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मनोज सिन्हा

विद्यार्थी राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति में यूं तो कई राजनेताओं ने कदम रखा लेकिन इस फेहरिस्त में मनोज सिन्हा का नाम उनकी बौद्धिक क्षमता, कर्मठता और ईमानदारी के कारण ऊपर रखा जाता है। 

13वीं लोकसभा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले सांसदों में वह एक थे। आईआईटियन होने के बाद राजनीति में आना, उस पर भी खुद को लो प्रोफाइल व्यक्तित्व के रूप में विकसित करना उन्हें विशेष बनाता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय उन्हें मुख्यमंत्री का दावेदार भी माना जा रहा था। वर्तमान में वह रेलवे राज्यमंत्री और संचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे  हैं। 

विद्यार्थी राजनीति से खुली राजनीति की राह  

मनोज सिन्हा का जन्म 1 जुलाई, 1959 को पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के मोहनपुरा में हुआ। वाराणसी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) से उन्होंने बीटेक और फिर सिविल इंजीनियरिंग में एमटेक किया। इस दौरान ही उन्होंने छात्र संघ चुनाव लड़ा और 1982 में यहां के विद्यार्थी संघ के वह अध्यक्ष चुने गए। 1992 में राष्ट्रीय राजनीति में उनकी शुरुआत हुई।

राजनीतिक जीवन 

भूमिहार जाति के मनोज सिन्हा ह्दय से किसान हैं। सामान्यत: वह धोती-कुर्ता ही पहनते हैं। 1992 में वह पहली बार चुनकर लोकसभा पहुंचे, 1999 में पुन: निर्वाचित हुए। संसद में अपनी अच्छी उपस्थिति के लिए भी जाने जाते हैं। सांसद निधि की पूरी राशि को अपने निर्वाचन क्षेत्र में खर्च करने का उन्होंने उदाहरण भी बखूबी प्रस्तुत किया है। पिछड़े गांवों के लिए उनका किया काम उल्लेखनीय है। 

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माफ़ कीजिए आप जो खबर ढूंढ रहे हैं , वह उपलब्ध नहीं है

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पप्पू को कोई मरने नहीं देता

पप्पू परेशान होकर अपने फेकू से: कहां मरूं मैं, कोई मरने ही नहीं देता.. 

फेकूः क्यों क्या हुआ? 



पप्पूः किसी लड़की को बोलता हूं कि तुम पर मरता हूं तो ब्लॉक कर देती हैं।