जन्म से पहले ही बन गया बर्थ सर्टिफिकेट, 2 सगे भाईयों में एक महीने का अंतर; बंगाल SIR में कई खुलासे

Feb 13, 2026 10:02 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता।
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जांच में पता चला कि उनका जन्म प्रमाण पत्र उनके जन्म से दो दिन पहले, यानी 4 मार्च 1993 को ही पंजीकृत कर लिया गया था। चुनाव आयोग को कई अन्य मामलों में भी गड़बड़ी मिली है।

जन्म से पहले ही बन गया बर्थ सर्टिफिकेट, 2 सगे भाईयों में एक महीने का अंतर; बंगाल SIR में कई खुलासे

Bengal SIR Updates: पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान के दौरान स्क्रूटनी में चौंकाने वाले और अजीबोगरीब आंकड़े सामने आए हैं। चुनाव आयोग (ECI) के सूत्रों के अनुसार, दस्तावेजों की जांच में कई ऐसी विसंगतियां मिली हैं जो वैज्ञानिक रूप से असंभव प्रतीत होती हैं। इससे सूची की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोलकाता के बाहरी इलाके मेटियाब्रुज में एक परिवार के दस सदस्यों के दस्तावेजों की जांच में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।

एक ही मां-पिता के संतान इरशाद और शेख नउसद की जन्म तिथियों में एक महीने से भी कम का अंतर पाया गया है। दस्तावेजों के अनुसार, उनकी जन्म तिथियां क्रमशः 5 दिसंबर 1990 और 1 जनवरी 1991 दर्ज हैं। दिलचस्प बात यह है कि परिवार के कुल दस बच्चों में से चार का जन्म 1 जनवरी को होना दर्ज है। जांच में सामने आया है कि पिता का नाम अलग-अलग दस्तावेजों में अलग-अलग है। जबकि माता का नाम मनोवारा बीबी लगातार एक समान पाया गया है।

जन्म से दो दिन पहले प्रमाण पत्र जारी

एक अन्य चौंकाने वाले मामले में, उत्तर 24 परगना जिले के बारांनगर में एक व्यक्ति के जन्म प्रमाण पत्र से जुड़ी धोखाधड़ी सामने आई है। सरकार द्वारा प्रस्तुत जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार, उनका जन्म 6 मार्च 1993 को हुआ था। लेकिन जांच में पता चला कि उनका जन्म प्रमाण पत्र उनके जन्म से दो दिन पहले, यानी 4 मार्च 1993 को ही पंजीकृत कर लिया गया था। चुनाव आयोग को कई अन्य मामलों में भी गड़बड़ी मिली है।

दस्तावेजों के अनुसार, एक मतदाता को 2002 की सूची में 5 वर्ष की उम्र में दिखाया गया है, जिसने इस SIR में आवेदन किया है। वहीं, एक अन्य मामले में मतदाता की उम्र केवल 13 वर्ष पाई गई। पूर्व बर्धमान के मेमारी के अलाउद्दीन शेख के प्रपत्र में जन्म तिथि के स्थान पर X/X/1987 दर्ज है।

इन तमाम मामलों को सत्यापन के लिए निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) को भेज दिया गया है। चुनाव आयोग अस्पताल के रिकॉर्ड से भी इन जानकारियों की पुष्टि कराएगा। सुनवाई और डेटा अपलोडिंग चरण के बाद अब EROs और 8,000 से अधिक माइक्रो-ऑब्जर्वर्स द्वारा सुपर चेकिंग की जा रही है ताकि मतदाता सूची से अयोग्य और फर्जी नामों को हटाया जा सके और आगामी चुनावों के लिए एक त्रुटिहीन सूची तैयार की जा सके।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


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