जन्म से पहले ही बन गया बर्थ सर्टिफिकेट, 2 सगे भाईयों में एक महीने का अंतर; बंगाल SIR में कई खुलासे
जांच में पता चला कि उनका जन्म प्रमाण पत्र उनके जन्म से दो दिन पहले, यानी 4 मार्च 1993 को ही पंजीकृत कर लिया गया था। चुनाव आयोग को कई अन्य मामलों में भी गड़बड़ी मिली है।

Bengal SIR Updates: पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान के दौरान स्क्रूटनी में चौंकाने वाले और अजीबोगरीब आंकड़े सामने आए हैं। चुनाव आयोग (ECI) के सूत्रों के अनुसार, दस्तावेजों की जांच में कई ऐसी विसंगतियां मिली हैं जो वैज्ञानिक रूप से असंभव प्रतीत होती हैं। इससे सूची की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोलकाता के बाहरी इलाके मेटियाब्रुज में एक परिवार के दस सदस्यों के दस्तावेजों की जांच में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
एक ही मां-पिता के संतान इरशाद और शेख नउसद की जन्म तिथियों में एक महीने से भी कम का अंतर पाया गया है। दस्तावेजों के अनुसार, उनकी जन्म तिथियां क्रमशः 5 दिसंबर 1990 और 1 जनवरी 1991 दर्ज हैं। दिलचस्प बात यह है कि परिवार के कुल दस बच्चों में से चार का जन्म 1 जनवरी को होना दर्ज है। जांच में सामने आया है कि पिता का नाम अलग-अलग दस्तावेजों में अलग-अलग है। जबकि माता का नाम मनोवारा बीबी लगातार एक समान पाया गया है।
जन्म से दो दिन पहले प्रमाण पत्र जारी
एक अन्य चौंकाने वाले मामले में, उत्तर 24 परगना जिले के बारांनगर में एक व्यक्ति के जन्म प्रमाण पत्र से जुड़ी धोखाधड़ी सामने आई है। सरकार द्वारा प्रस्तुत जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार, उनका जन्म 6 मार्च 1993 को हुआ था। लेकिन जांच में पता चला कि उनका जन्म प्रमाण पत्र उनके जन्म से दो दिन पहले, यानी 4 मार्च 1993 को ही पंजीकृत कर लिया गया था। चुनाव आयोग को कई अन्य मामलों में भी गड़बड़ी मिली है।
दस्तावेजों के अनुसार, एक मतदाता को 2002 की सूची में 5 वर्ष की उम्र में दिखाया गया है, जिसने इस SIR में आवेदन किया है। वहीं, एक अन्य मामले में मतदाता की उम्र केवल 13 वर्ष पाई गई। पूर्व बर्धमान के मेमारी के अलाउद्दीन शेख के प्रपत्र में जन्म तिथि के स्थान पर X/X/1987 दर्ज है।
इन तमाम मामलों को सत्यापन के लिए निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) को भेज दिया गया है। चुनाव आयोग अस्पताल के रिकॉर्ड से भी इन जानकारियों की पुष्टि कराएगा। सुनवाई और डेटा अपलोडिंग चरण के बाद अब EROs और 8,000 से अधिक माइक्रो-ऑब्जर्वर्स द्वारा सुपर चेकिंग की जा रही है ताकि मतदाता सूची से अयोग्य और फर्जी नामों को हटाया जा सके और आगामी चुनावों के लिए एक त्रुटिहीन सूची तैयार की जा सके।
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