Hindi NewsEntertainmentFilm-reviewBlind Review: न डायरेक्शन अच्छा न सोनम की एक्टिंग, सिर्फ इस एक वजह से देख सकते हैं फिल्म

Blind Review: न डायरेक्शन अच्छा न सोनम की एक्टिंग, सिर्फ इस एक वजह से देख सकते हैं फिल्म

Blind Review: जियो सिनेमा पर सोनम कपूर की फिल्म 'ब्लाइंड' रिलीज हो गई है। यह फिल्म कोरियाई फिल्म 'ब्लाइंड' की हिंदी रीमेक है। आइए जानते हैं इस फिल्म में क्या कुछ है खास और कहां खा गई मात।

Blind Review: न डायरेक्शन अच्छा न सोनम की एक्टिंग, सिर्फ इस एक वजह से देख सकते हैं फिल्म
Vartika Tolani लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीFri, 7 July 2023 07:01 AM
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फिल्म: ब्लाइंड
स्टार कास्ट: सोनम कपूर, विनय पाठक, शुभम सराफ, दानेश रज़वी, पूरब कोहली, लिलेट दुबे, जावेद खान
डायरेक्टर: शोम मखीजा
कहां देखें: जियो सिनेमा

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई ब्लाइंड ़में सोनम कपूर ने दृष्टिहीन लड़की का किरदार निभाया है। सोनम कपूर पिछली बार निर्देशक अभिषेक शर्मा  की फिल्म 'जोया फैक्टर' में साउथ के स्टार दुलकर सलमान के साथ नजर आई थीं, जो 2019 में रिलीज हुई थी। एक तरह से चार साल बाद वह कमबैक कर रही हैं और इसके लिए उन्होंने  2011 में इसी नाम से आई सुपरहिट साउथ कोरियन फिल्म 'ब्लाइंड' को चुना। क्या सोनम अपनी एक्टिंग से इस क्राइम थ्रिलर फिल्म में चार चांद लगा पाईं या नहीं? आइए जानते हैं।

तो कुछ ऐसी है फिल्म की कहानी
कहानी की शुरुआत एक दुर्घटना से होती है। इसमें स्कॉटलैंड पुलिस की इंस्पेक्टर जिया सिंह (सोनम कपूर) की आंखों की रोशनी चली जाती है, जबकि उनके भाई का निधन हो जाता है। भाई के चले जाने के बाद जिया जैसे-तैसे अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करती है। लेकिन, एक राइड उनकी पूरी जिंदगी बदलकर रख देती है। होता ये है कि जब जिया अपनी मां के घर से अपने घर जाने के लिए टैक्सी का इंतजार कर रही होती है, तब एक गाड़ी आती है और नेत्रहीन जिया उसे टैक्सी समझकर उसमें बैठ जाती है। कुछ देर बात उसे इस बात का एहसास होता है कि उस गाड़ी में कोई-न-कोई समस्या तो जरूर है। वह ड्राइवर से सवाल करती है। ड्राइवर पकड़े जाने के डर से जिया को बीच रास्ते में ही उतार देता है। अगले दिन जब जिया को पता चलता है कि जहां से उन्होंने टैक्सी ली थी उसी के आस-पास वाले इलाके से एक लड़की किडनैप हो गई है तो वह सीधे पुलिस के पास जाती है। वह पुलिस को अपने साथ हुए कांड के बारे में बताती है, लेकिन ऑफिसर्स उन्हें सीरियसली नहीं लेते हैं। अब वह पुलिस को अपनी बातों पर कैसे यकीन दिलवाएगी? एक के बाद एक किडनैप हो रही लड़कियों को कैसे बचाएगी? ये सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

