरीद करने वाले देशों में जापान और चीन प्रमुख हैं। भारत ने भी बीते कुछ सालों में इस संबंध में प्रयास तेज किए हैं। पहली बार भारतीय पीएम के तौर पर नरेंद्र मोदी ने ब्रूनेई का दौरा भी किया था। यहां से तेल और गैस की खरीद यदि भारत बढ़ाए तो उसकी सप्लाई स्ट्रेट ऑफ मलक्का से होगी और यह जंग जारी रहने की स्थिति में भी बाधित नहीं होगा। इस प्रकार यहां से होने वाली तेल खरीद भारत को तात्कालिक तौर पर कुछ राहत दे सकती है। डॉ. कश्यप कहते हैं, ‘भारत तेल और गैस की खपत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। ऐसे में यदि वह कुछ चुनिंदा देशों पर अपनी जरूरत के लिए निर्भर रहेगा तो चिंता हमेशा बनी रहेगी। इसलिए अपनी जरूरतों की सप्लाई के अलग-अलग विकल्प रखना जरूरी है।’
'30 दिन में अपना ऑइल रिजर्व बढ़ा लेना जरूरी'
हालांकि वह यह भी कहते हैं कि इस युद्ध की समाप्ति तक संकट बने ही रहना है, लेकिन कुछ विकल्पों के जरिए उसकी तीव्रता कम की जा सकती है। इसके अलावा भविष्य के लिहाज से भी यह जरूरी है कि अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई जा सके। फिलहाल एक विकल्प निकट भविष्य में यह है कि अमेरिका से भी सप्लाई बढ़ा ली जाए। रूस से तेल खरीद के लिए अमेरिका ने 30 दिन की मोहलत दी है। इस अवधि का इस्तेमाल करते हुए हम अपना ऑइल रिजर्व मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने साफ कहा कि भारत के लिए यह एक सबक है कि हम मिडल ईस्ट के देशों के ही भरोसे नहीं रह सकते।
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