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Sherni Review: कैसी रही विद्या बालन की 'शेरनी' की दहाड़? 2 घंटे की फिल्म देखने से पहले पढ़ लें 2 मिनट का रिव्यू

हिन्दुस्तान,मुंबईPublished By: Avinash Singh
Fri, 18 Jun 2021 12:41 AM
Sherni Review: कैसी रही विद्या बालन की 'शेरनी' की दहाड़? 2 घंटे की फिल्म देखने से पहले पढ़ लें 2 मिनट का रिव्यू

फिल्म: शेरनी
निर्देशक: अमित मसुर्कर
प्रमुख कास्ट:  विद्या बालन, बृजेन्द्र काला, शरत सक्सेना, नीरज काबी, विजय राज, मुकुल चड्ढा आदि
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क्या है कहानी
फिल्म शेरनी की कहानी मुख्य रूप से जंगल, एक शेरनी और वन विभाग की कार्य प्रणाली के आस- पास घूमती है। फिल्म में विद्या बालन, वन विभाग की एक अधिकारी के रूप में नजर आ रही हैं और उनके किरदार का नाम विद्या विंसेंट है। विद्या एक ऐसे क्षेत्र में है, जहां ज्यादातर मर्द काम करते हैं और उनकी सोच बहुत शैविनिस्टिक है, जो मानते हैं कि मर्द ही सब कुछ हैं। पूरी कहानी एक शेरनी के इर्द गिर्द घूमती है, जिसे विद्या सुरक्षित रखना चाहती है, जबकि वन विभाग व कुछ अन्य लोग उसका शिकार करना चाहते हैं। वहीं इन सब के बीच में राजनीति कैसे कामों पर असर डालती है, ये भी फिल्म में दिखाया गया है। विद्या बालन, शेरनी को बचा पाती है या नहीं, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

कैसा है अभिनय
फिल्म के सभी कलाकारों का चयन काफी सटीकता के साथ किया गया है और उसका ही नतीजा है कि सभी कलाकारों ने उम्दा प्रदर्शन किया है। एक ही फिल्म में कई बेहतरीन कलाकार होने पर फिल्म में आपको एक बात खटकती कि कलाकारों की स्क्रीन टाइम कम रहा है। विद्या बालन के साथ ही विजय राज, बृजेन्द्र काला, शरत सक्सेना, नीरज काबी और मुकुल चड्ढा सहित सभी अभिनेताओं ने अपने किरदारों के साथ इंसाफ किया है। 

कैसा है निर्देशन
फिल्म न्यूटन फेम निर्देशक अमित मसुर्कर का निर्देशन इस बार कुछ खास नहीं दिखा, या फिर यह कहना भी गलत नहीं होगा कि कहानी के चलते वो अपने हुनर दिखा नहीं पाए। फिल्म जंगल में शूट हुई है, लेकिन जानवरों के लिए सीजी (कंप्यूटर ग्राफिक्स) का इस्तेमाल किया गया है। अच्छे कलाकारों के बाद भी फिल्म काफी फीकी-फीकी लगती है। हालांकि यही बात इस फिल्म की एक खासियत भी साबित होती है कि फिल्म में जबरदस्ती का मिर्च मसाला नहीं लगाया गया है।

क्या कुछ है खास
शेरनी में कई ऐसे- ऐसे छोटे सीन्स हैं, जिनको अगर आप गौर करेंगे तो आपको फिल्म से हटकर समाज के कुछ मुद्दों पर रोशनी पड़ती दिखाई देगी। चाहें वो एक वन विभाग की अधिकारी विद्या का अपने परिजनों की इच्छाओं के चलते अपनी इच्छाओं को मारना हो या फिर काम- काज पर राजनीति का असर। 

देखें या नहीं
फिल्म में कुछ भी ऐसा नया देखने को नहीं मिलता है, जिसको देखकर बतौर दर्शक आप खुश हो जाएं। वन विभाग कैसे काम करता है, अगर आप ये देखने के लिए फिल्म देख रहे हैं तो फिर कई और डॉक्यूमेंट्रीज या शोज आप देख सकते हैं। फिल्म देखें या नहीं नहीं देखें के सवाल पर सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि करीब 2 घंटे 10 मिनट की इस फिल्म को आप तब ही देखें जब आप ये तय कर लें कि मसाला फिल्म नहीं है।

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