

महान तबला वादक जाकिर हुसैन ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। उनके निधन की खबर की पुष्टि परिवार ने कर दी है। उन्हें हृदय संबंधी समस्याओं के बाद अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब 6 दशक के लंबे करियर वाले हुसैन भारत के सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में शामिल थे। सरकार ने पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से भी नवाजा था।
हुसैन के परिवार में उनकी पत्नी एंटोनिया मिनेकोला, बेटी अनीसा कुरैशी, इसाबेला कुरैशी, उनके भाई तौफीक और फजल कुरैशी और बहन खुर्शीद औलियां हैं। रविवार को ही हुसैन के मित्र और बांसुरी वादक राकेश चौरसिया ने बताया था कि उन्हें सैन फ्रांसिस्को के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कल रात (भारतीय समयानुसार) से ही उनके निधन की अफवाहें सामने आ रही थीं, जिनका अनके पब्लिसिस्ट ने खंडन किया था।
हुसैन के परिवार की तरफ से जारी बयान के अनुसार, 'एक शिक्षक, मार्गदर्शक के तौर पर उनके कार्यों ने अनगिनत संगीतकारों पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्हें उम्मीद थी कि वह आने वाले पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। वह महान संगीतकार के रूप में अपनी अद्वितीय विरासत पीछे छोड़ गए हैं।' उनका जन्म 9 मार्च 1951 में मुंबई के माहिम इलाके में हुआ था। उनके पिता महान तबला वादक उस्ताद अल्लारखा थे।
साल 1988 में उन्हें पद्मश्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से नवाजा गया थआ। खास बात है कि उन्होंने अपने लंबे करियर में 4 बार ग्रैमी अवॉर्ड अपने नाम किया। इनमें से 3 तो उन्होंने 66वें ग्रैमी अवॉर्ड के दौरान एक रात में ही जीते थे। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय थे।
निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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