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बरसी पर खास: नीली आंखों वाले सपनों के सौदागर राज कपूर के दिलचस्प किस्से

राज कपूर की बरसी पर खास: नीली आंखों वाला सपनों का सौदागर
राज कपूर की बरसी पर खास: नीली आंखों वाला सपनों का सौदागर

अगर शो मैन राज कपूर जिंदा होते, तो 93 साल के होते। आज उनको हमसे विदा लिए 29 बरस हो गए हैं। दिलदार, दमदार और हिंदी फिल्मों के पहले और खालिस शो मैन राज कपूर की जिंदगी से जुड़े रोचक पहलुओं पर एक नजर
 
शो मैन राजकपूर गलती से बन गए अभिनेता
 
नौ साल की उम्र में राज कपूर ने पहली बार कैमरे के सामने अभिनय किया फिल्म इंकलाब में। वैसे तो फिल्मों के सेट और शूटिंग से उनका पुराना नाता था। वो कभी सेट पर कलाकारों को चाय देने का काम करते तो कभी क्लैपर बॉय का। राज कपूर को अभिनय करके बहुत मजा नहीं आया। वे उन दिनों अपने पापा पृथ्वी राज कपूर से कहते थे--मैं फिल्मों में काम करूंगा, पर संगीतकार बन कर।

जब कुछ बड़े हुए, तो लोग कहने लगे, तुम्हें तो हीरो बनना चाहिए। अच्छी खासी कदकाठी है, गोरा रंग, नीली आंखें। राज कपूर ने तय किया कि वे अभिनय करेंगे, पर कुछ समय बाद संगीतकार बन जाएंगे। पर अभिनय करते-करते उन्हें लगा कि उन्हें साथ में निर्देशक भी बन जाना चाहिए।

दादा राज कपूर के साथ करीना के बचपन की यादें... (वीडियो साभार- KareenaK.Net)

 

राज कपूर की बरसी पर खास: नीली आंखों वाला सपनों का सौदागर
राज कपूर की बरसी पर खास: नीली आंखों वाला सपनों का सौदागर

बाबा बन गया कैप्टेन

राज कपूर की उम्र बस 24 साल की थी, जब उन्होंने अपने नाम से आर.के. बैनर की स्थापना की और आग फिल्म का निर्देशन भी खुद ही किया। इससे पहले सेट पर लोग उन्हें बाबा कहा करते थे, जैसे ही उन्होंने निर्देशक की टोपी पहनी, वे एकदम से बदल गए। राज साहब कहते थे-सेट के अंदर मैं तुम लोगों का कप्तान हूं, बाहर दोस्त।

आग फिल्म में वे पहली बार नर्गिस के साथ नजर आए। यह फिल्म पसंद तो की गई लेकिन उनकी पहली सुपर हिट फिल्म रही बरसात। इस फिल्म की कमाई से उन्होंने मुंबई के उपनगर चेंबूर में भव्य आर.के. स्टुडियो बनाया।
 

रुपहले परदे से इश्क का वो दौर

राज कपूर का नाम अपनी हीरोइनों के साथ हमेशा जोड़ा जाता था। नर्गिस के साथ लंबे समय तक उनके इश्क की कहानियों फिल्मी गलियारों में और बाहर भी तैरती रहीं।

उस समय उनसे प्रसिद्ध फिल्म और गॉसिप लिखने के लिए मशहूर पत्रकार देवयानी चौबाल ने सवाल किया था-राज साब, सच बताइए, आप किससे सच्ची मोहब्बत करते हैं? ऐसा सवाल सिर्फ देवयानी ही उनसे कर सकती थी, वह उनकी मुंहलगी और चहेती पत्रकार थी। यह बात उसने दावे के साथ मुझे बताई थी कि राज साहब को जब भी कोई खबर ब्रेक करना होता था, वे सबसे पहले देवयानी को ही बताते थे।

देवयानी के उस सवाल पर राज साहब ने हंसते हुए कहा था-इश्क तो मुझे सिल्वर स्क्रीन से है, पर तुम्हें जो लिखना है लिखो। जब तुम यह लिखती हो कि मैं फिल्मों और औरतों का रसिया हूं, तो मुझे अच्छा लगता है। सही बात तो ये है कि मैं खुद से बेपनाह मोहब्बत करता हूं।

राज कपूर की बरसी पर खास: नीली आंखों वाला सपनों का सौदागर
राज कपूर की बरसी पर खास: नीली आंखों वाला सपनों का सौदागर

यार बाश राज

पचास के दशक में अपने समय के दिग्गज हीरो राज-दिलीप-देव आनंद की तिकड़ी के दोस्ती के किस्से बहुत मशहूर थे। इन तीनों ने हर तरह से एक-तीसरे का साथ दिया। देव आनंद ने तो कल्पना से अपनी शादी गुपचुप कर ली थी। राज साहब की पहले हो चुकी थी। उन तीनों में लंबे समय तक दिलीप कुमार बैचलर रहे। दिलीप साहब ने जब सायरा बानो से शादी की, तो बारात में सबसे आगे राज कपूर नाच रहे थे। वे अपने पिताजी पृथ्वीराज कपूर और देव आनंद को भी नचवा रहे थे।

