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मशहूर संगीतकार खय्याम को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, कुछ ही पलों में होगा अंतिम संस्कार

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खय्याम के नाम से मशहूर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संगीतकार मोहम्मद जाहिर हाशमी का अंतिम संस्कार मंगलवार शाम को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया जा रहा है। खय्याम के पार्थिव शरीर को जुहू में स्थित उनके आवास पर रखा गया है, ताकि लोग उनका आखिरी दर्शन कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। 

खय्याम का निधन सोमवार देर रात को हुआ था। वह 92 वर्ष के थे, उनकी शवयात्र शाम चार बजे जुहू में दक्षिणा पार्क सोसायटी में स्थित उनके घर से शुरू होकर फोर बंग्लोज कर्बिस्तान पहुंचेगी। खबरों के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार शाम 4: 30 बजे किया जाएगा और उन्हें गन सैल्यूट सहित पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। उनके निधन पर कई जानी-मानी हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है।


ख़य्याम ने पहली बार फिल्म 'हीर रांझा' में संगीत दिया लेकिन मोहम्मद रफ़ी के गीत 'अकेले में वह घबराते तो होंगे' से उन्हें पहचान मिली। फिल्म 'शोला और शबनम' ने उन्हें संगीतकार के रूप में स्थापित कर दिया। खय्याम ने कई हिट फिल्मों जैसे 'कभी-कभी' और 'उमराव जान' के लिए म्यूजिक कंपोज किया था। इन मूवीज के गाने एवरग्रीन माने जाते हैं। मोहम्मद जहुर 'खय्याम' हाशमी ने संगीत की दुनिया में अपना सफर 17 साल की उम्र में लुधियाना से शुरू किया था। उन्हें अपने करियर का पहला मेजर ब्रेक ब्लॉकबस्टर मूवी 'उमराव जान' से मिला था, जिसके गाने आज भी इंडस्ट्री में और लोगों के दिलों में जगह बनाए हुए हैं।

अपने 4 दशक लंबे करियर में खय्याम ने एक से बढ़कर एक गाने बनाए। उन्हें 1977 में 'कभी कभी' और 1982 में 'उमराव जान' के लिए बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। साल 2010 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। इसके अलावा साल 2007 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी, पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। 2011 में उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया। 

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  • Web Title:Maharashtra State honours being accorded to veteran music composer Mohammed Zahur Khayyam Hashmi who passed away at a hospital