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करियर को लेकर तापसी पन्नू बोलीं- लोग सिर्फ चढ़ते सूरज को सलाम करते हैं

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लीक से हटकर फिल्में करते हुए तापसी पन्नू ने अपने दम पर इंडस्ट्री में अलग जगह बनाई है। साउथ की फिल्में हों या फिर बॉलीवुड की, सभी के लिए वह खूब मेहनत करती हैं। पेश हैं तापसी से बातचीत के कुछ अंश:-

बॉलीवुड में आपने कम समय में ही नाम और शोहरत कमा ली। क्या अपने इस सफर से आप खुश हैं?

मैं अपने सफर से खुश हूं। जब मैंने काम करना शुरू किया, तो मुझे यहां कोई नहीं जानता था और आज मेरे लिए लोग फिल्में लिख रहे हैं। मेरे जैसे बॉलीवुड में हजारों लोग आते हैं और कुछ ही समय में गायब भी हो जाते हैं। मुझे खुशी है कि अच्छे काम की वजह से ही कम समय में मैंने अपनी पसंदीदा कार और घर खरीद लिये हैं, जिनके बारे में मैं कभी सपने देखा करती थी। हालांकि अभी मेरा सफर खत्म नहीं हुआ है। मैं चाहती हूं कि मुझे कुछ मसाला फिल्मों में काम करने का मौका मिले, तो कुछ एक्शन फिल्में भी, जिनमें मैं खुद के साथ और ज्यादा प्रयोग कर सकूं। मुझे अच्छे से पता है कि बॉलीवुड हो या फिर कोई और इंडस्ट्री, लोग सिर्फ चढ़ते सूरज को सलाम करते हैं। जिस दिन आप कमजोर पड़ गए, उस दिन कोई आपको पूछेगा भी नहीं। इसलिए अपना सूरज बनाए रखने के लिए मैं दिन-रात कड़ी मेहनत करती हूं। खुद को स्टारडम और लाइमलाइट से दूर रखती हूं।

आप अकसर कहती हैं कि इंडस्ट्री में आपका अपना ही ओलंपिक चल रहा है। इसका क्या मतलब है?

अपना अलग ओलंपिक से मेरा मतलब है कि मेरी अपनी एक रेस है खुद के साथ। उसमें मैं कभी फेल होती हूं, तो कभी पास भी हो जाती हूं। कई लोगों को लगता है कि मैं घमंड के मारे ऐसे बोल रही हूं, लेकिन ऐसा नहीं है। मैं जहां से आई और जिस तरह से आई, कोई और वैसे नहीं आया। फिर क्यों मैं किसी से अपनी तुलना कर अपना जी जलाऊं? यहां जो भी अभिनेत्रियां हैं, उन्होंने सालों तक हीरोइन बनने के लिए तैयारी कर रखी है। मैंने तो कभी हीरोइन बनने के बारे में सोचा ही नहीं था। मैंने तो फिल्में भी थिएटर में तब से देखनी शुरू कीं, जब कॉलेज जाने लगी। उससे पहले तो टीवी पर आधा एक घंटे फिल्म देख लेती थी। कई बार मुझे पढ़ाई के चक्कर में वहां से भगा दिया जाता था, जहां घर के सब लोग फिल्म देख रहे होते थे। ऐसे में किसी कलाकार से अपनी तुलना करने का कोई मतलब नहीं होता था।.

आप कहती हैं कि बड़े स्टार के साथ काम करने से अच्छा एक अच्छी ्क्रिरप्ट के साथ काम करना है। बड़े नाम के पीछे खोने से डरती हैं?

ऐसा नहीं है कि मैं बड़े सितारों के साथ काम नहीं करती। मैंने महानायक अमित जी के साथ काम किया। मैंने अक्षय कुमार के साथ काम किया। अब जब निर्माता ही मेरे पास बिना हीरो वाली ्क्रिरप्ट लेकर आते हैं, तो मैं क्या करूं। लोग कहते हैं कि फीमेल सेंट्रिक फिल्में करना मेरा जॉनर है, लेकिन सच कहूं, तो ये मेरा जॉनर नहीं मजबूरी है। वैसे भी मैं मानती हूं कि एक कलाकार को इस बात से मतलब नहीं होना चाहिए कि फिल्म में कौन काम कर रहा है, बल्कि इससे मतलब होना चाहिए कि वह जिस फिल्म में काम करने जा रहा है, वह कैसी है। मुझे अच्छी फिल्में मिल जाती हैं।

आपकी फिल्म सांड की आंख पर खूब विवाद हुए। यहां तक कि फिल्म के पोस्टर की भी खूब आलोचना हुई। इस पर आपकी क्या राय है?

मुझे यह देखकर काफी दुख हुआ, जब सोशल मीडिया में लोगों ने सवाल किया कि इस फिल्म में उसी उम्र की एक्ट्रेस को क्यों नहीं लिया गया? यंग लड़की ने यह रोल क्यों निभाया? मैं उन सभी से पूछना चाहती थी कि जब 50 की उम्र में कुछ एक्टर कॉलेज जाने वाले बच्चों का रोल करते हैं, तो तब सवाल क्यों नहीं उठाया जाता? तब तो उनकी फिटनेस और ट्रांसफॉर्मेशन के बारे में बात होती है, लेकिन हम बुजुर्ग का रोल करें, तो परेशानी होती है।

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आप खुद को स्टार नहीं मानतीं। क्या इसके पीछे कोई खास कारण है?

मैं अभी स्टार नहीं हूं, क्योंकि मुझमें वह क्षमता नहीं कि सिर्फ मेरे नाम से दर्शक मेरी फिल्म देखने आ जाएं और मुझ पर 300-400 रुपए खर्च कर दें। जिस दिन ऐसा होगा, उस दिन मैं स्टार बन जाऊंगी। ऐसा कब हो पाएगा, मैं नहीं बता सकती। हां, उम्मीद जरूर करती हूं कि मेरा भी समय आएगा।  

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