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मालिनी अवस्थी

बनारस घराने की प्रसिद्ध ठुमरी गायिका गिरिजा देवी की विरासत को आगे बढ़ाने वाली उनकी शिष्या मालिनी अवस्थी आज लोकगायन के क्षेत्र में बड़ा नाम हैं। यूं तो वह भोजपुरी गायिका के रूप में प्रसिद्ध हैं लेकिन ठुमरी और कजरी को उन्होंने आम भारतीय श्रोताओं के बीच पहचान दिलाने में योगदान दिया है। अपनी हाईपिच आवाज और प्रभावी मंचीय प्रस्तुतियों के कारण वह युवाओं के बीच भी खास पहचान रखती हैं। भारत सरकार ने 2016 में उन्हें पद्म श्री से नवाजा। 

जन्म, शिक्षा और पुरस्कार

मालिनी अवस्थी का जन्म 11 फरवरी 1967 को उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में हुआ। लखनऊ स्थित भातखंडे संगीत संस्थान से उन्होंने शिक्षा ली। बनारस की पौराणिक हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी की वह एक गंडा बांध शिष्या हैं। मान्यता है कि शिष्य की संगीत शिक्षा से संतुष्ट होने पर गंडा (विशेष धागा) बांधा जाता है। मालिनी अवस्थी की शादी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अवनीश अवस्थी से हुई है, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में पर्यटन विभाग के मुख्य सचिव हैं। नागरिक सम्मान के अलावा उन्हें प्रदेश स्तर के भी पुरस्कार मिले हैं, जिसमें यश भारती (उत्तर प्रदेश सरकार) पुरस्कार (2006), नारी गौरव (2000) और कालिदास सम्मान (2014) शामिल हैं।

गायन करियर

उन्होंने बॉलीवुड फिल्म एजेंट विनोद, दम लगा के हईशा के अलावा भोजपुरी फिल्में जय हो छठ मैया, भोले सिव, बम बम बोले, चारफुटिया छोकरे के लिए भी गीत गाए हैं। वह मुख्यरूप से अवधी, बुंदेलखंडी और भोजपुरी भाषा में गाती हैं। उनके गीतों में बिहार जैसे राज्यों से रोजी की तलाश में होने वाले पलायन का दर्द मिलता है। साथ ही दादरा, कजरी, झूला, होली, सोहर, बन्ना, विवाह गीत, बिरहा, धोबिया और निरुगुन शैली के लोकगीत गाकर वह श्रोताओं के मन में तमाम भाव जगा जाती हैं।

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माफ़ कीजिए आप जो खबर ढूंढ रहे हैं , वह उपलब्ध नहीं है

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पप्पू को कोई मरने नहीं देता

पप्पू परेशान होकर अपने फेकू से: कहां मरूं मैं, कोई मरने ही नहीं देता.. 

फेकूः क्यों क्या हुआ? 



पप्पूः किसी लड़की को बोलता हूं कि तुम पर मरता हूं तो ब्लॉक कर देती हैं।