राज कपूर के घर में होने वाली पार्टियां, आर. के. स्टुडियो की होली बेहद मशहूर थी। उस समय फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने वाले हर शख्स की यही मुराद होती कि किसी तरह राज साहब की होली में शामिल होने का मौका मिल जाए। यारों के यार राज साहब जितना डूब कर फिल्में बनाते थे, उतनी ही मस्ती से अपनी जिंदगी भी जीते थे।

राज कपूर की बरसी पर खास: नीली आंखों वाला सपनों का सौदागर
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बनते-बनते रह गया बायोपिक

1995 में राम तेरी गंगा मैली राज कपूर के निर्देशन में बनी आखिरी फिल्म थी। 25 जुलाई को यह फिल्म रिलीज हुई और देखते ही देखते सुपर हिट हो गई। राज साहब की हर फिल्म के गाने कमाल के होते थे। अपनी जिंदगी में उन्होंने कई नए गायकों को मौके दिए, कई संगीतकारों को बनाया। वे स्टुडियो में रात-रात भर बैठ कर धुन सुनते और फाइनल करते। राम तेरी गंगा मैली के सिल्वर जुबिली पार्टी में मैं देवयानी चौबल के साथ गई थी। राज साहब दूर खड़े अपने अतिथियों का हाथ हिला कर अभिवादन कर रहे थे। उन्हें सामने से देखना अपने आप में अलग अनुभव था। भारी भरकम शरीर, कोट, सूट टाई और नीली आंखों में वे हर किसी से अलग लग रहे थे, हंसते हुए, जाम पर जाम पीते हुए। शो मैन का खिताब उन्हें यूं ही नहीं मिला था।

देवयानी से उन्होंने कुछ सालों पहले हिना की कहानी का जिक्र किया था। पाकिस्तान की बंजारा परिवार की लड़की और हिंदुस्तान का लड़का। वे इस कहानी पर फिल्म बनाने को खूब आतुर थे। उस समय वे राम तेरी गंगा मैली की नायिका मंदाकिनी को ले कर हिना बनाने की सोच रहे थे, लेकिन बात बनी नहीं।

राज साहब की जिंदगी में इतने रंग थे कि निर्देशक हृषिकेश मुखर्जी उनका बायोपिक बनाना चाहते थे। उस समय उन्हें लगता था कि उनके बेटे ऋषि कपूर अपने पापा का किरदार बखूबी निभा लेंगे। पर उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया।

राज साहब ही एकमात्र ऐसे कलाकार हैं, जिन्हें दो फिल्मों में अपनी ही तीन पीढ़ी के साथ काम करने का मौका मिला। 1951 में आई आवारा में वे अपने पापा पृथ्वीराज कपूर और नाना बशेश्वरनाथ के साथ नजर आए। इसके बाद 1971 में बनी कल आज और कल में अपने बेटे रणधीर कपूर और पापा पृथ्वीराज कपूर के साथ भी काम किया।
 

राज कपूर की बरसी पर खास: नीली आंखों वाला सपनों का सौदागर
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राज कपूर का रशिया कनेक्शन

आज जब हम रशिया और हिंदुस्तान के बीच दोस्ती और पुराने संबंधों की बात कर रहे हैं, तो यह बात जानना भी जरूरी है कि पचास के दशक की शुरुआत में जब हिंदुस्तान में रूस की सहायता से कई प्रोजेक्ट बन रहे थे और संबंधों का आदान-प्रदान हो रहा था, हिंदी फिल्में खास कर राज कपूर की फिल्में आवारा और श्री चार सौ बीस रशिया में खूब चलीं, ठीक वैसे ही जैसे आज आमिर खान की फिल्में पीके और दंगल चीन में झंडे गाड़ रही है। राज कपूर रशिया में बेहद लोकप्रिय हैं, आज भी रशियन हिंदी फिल्मों के नाम पर मेरा जूता है जापानी गाते नजर आते हैं।
 
हिना का ख्वाब लिए कह दिया अलविदा

हिना की कहानी लिखी जा चुकी थी। राज कपूर हिना के लिए हीरोइन की तलाश कर रहे थे। हीरो की भूमिका ऋषि कपूर निभा रहे थे। राज साहब कहते थे कि हिना बनाने के बाद निर्देशक को अलविदा कहूंगा। उनकी दिली इच्छा थी पाकिस्तान जा कर फिल्म शूट करने की।

राज साहब अस्थमा के मरीज थे। वे दिल्ली गए थे दादा साहब फाल्के पुरस्कार ग्रहण करने। वहीं उन्हें अस्थमा का अटैक पड़ गया और 29 साल पहले आज के दिन वे चल बसे। बताते चलें कि राज कपूर का असली नाम रणबीर था, जैसे उनके भाई शम्मी कपूर का शमशेर और शशि कपूर का बलबीर। राज साहब के घर में पहली पोता हुआ तो उन्होंने कहा-इसे मेरा नाम रख दो। इस तरह से ऋषि कपूर के बेटे का नाम रणबीर पड़ा, जो आज के दौर का एक पसंदीदा अभिनेता है। उनकी पोतियों करिश्मा और करीना ने भी इंडस्ट्री में अपनी अलहदा जगह बनाई है।

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  • Web Title:Raj Kapoor death anniversary special