DA Image
24 मार्च, 2020|11:40|IST

अगली स्टोरी

Thappad Movie Review: तापसी पन्नू-पवेल गुलाटी की खुशहाल शादीशुदा लाइफ को बर्बाद कर देता है बस एक 'थप्पड़'

फिल्म: थप्पड़
कास्ट: तापसी पन्नू, पावेल गुलाटी, कुमुद मिश्रा, रत्ना पाठक शाह, तन्वी आज़मी
निर्देशक: अनुभव सिन्हा 
स्टार : ***3

जबसे फिल्म ‘थप्पड़’ का ट्रेलर रिलीज हुआ था, इसे बीती साल की सुपरहिट फिल्म ‘कबीर्र ंसह’ के चेहरे पर थप्पड़ के रूप में परिभाषित किया जा रहा था। फिल्म देखने के बाद ऐसा लगता है कि इसके लेखक अनुभव सिन्हा और मृणमयी लागू के जेहन में कहीं न कहीं फिल्म ‘कबीर्र ंसह’ का ख्याल रहा होगा। फिल्म का एक किरदार जब कहता है, ‘जहां प्यार होता है, वहां थोड़ी-बहुत मारपीट तो चलती है’, तो यह सुनकर एकबारगी तो कबीर्र ंसह की याद आती ही है। साथ ही ‘कबीर सिंह’ के निर्देशक के उस बयान की भी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर आपने अपने साथी को थप्पड़ नहीं मारा तो आपने उसे प्यार ही नहीं किया। घरेर्लू ंहसा जैसे गंभीर लेकिन उपेक्षित मुद्दे को सिनेमायी परदे पर दिखाने वाली इस फिल्म में मुख्य किरदार के साथ होने वार्ली ंहसा के नाम पर सिर्फ ‘एक थप्पड़’ ही है। सारा जोर इस बात पर है कि कोई औरत सामाजिक मान्यताओं को कायम रखने भर के लिए पति का एक थप्पड़ भी क्यों बर्दाश्त करे। वह भी उस स्थिति में, जब पति के मन में जरा सा भी अपनी गलती का एहसास न हो। तापसी के अलावा फिल्म के कुछ अन्य महिला किरदारों को भी अलग-अलग रूप में पितृसत्ता का दंश झेलते हुए दिखाया गया है। कोशिश यह कहने की है कि समाज के हर वर्ग में घरेलू हिंसा और असमानताएं अलग-अलग रूप-रंग में मौजूद हैं।

कहानी-

फिल्म में तापसी पन्नू निभा रही हैं अमृता का किरदार, जो हमारे-आपके घरों की किसी सामान्य गृहणी जैसी ही है। अमृता अपने पति विक्रम (पवैल गुलाटी) के साथ एक खुशहार्ल जिंदगी जी रही है। विक्रम अपने करियर को लेकर काफी महत्वाकांक्षी है। वहीं अमृता का एक ही सपना है- विक्रम के सारे सपने पूरे हो जाएं। इस बीच एक दिन एक पार्टी में विक्रम, अमृता पर हाथ उठा देता है। बस। यहीं से अमृता के दिलो-दिमाग का सुकून छिन जाता है। सास (तन्वी आजमी) से लेकर उसकी अपनी मां (रत्ना पाठक शाह) तक उसे यही समझाते हैं कि शादीशुदा जिंदगी में ऐसी बातें होती रहती हैं और उसे समझौता कर लेना चाहिए। इस बीच विक्रम उसे वापस घर बुलाने के लिए एक कानूनी नोटिस भेजता है। अमृता नामी वकील नेत्रा (माया सराओ) के पास जाती है। नेत्रा भी उसे अपने पति के पास वापस लौट जाने की सलाह देती है। अब अमृता हर तरफ से आ रही इन सलाहों को अपनाएगी या अपने दिल की सुनेगी- यही है फिल्म की कहानी।

तापसी पूरी तरह अमृता के किरदार में रच-बस गई हैं। पवैल गुलाटी भी पत्नी की खुशियों को भूल चुके पति के किरदार में जमे हैं। इन दोनों के अलावा सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं कुमुद मिश्रा जो तापसी के पिता बने हैं। कुमुद की मौजूदगी वाला हर फ्रेम जिंदगी से भरा है।

फिल्म बेहद खामोशी से अपनी बात कहती है। तापसी ने संवादों के बजाए अपनी खामोशी के जरिये अपने दिल का समंदर उड़ेला है।

कहीं तेज बैकग्राउंड म्यूजिक का इस्तेमाल नहीं है। कुछ बात कहने के अपने सलीके की वजह से तो कुछ दो घंटे बाइस मिनट की लंबाई के चलते, फिल्म की गति धीमी मालूम होती है। इसकी लंबाई को कुछ कम किया जा सकता था।

फिल्म में कोई मेलोड्रामा, कोई मसाला नहीं है। यहां तक कि कोर्टरूम ड्रामा भी नहीं है। सारा जोर रोजमर्रा जिंदगी में आम महिलाओं के साथ होने वाली ज्यादतियों पर है। फिल्म के किरदार पुरुषों से नफरत नहीं करते। न ही फिल्म पुरुषों को हैवान के रूप में पेश करती है। अमृता का पति विक्रम उसके मां-बाप की भी उतनी ही इज्जत करता है, जितना अपनी मां की। बस, वह अपनी पितृसत्तात्मक सोच से बाहर नहीं आ पाया है। फिल्म में एक ही गीत ‘एक टुकड़ा धूप’ है जिसकी मौजूदगी बेहद सार्थक है।  

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Thappad movie review and Rating Star: Taapsee Pannu Pavel Gulati film Thappad hindi review