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मनोरंजनEXCLUSIVE: आसान नहीं था विद्या बालन का फिल्मी सफर, 'शेरनी' एक्ट्रेस बोलीं- 'जब आप दिल से कुछ चाहते हैं तो...'

हिन्दुस्तान,मुंबईPublished By: Avinash Singh
Thu, 10 Jun 2021 09:30 PM
EXCLUSIVE: आसान नहीं था विद्या बालन का फिल्मी सफर, 'शेरनी' एक्ट्रेस बोलीं- 'जब आप दिल से कुछ चाहते हैं तो...'

बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस विद्या बालन (Vidya Balan) जल्दी ही फिल्म शेरनी (Sherni) में नजर आएंगी। फिल्म का ट्रेलर कुछ वक्त पहले रिलीज हुआ था, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। ऐसे में फिल्म की रिलीज से पहले विद्या बालन ने हिन्दुस्तान के साथ खास बातचीत की और न सिर्फ फिल्म से जुड़े अपने तजुर्बे को साझा किया, बल्कि अपने शुरुआती सफर पर भी खुलकर बात की।

परिणीता से बॉलीवुड डेब्यू किया था, कितना आसान या मुश्किल रहा था बॉलीवुड डेब्यू?
परिणीता से पहले मैं विज्ञापन कर रही थी, मैंने कुछ म्यूजिक वीडियोज किए थे, साउथ में कुछ फिल्में कीं, जो बीच में बंद पड़ गईं और कुछ फिल्मों से मैं निकाली गई। तो बहुत ही मुश्किल दौर से मैं आ रही थी, जब मैं प्रदीप सरकार से मिली (जिन्हें मैं दादा बुलाती हूं)। दादा ने मुझ से कहा कि वो मेरे साथ परिणीता बनाना चाहते हैं। लेकिन विनोद चोपड़ा चाहते थे कि चूंकि ये टाइटल रोल है तो कोई बड़ा स्टार इसको करे। हालांकि महीनों तक उन्होंने मुझे टेस्ट किया, कभी सीन करवाते थे, कभी गाना गवाते थे.. कभी गाने पर लिपसिंक करवाते थे। मैं थक जाती थी, मायूस हो जाती... मैं फिर जाकर टेस्ट देती... वो फिर कहते कि फिर से टेस्ट करना है। लेकिन खुशनसीबी की बात ये है कि मुझे वो फिल्म मिली। जब आप दिल से कुछ चाहते हैं तो सच में कायनात आपका साथ देती है। 

शेरनी में अपने किरदार और फिल्म के बारे में कुछ बताएं?
मेरा जो किरदार है फिल्म में, वो बोलती कम है और करती ज्यादा है। इसलिए मैं मानती हूं कि न सिर्फ उनके लिए बल्कि हर औरत के लिए ये डायलॉग फिट बैठता है- जंगल कितना भी घना क्यों न हो, लेकिन शेरनी अपना रास्ता ढूंढ ही लेती है। हर औरत अपना रास्ता ढूंढ लेती है, अपना रास्ता बना लेती है। विद्या (शेरनी में विद्या का किरदार) एक ऐसे क्षेत्र में है, जहां ज्यादातर मर्द काम करते हैं और उनकी सोच बहुत शैविनिस्टिक है, जो मानते हैं कि मर्द ही सब कुछ हैं। वो ऐसे ही लोगों के बीच में घिरी हुई है और जिस तरह से वो उन लोगों को हैंडल करती है, वो ही है शेरनी की कहानी। हालांकि इस फिल्म में एक असली शेरनी है, जिसकी कहानी विद्या और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के जरिए कही जा रही है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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'शेरनी' का शूट असल जंगलों में हुआ है और आप पहली बार बतौर फॉरेस्ट अधिकारी नजर आ रही हैं, कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
ये चुनौतीपूर्ण नहीं रहा, इसमें सुकून ही सुकून था। हम शहर से दूर जंगलों में काम कर रहे थे। इतना अच्छा माहौल और इतनी अच्छी हवा। पहला शूट हमने कोविड के पहले किया था, हालांकि दूसरा शेड्यूल कोविड के वक्त था, तो माहौल बदल गया था। सब पीपीई किट पहन रहे थे, मास्क पहन रहे थे। फिर भी हम सब स्वस्थ थे, क्योंकि हम जंगल में काम कर रहे थे।

