
'अलमारी खुली और मेरी छाती पर...', होटल के कमरे में सुधा चंद्रन के साथ हुई थी पैरानॉर्मल एक्टिविटी
सुधा को एकता कपूर के टीवी शो 'कहीं किसी रोज' में रमोला सिकंद के निगेटिव किरदार से बड़ी पहचान मिली। दर्शकों ने इसे काफी पसंद किया। ऐसे में अब सुधा ने अपने एक लेटेस्ट इंटरव्यू में पैरानॉर्मल एक्टिविटी को लेकर कुछ ऐसा कहा जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे।
एक्ट्रेस सुधा चंद्रन टीवी से लेकर बॉलीवुड फिल्मों तक काम कर चुकी हैं। उन्होंने अपनी एक्टिंग के दाम पर फैंस के दिलों में अपनी खास जगह बनाई है। सुधा को एकता कपूर के टीवी शो 'कहीं किसी रोज' में रमोला सिकंद के निगेटिव किरदार से बड़ी पहचान मिली। दर्शकों ने इसे काफी पसंद किया। ऐसे में अब सुधा ने अपने एक लेटेस्ट इंटरव्यू में पैरानॉर्मल एक्टिविटी को लेकर कुछ ऐसा कहा जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे।
'बहुत बार, मैं बहुत जल्दी सेंस करती हूं'
सुधा चंद्रन ने हाल ही में 'हिंदी रश' को अपना इंटरव्यू दिया है। इस दौरान बातचीत में सुधा से पैरानॉर्मल एक्टिविटी के बारे में सवाल किया गया, तो एक्ट्रेस ने जो बताया उसे सुनकर आपके लिए यकीन कर पाना मुश्किल होगा। सुधा से पूछा गया कि क्या आपके साथ कभी पैरानॉर्मल एक्टिविटी हुआ। इस पर एक्ट्रेस ने कहा, 'बहुत बार, मैं बहुत जल्दी सेंस करती हूं। सेट पर नहीं बल्कि लोकेशन पर हुआ। मैं गुजरात में शूट कर रही थी वहां पर हुआ। मेरी आंखों के सामने हुआ।'
कमरे की अलमारी खुली और मेरी छाती पर...
सुधा ने आगे बताया, 'मैं शूट करके वापस होटल के अपने कमरे में आई। खाना खाने के बाद लेटी। उसी बेड पर मैं और मेरी अम्मा दोनों लेटे हुए थे। अचानक मेरी नींद खुली तो अचानक देखा कमरे में एक अलमारी थी। वो खुली और एक अजीब सी एनर्जी मेरी छाती पर आकर बैठ गई और काफी भारी महसूस हुई। मुंह से आवाज नहीं निकल रहा था मेरा हाथ नहीं हिल रहा था, जबकि मेरी मां मेरे बगल में थी। वो एनर्जी मेरी बॉडी में जाती हुई महसूस हो रही थी। तभी मैंने अपने भगवान कार्तिकेय का नाम लिया और अचानक मैंने अपनी मां को हाथ मारा। ऐसा करते ही वो अचानक मेरे से हटकर चली गई।इसके बाद मेरी मां ने मेरे माथे पर भभूती लगाई और मैंने बहुत हल्का महसूस किया।'
सुनाई देती थीं पायल और औरत के रोने की आवाजें
इसके बाद सुधा ने एक और घटना का जिक्र किया। सुधा ने बताया, 'एक जगह हम साउथ में सूट कर रहे थे वहां पर मुझे पायल की आवाज आती थी। यही नहीं एक औरत के लगातार रोने की आवाजें भी मुझे सुनाई देती थी। मैं हमेशा अपने पास हनुमान चालिसा रखती हूं।'

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