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हिंदी न्यूज़ मनोरंजनमजहब के नाम पर गाना छोड़ लंदन चले गए थे मोहम्मद रफी, जानें- फिर कैसे हुई वापसी

मजहब के नाम पर गाना छोड़ लंदन चले गए थे मोहम्मद रफी, जानें- फिर कैसे हुई वापसी

हिन्दुस्तान ,नई दिल्लीSurya Prakash
Thu, 24 Dec 2020 11:22 AM
मजहब के नाम पर गाना छोड़ लंदन चले गए थे मोहम्मद रफी, जानें- फिर कैसे हुई वापसी

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को हजारों नगमे देने वाले मोहम्मद रफी ने एक बार मजहब के नाम पर गाना छोड़ दिया था और लंदन जाकर बस गए थे। मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद ने द टेलीग्राफ को दिए इंटरव्यू में खुद इस बात का खुलासा किया था। शाहिद ने बताया था, '1970 के दशक में उनके पिता हज करने के लिए मक्का गए थे। वह खुदा में यकीन करते थे। मक्का से जब वह वापस लौटे तो कुछ लोगों ने उनकी गायकी को लेकर कहा कि रफी साहब यह आप क्या कर रहे हैं? यह हमारे मजहब के खिलाफ है।' शाहिद के मुताबिक उनके पिता इस बात से डर गए थे और उन्होंने फिर कभी न गाने का फैसला लिया।

यही नहीं वह फिल्म इंडस्ट्री के शोर से अलग रहने के लिए लंदन जाकर बस गए थे और लौटने से ही इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में उनके सबसे बड़े बेटे ने उन्हें समझाया तब जाकर वह वापस लौटे और फिर से गाना शुरू किया। उनके बेटे ने मोहम्मद रफी को दोबारा गाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा था, 'खुदा ने ही आपको यह आवाज बख्शी है। इसलिए आपको वापस आना होगा। आप 4, 5 या फिर 6 महीने बैठे रह सकते हैं, लेकिन उसके बाद क्या करेंगे? इस तरह बेटे के समझाने पर मोहम्मद रफी वापस लौटे और फिर से गायन शुरू किया। यही नहीं दूसरी पारी में भी मोहम्मद रफी ने पहले की तरह कई सुपर-डुपर हिट गाने दिए।'

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मोहम्मद रफी के बारे में कहा जाता था कि वह मजहब के प्रति काफी रुझान रखते थे। उन्होंने कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया था और स्मोकिंग से भी दूर रहते थे। कहा जाता है कि मोहम्मद रफी सीधे घर से रिकॉर्डिंग रूम और फिर रिकॉर्डिंग रूम से घर तक का ही सफर तय करते थे। फिल्मी पार्टियों से वह आमतौर पर दूर ही रहते थे।

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शादियों में गेट से ही गिफ्ट देकर लौट आते थे: उनके बेटे शाहिद ने पिता को याद करते हुए कुछ साल पहले दिए एक इंटरव्यू में कहा था, 'उनकी जिंदगी अपने काम और फैमिली तक ही सिमटी हुई थी। यहां तक जब वह शादियों में भी जाते थे तो अपनी कार गेट के बाहर ही पार्क कर देते थे। बाहर से ही गिफ्ट देते थे और चले आते थे। उनकी लाइफ में पार्टियों के लिए कोई जगह नहीं थी। यहां तक कि वह यह भी नहीं जानते थे कि आखिर कॉकटेल होता क्या है।'

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