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पुण्यतिथिः निरूपा रॉय को पहली फिल्म के लिए मिले थे केवल इतने रुपये, बाद में इस वजह से फिल्म से कर दिया गया था उन्हें बेदखल

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Khushboo
Sun, 13 Oct 2019 10:05 AM
पुण्यतिथिः निरूपा रॉय को पहली फिल्म के लिए मिले थे केवल इतने रुपये, बाद में इस वजह से फिल्म से कर दिया गया था उन्हें बेदखल

हिन्दी सिनेमा में निरूपा रॉय को ऐसी अभिनेत्री के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने अपने किरदारों से मां के चरित्र को नया आयाम दिया। निरूपा राय का मूल नाम कोकिला था और उनका जन्म 4 जनवरी 1931 को गुजरात के बलसाड में हुआ था। मिडिल क्लास गुजराती फैमिली में जन्मी निरूपा के पिता रेलवे में काम किया करते थे। चौथी क्लास तक पढ़ी निरूपा का विवाह मुंबई में कार्यरत राशनिंग विभाग के कर्मचारी कमल राय से हो गया। शादी के बाद वह मुंबई आ गईं। उन्हीं दिनों निर्माता-निर्देशक बी.एम.व्यास अपनी नई फिल्म 'रनकदेवी' के लिए नए चेहरों की तलाश कर रहे थे।

उन्होंने अपनी फिल्म में कलाकारों की आवश्यकता के लिए अखबार में विज्ञापन निकाला। निरूपा राय के पति फिल्मों के बेहद शौकीन थे और एक एक्टर बनना चाहते थे। कमल राय अपनी पत्नी को लेकर बी.एम.व्यास से मिलने गए और अभिनेता बनने की पेशकश की लेकिन बी.एम.व्यास ने साफ कह दिया कि उनका व्यक्तित्व अभिनेता के लायक नही है। लेकिन अगर वे चाहें तो उनकी पत्नी को एक्ट्रेस के रूप में काम मिल सकता है। फिल्म रनकदेवी में निरूपा राय 150 रुपए महीने पर काम करने लगी लेकिन बाद में उन्हें इस फिल्म से अलग कर दिया गया ।

दो बीघा जमीन से बदला कैरियर
निरूपा राय ने अपने सिने कैरियर की शुरुआत 1946 में आई गुजराती फिल्म 'गणसुंदरी' की। वर्ष 1949 में रिलीज हुई फिल्म 'हमारी मंजिल' से उन्होंने हिंदी फिल्म की ओर भी रूख कर लिया। इसके बाद उन्हें फिल्म गरीबी में काम मिल गया। फिल्मों में मिली सफलता के बाद उनकी पहचान एक एक्ट्रेस के रूप में होनी शुरू हो गई। साल 1953 में आई 'दो बीघा जमीन' निरूपा राय के लिए मील का पत्थर साबित हुई। फिल्म में दमदार एक्टिंग के लिए उन्हें इंटरनेशनल अवॉर्ड भी दिया गया था। 

देवानंद की मां की भूमिका निभाई
साल 1955 में फिल्म 'मुनीम जी' में निरूपा राय ने देवानंद की मां की भूमिका निभाई। फिल्म में अपनी एक्टिंग के चलते उन्हें बेस्ट को-एक्ट्रेस के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड से नवाजा गया। लेकिन इसके बाद छह वर्ष तक उन्होंने मां की भूमिका स्वीकार नहीं की। लेकिन फिर साल 1961 में फिल्म 'छाया' में वह मां की भूमिका के रोल में नजर आई थी। इसमें वह आशा पारेख की मां बनी।

फिल्म दीवार में अमिताभ की मां को रोल निभाया

निरूपा राय के सिने कैरियर पर नजर डालने पर पता चलता है कि बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की मां के रूप में उनकी भूमिका काफी प्रभावशाली रही है। उन्होंने सर्वप्रथम फिल्म 'दीवार' में अमिताभ बच्चन की मां की भूमिका निभाई। इसके बाद खून पसीना, मुकद्दर का सिकंदर, अमर अकबर एंथनी, सुहाग, इंकलाब, गिरफ्तार, मर्द और गंगा जमुना सरस्वती जैसी फिल्मों में भी वह अमिताभ बच्चन की मां की भूमिका में दिखाई दी। वर्ष 1999 में प्रदर्शित फिल्म 'लाल बादशाह' में वह अंतिम बार अमिताभ बच्चन की मां की भूमिका में दिखाई दी। निरूपा राय ने अपने पांच दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 300 फिल्मों में अभिनय किया। अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुगध करने वाली निरूपा राय 13 अक्तूबर 2004 को इस दुनिया को अलविदा कह गईं।

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