कम्फर्ट जोन से बाहर निकलीं सोनम कपूर 
सोनम कपूर ने चार साल बाद इस फिल्म के जरिए इंडस्ट्री में वापसी की है। मानना पड़ेगा सोनम ने इस फिल्म के लिए 'हां' कहकर बहुत बड़ा रिस्क लिया है, क्योंकि मां बनने से पहले तक सोनम कपूर ने कभी भी ऐसे चैलेंजिंग रोल्स नहीं किए थे। 'नीरजा' को छोड़कर उन्होंने हमेशा लव स्टोरी टाइप की ही फिल्में साइन की थीं। इसके बावजूद उन्होंने चार साल बाद वापसी के लिए क्राइम ड्रामा जॉनर चुना। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या सोनम कपूर इस चैलेंजिंग रोल को सही तरीके से निभा पाने में कामयाब हो पाईं? हमारा जवाब है नहीं।  बहुत सारी जगहों पर ऐसा नहीं लग रहा था कि वह अंधी लड़की का किरदार सही से कर पा रही हैं। इसके अलावा, उनके एक्सप्रेशन और डायलॉग्स से ऐसा कहीं नहीं लगा की वह एक स्ट्रॉन्ग इंडिपेंडेंट लड़की हैं। इससे ज्यादा अच्छी एक्टिंग तो सोनम कपूर ने अपनी फिल्म 'खूबसूरत' में की थी।

साइको किलर नहीं बन पाया साइको
सोनम के अलावा फिल्म में पूरब कोहली भी हैं। पूरब कोहली ने इस फिल्म में उस साइको किलर की भूमिका निभाई है, जिसे पकड़ने के लिए सोनम कपूर अपनी पूरी जान लगा देती हैं। वैसे तो पूरब कोहली कमाल के एक्टर हैं। हमने कई फिल्मों में उन्हें बेहतरीन एक्टिंग करते हुए देखा है, लेकिन इस फिल्म में वह लोगों को अपना साइको किलर वाला रूप दिखा पाने में नाकामयाब रहे। इसमें पूरी गलती पूरब कोहली की भी नहीं है। थोड़ी गलती डायरेक्टर और थोड़ी गलती स्क्रिप्ट राइटर की भी है। डायरेक्टर ने उनके एक्सप्रेशन दिखाने के लिए क्लोजअप्स लिए ही नहीं। वहीं स्क्रिप्टराइटर उन्हें डायलॉग्स देना ही भूल गए। पूरब कोहली से ज्यादा अच्छी एक्टिंग कार्तिक आर्यन ने 'फ्रेडी' में की थी। उन्हें देखकर साइको किलर की फीलिंग आ रही थी। लेकिन, पूरब कोहली उसे उतने दमदार तरीके से पेश करने में नाकामयाब रहे। फिल्म में शुभम सराफ, विनय पाठक और लिलेट दुबे की छोटी लेकिन, महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन, फिल्म की कहानी ने इनके भी टैलेंट को वेस्ट कर दिया।

निर्देशन में कमियां ही कमियां
'कहानी 2' देखने के बाद तो शोम मखीजा से उम्मीदें काफी कम थीं। लेकिन, उन्होंने उम्मीद से भी कमतर काम किया। उन्होंने बस अपना पूरा फोकस सोनम कपूर को ज्यादा से ज्यादा स्क्रीन टाइम देने पर रखा। उन्होंने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया कि सोनम कपूर के स्क्रीन टाइम की वजह से पूरब कोहली का स्क्रीन टाइम कम हो गया और उनका कैरेक्टर साइको किलर के रूप निकलकर सामने आया ही नहीं। चलो उन्होंने सोनम कपूर को ज्यादा स्क्रीन टाइम दे भी दिया लेकिन, वह सोनम कपूर से एक्टिंग ही नहीं करवा पाए। इतने स्क्रीन टाइम के बावजूद उसके कैरेक्टर को मजबूती के साथ पेश नहीं कर पाए। न ही लोगों को असली साइको क्राइम थ्रिलर का एक्सपीरियंस दे पाए।

सिर्फ इस वजह से देख सकते हैं फिल्म
यदि सोनम कपूर को स्क्रीन पर देखना पसंद है तो आप ये फिल्म देख सकते हैं। अन्यथा इस फिल्म में देखने लायक ज्यादा चीजें नहीं हैं। न गाने हैं, न बैकग्राउंड स्कोर की मदद से लोगों को साइको क्राइम थ्रिलर की वाइब्स दी गई हैं और न ही कैमरे के साथ अच्छे तरीके से खेला गया है।

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