बिना वीएफएक्स शूट हुई थी बीआर चोपड़ा की महाभारत? जानें कैसे हवा में गायब होते थे तीर
बीआर चोपड़ा की महाभारत उस जमाने में बनी जब लेटेस्ट टेक्नॉलजी और वीएफएक्स नहीं थे। क्या आपने सोचा कि उस जमाने में कैसे उस युद्ध की शूटिंग की गई होगी और कैसे हवा में उड़ते तीर गायब हुए होंगे।

बीआर चोपड़ा की महाभारत सिर्फ एक टीवी शो नहीं बल्कि लोगों के लिए इमोशन है। 1988 में ऑन एयर हुई इस टीवी सीरीज को कल्ट माना जाता है। महाभारत पर कई नए टीवी शोज बने लेकिन बीआर चोपड़ा के सीरियल की बराबरी कोई नहीं कर सका। इंट्रेस्टिंग बात ये है कि उस जमाने में ना वीएफएक्स था ना एडवांस CGI फिर भी इसके सीन बेहद कन्विंसिंग थे। कभी आपने सोचा कि बिना टेक्नॉलजी के कैसे तीर आसमान में उड़ते थे? कैसे कृष्ण की उंगली पर सुदर्शन चक्र घूमता था? यहां जानें महाभारत की शूटिंग से जुड़ी कुछ इंट्रेस्टिंग बातें, तब और अब में क्या फर्क आया।
कैसे हवा में गायब होता था तीर
बचपन में हम सभी ने धनुष-बाण वाला खेल खेला है। उस वक्त आंख बंद करके, मंत्र पढ़कर बाण छोड़ते वक्त ऐसा लगता था कि ये हवा में उड़ेगा, इससे आग निकलेगी और सामने दुश्मन के तीर को धमाके के साथ गायब कर देगा। ये असर था टीवी पर दिखाए गए महाभारत सीरियल का। उस जमाने में टेक्नॉलजी आज की तरह एडवांस नहीं थी। चलिए जानते हैं ये सीन कैसे शूट होते थे।
तीर के लिए थी ये सीक्रेट टेक्नीक
महाभारत के जमाने में दो तीरों को आपस में टकराने के लिए पूरे युद्ध के मैदान में ना दिखने वाले पतले नायलॉन के तार लगाए गए थे। तीर पर एक गोल लूप होता था। तीन गिनती के साथ क्रू के दो सदस्य अपोजिट सिरों से दो तीरों को इनमें फंसाकर धक्का देते थे। ये फिसलते हुए आगे बढ़ते थे। तीर की नोक पर छोटा सा पटाखा लगा होता था जो बैटरी से चलता था। तीर जैसे ही सामने वाले तीर से टकराता तो धमाका हो जाता था। इसके बाद प्रोडक्शन के समय इसमें एक टेक्नीक यूज होती थी जिसे ऑप्टिकल मास्किंग कहते हैं। इससे आग जैसी चमक दिखती थी।
श्रीकृष्ण के हाथ में सुदर्शन चक्र
महाभारत में नितीश भारद्वाज ने श्रीकृष्ण का रोल प्ले किया है। उनके हाथ में मेटल का सुदर्शन चक्र घूमता हुआ दिखता था। इसे ब्लू स्क्रीन पर तेज स्पीड में घुमाया जाता था। इसके बाद जहां कृष्ण खड़े होते थे, वहां हाथ के पास लेयर कर दिया जाता था।
कैसे बना था युद्ध का मैदान
महाभारत के युद्ध के सीन शूट करने के लिए बीआर चोपड़ा को लोकेशन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। वह मुंबई के फिल्म सिटी में शूट करना चाहते थे। हालांकि ऐसी जगह मिलनी मुश्किल थी, जहां पर बिजली के खंबे और तार ना हों। इसके लिए उन्हें जयपुर से 40 किमी दूर एक रेगिस्तान टाइप की जगह मिल गई थी। जून की गरमी में वहां महाभारत का शूट हुआ था।
कैसे जुटी थी इतनी भीड़
युद्ध के सीन के लिए हजारों लोगों की जरूरत थी। उस वक्त आज की तरह डिजिटल क्लोनिंग नहीं हो पाती थी। महाभारत शो काफी पॉप्युलर था। जयपुर में जहां शूट हो रहा था, वहां आसपास के गांवों के लोग शूटिंग देखने जुटते थे। युद्ध के सीन के लिए यही गांववाले फ्री में भीड़ बनने के लिए तैयार हो गए थे।
लेखक के बारे में
Kajal Sharmaशॉर्ट बायो : काजल शर्मा पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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