आपका हर किरदार कुछ नया बयां करता है? किरदारों को चुनने का आधार क्या रहता है?
ऐसी कोई धारणा नहीं है कि मैं ऐसे ही किरदार करूंगी। जो भी मुझे अच्छा लगता है, मुझे लगता है कि जो भी चीज मुझे बतौर दर्शक देखना पसंद आएगा, मैं वैसे ही किरदार चुनती हूं। वैसे ही किरदार करती हूं।

आपने कई अवॉर्ड्स जीते हैं, क्या प्रोफेशनल लाइफ में इनसे कुछ मदद मिलती है?
बेशक, ये तारीफ का एक तरीका है। तो सपोर्ट का तो पता नहीं लेकिन अच्छा लगता है कि कोई आपके काम को सपोर्ट करता है, आपके लिए ताली बजाता है, आपको अवॉर्ड देता है, तो अच्छा लगता है।

टीवी पर वापसी का कोई इरादा?
फिल्हाल तो कोई इरादा नहीं है....

बतौर निर्देशक कोई नई पारी शुरू करने का इरादा?
नहीं नहीं... बिल्कुल भी नहीं। निर्देशक का काम बहुत मुश्किल होता है। मुझे कैमरे के सामने काम करना अच्छा लगता है तो फिलहाल तो ऐसा कोई प्लान नहीं है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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अपने आपको एक शब्द में कैसे डिफाइन करेंगी?
ये तो बहुत कठिन सवाल पूछ लिया आपने... शेरनी

वो किरदार जो हमेशा आपके दिल के सबसे करीब रहेगा?
वो तो परिणीता रहेगा... क्योंकि अगर परिणीता नहीं होती तो जाने मैं आज कहां होती। 

बीते कुछ सालों में आपकी जो फिल्में रिलीज हुई हैं, उनमें आपने एक्ट्रेस की परिभाषा को बदलने का काम किया है, ये मुश्किल है कि आसान है?
मैंने इसके लिए कोई खास कोशिश नहीं की है। इंसान हर दिन बदल रहा है, उन बदलवों के हिसाब से आगे बढ़ना ही समझदारी है, क्योंकि आप वक्त को पीछे नहीं ले जा सकते। तो जैसे मैं बदल रही हूं, मैं उसको अपना रही हूं और इसके हिसाब से ही मैं किरदार चुनती जा रही हूं। मैं कोई रूढ़िबद्ध धारणा तोड़ने की कोशिश नहीं कर रही, लेकिन अगर इस दौरान जो फिल्में मैंने की हैं, उनसे अगर कोई स्टीरियोटाइप्स टूटे हैं, तो फिर ये बहुत अच्छी बात है। ये तो सोने पे सुहागा हो गया। 

सोशल मीडिया पर काफी कम एक्टिव रहने की कोई खास वजह?
मूड होता है तो मैं पोस्ट करती हूं, वरना नहीं करती हूं। मेरा कुछ ऐसा ही हिसाब है... मैं बहुत ज्यादा इंटेरेक्ट नहीं करती सोशल मीडिया पर, क्योंकि मुझे समझ ही नहीं आता है कि मैं क्या बोलूं। लोग जो नेचुरली बहुत खूबसूरती से फोटो डालने के साथ ही उसके बारे में बहुत कुछ लिखते हैं न, वो मेरे से नहीं होता है। तो मैं बस फोटो डाल देता हूं और वो भी कभी मन हुआ तो डालती हूं वरना नहीं।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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आपके और कौनसे प्रोजेक्ट्स आने वाले हैं? 
फिलहाल में इस बारे में कोई भी ऐलान नहीं कर सकती हूं, क्योंकि दो- तीन फिल्मों के लिए हामी भरी है, लेकिन कौनसी फिल्म पहले शुरू होगी, ये पता नहीं। ऐसे में मैं फिलहाल कुछ नहीं कह सकती।

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