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विवादों में 'मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर', लेखक ने लगाया क्रेडिट न देने का आरोप

mere pyare prime minister

स्वच्छता पर क्रेंद्रित 'फिल्म मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर' को लेकर विवाद शुरू हो गया। लेखक मनोज मैरता ने आरोप लगाया है कि फिल्म में उनका नाम बतौर स्क्रीन राइटर नहीं दिया जा रहा। जबकि कहानी और स्क्रीन राइटिंग दोनों का काम उन्होंने ही किया है। हालांकि इस पूरे मामले में अभी फिल्म डायरेक्टर रोकेश ओम प्रकाश मेहरा की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं है। आगे पढ़ें इस पूरे विवाद पर क्या कहते हैं सहरसा के युवा प्रतिभा मनोज मैरता-

livehindustan.com से हुई मनोज मैरता की बातचीत के प्रमुख अंश -
मनोज मैरता ने बताया कि उन्होंने फिल्म 'मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर' में बतौर स्क्रिप्ट राइटर फिल्म डायरेक्टर ओम प्रकाश मेहरा के साथ बाउंड साइन किया था। चूंकि फिल्म की स्टोरी भी उनकी लिखी हुई है इसलिए उन्होंने बाउंड साइन होने से पहले ही मुंबई के स्क्रीन राइटर एसोसिशन अपनी स्टोरी का रजिस्ट्रेशन कराया था। उन्होंने आगे बताया कि चूंकि असली कहानी दिल्ली के स्लम एरिया की है इसलिए शूटिंग की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डायरेक्टर राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने कहानी में कुछ बदलाव का सुझाव दिया। इसके बाद कहानी में स्थान के मुताबिक कुछ बदलाव किए गए। फिल्म में दर्शक मुंबई की लोकेशन देख सकेंगे।

चूंकि फिल्म 14 दिसंबर को रिलीज होने जा रही है, ऐसे में फिल्म निर्माता और निदेशक ने इसका प्रचार प्रसार भी शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भेजा रहा है। मैरता ने बताया कि जब मई-जून में जब पिल्म का पहला पोस्टर आया तभी उनका नाम बतौर स्क्रीन राइटर नहीं था। इस पर उन्होंने निर्देशक मेहरा से आपत्ति जताई। कई बार उन्हें फोन किया और ई-मेल भी किया।

राकेश ओम मेहरा ने पहली बार तो फोन का जवाब दिया और बताया कि यह अनऑफियल पोस्टर है जब ऑफिशियल पोस्टर आएगा तब नाम दिया जाएगा। अब फिल्म का ऑफिशियल पोस्टर भी आ चुका है लेकिन उन्हें स्क्रीन राइटर के तौर पर क्रेडिट नहीं दे दिया जा रहा। 

स्टोरी राइटर नहीं स्क्रीन राइटर के तौर पर क्रेडिट देने की मांग-
जबकि स्क्रीन राइटर के तौर भी नाम होना चाहिए। मनोज मैरता ने बातया कि स्टोरी राइटर के तौर पर उनका नाम दिया जा रहा है। लेकिन करार के अनुसार, स्क्रीन राइटर तौर पर भी उनका नाम दिया जाना चाहिए क्योंकि फिल्म का आधिकांश स्क्रीन राइटिंग का काम उन्होंने ही किया है। उन्होंने कहा कि उनके साथ अगर अन्य किसी नाम भी बतौर स्क्रीन राइटर दिया जाता है तो उसे बाद में दिया जाना चाहिए न कि पहले। इसलिए उन्हें स्क्रीनप्ले और डायलॉग लेखन का क्रेडिट दिया जाना चाहिए।

भेजा लीगल नोटिस - 
डायरेक्टर मेहरा को 15 दिन समय देते हुए मैरता की ओर लीगल नोटिस भेजा गया है। इस नोटिस के जरिए उनसे कहा गया है कि वह फिल्म में बतौर स्क्रीन राइटर का क्रेडिट कब दे रहे हैं और यदि नहीं दे रहे तो उसका लिखित में जवाब दें। मैरता ने हमसे बातचीत में बताया कि अगर 15 दिनों के भीतर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता तो वह बॉम्बे हाईकोर्ट जाने के लिए मजबूर होंगे।

मनोज मैरता बिहार के सहरसा जिले के कोसी के रहने वाले हैं। 2012 में उन्होंने दिल्ली के स्लम एरिया में कुछ बच्चों द्वारा अपनी मां के लिए टॉयलेट बनाने की कहानी लिखी थी।

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  • Web Title:manoj mairta rakesh omprakash mehra dispute over the film mere pyare prime minister