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29 सितम्बर, 2020|3:10|IST

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Mahabharat 1 May Evening Episode 70 Written Live Updates: गंगा पुत्र भीष्म से अंबा के अपमान का बदला लेने की तैयारी कर रहे हैं शिखंडी

देश में लगे लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर प्रचलित धार्मिक सीरियल 'महाभारत' का प्रसारण हो रहा है। दर्शक इस सीरियल को बहुत पसंद कर रहे हैं। अब तक आपने देखा कि गांधारी से मिलने के लिए कुंती पहुंचती हैं। गांधारी कहती हैं कि मैं तुमसे बात नहीं करूंगी। इस पर कुंती कहती हैं कि क्षमा कर दीजिए। बड़ों के क्षमा पर छोटों का अधिकार होता है। गांधारी कहती हैं कि मैं सभी को माफ कर दूंगी लेकिन कर्ण और शकुनि को कभी माफ नहीं करूंगी। इस दौरान गांधारी कुंती से वचन मांगती हैं कि तुम कभी भी मेरे बच्चों को श्राप मत देना। कुंती ने बताया कि मैंने दुर्योधन को लंबी आयु का आशीर्वाद दिया है। अब देखिए आगे...

7:58 PM- द्रोणाचार्य, भीष्म से मिलने आते हैं। वह कहते हैं कि मुझे नींद नहीं आ रही है। हस्तिनापुर में जो भी कुछ चल रहा है वह सही नहीं। जब भी आंख लगती है तो पांडवों का बाल-बचपन सामने आकर खड़ा हो जाता है। भीष्म, पुराने समय और पाडवों के बचपन को याद कर खुश भी होते हैं और दुखी भी। बचपन में खीर खाने के पीछे अर्जुन और भीम के बीच जो लड़ाई हुआ करती थी, उसे याद कर रहे हैं।

वहां, अर्जुन युद्ध के बारे में सोच रहे हैं। द्रौपदी अर्जुन के पास आती हैं। वह कहते हैं कि रणभूमि में तुम्हारा क्या काम, द्रौपदी तुम्हें यहां देखकर मैं हैरान हूं। द्रौपदी, अर्जुन को अपने अपमान के बारे में याद दिलाती हैं। कहती हैं कि मेरे केश तब तक खुले रहेंगे जब तक युद्ध में आप लोग जीत नहीं जाते। मैं धर्म की परिभाषा और तुम लोगों के बीच तब तक खड़ी रहूंगी, जब तक मेरे यह केश बंध नहीं जाते। द्रौपदी, प्रतिशोध की अग्नि में जल रही हैं। कुरुक्षेत्र में युद्ध का आधार पांचाली हैं। 

7:41 PM- भीष्म और ब्रह्मऋषि दोनों ही युद्ध के मैदान में कुरुक्षेत्र पहुंच चुके हैं। ब्रह्मऋषि पैदल चल रहे हैं और भीष्म रथ पर हैं। दोनों ही काफी गुस्से में नजर आ रहे हैं। भीष्म, युद्ध से पहले शंख बजा रहे हैं। वह कहते हैं कि हे ब्रह्मऋषि आप भूमि पर खड़े हैं मैं रथ पर रहकर आपसे युद्ध नहीं कर सकता। ब्रह्मऋषि कहते हैं कि भूमि ही मेरा रथ है। भीष्म यह सुनकर रथ से नीचे उतर जाते हैं और ब्रह्मऋषि के पास जाते हैं। कहते हैं कि मुझे युद्ध में विजय होने का आशीर्वाद दीजिए। ब्रह्मऋषि उन्हें आशीर्वाद देते हैं और कहते हैं कि जाओ इस प्रकार युद्ध करो जिससे तुम्हारा गुरू लज्जित न हो। ब्रह्मऋषि और भीष्म दोनों ही तीर छोड़ते हैं। इतने में वहां अंबा और बाकी के ऋषि आते हैं। वह सभी युद्ध होते देख रहे हैं। ब्रह्मऋषि के तीर से भीष्म घायल हो रहे हैं। भीष्म अचूक परास्त का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन उन्हें भगवान आकर रोक देते हैं। इतने में परशुराम कहते हैं कि या तो तुम लौट जाओ या फिर मेरा वद्ध करो। मैं यहां से खुद नहीं जा सकता। भीष्म, लौट जाने का रास्ता चुनते हैं। युद्ध के मैदान में भीष्म की जीत होती है, जिसके बाद परशुराम खुश होते हैं। लेकिन, अंबा अपने अपमान को नहीं भूलती हैं और वह गुस्से में आती हैं। 

अब शिखंडी अनुज को बताते हैं कि अंबा के अपमान का बदला मुझे लेना होगा। मैंने तपस्या की जिसके बाद मेरा आधा शरीर अंबा नदी के रूप में बन गया। मैंने दोबारा तपस्या की और महादेव ने मुझे वरदान दिया कि मैं भीष्म का वद्ध करूं। मैंने द्रुपद के घर जन्म लिया। शिखंडी दोबारा तीर तैयार करने बैठ जाते हैं। अंबा फिर से जन्म ले बनकर नया अतीत, शिखंडी यह चाहते हैं। 

7:32 PM- गंगा पुत्र भीष्म से मिलने ब्राह्मण आते हैं। वह परशुराम का संदेश लेकर आते हैं। भीष्म को कार्य क्या करना होगा यह खुद परशुराम बताएंगे, वह कहते हैं। भीष्म से ब्रह्मऋषि बात कर रहे हैं कि तुमने अंबा को स्वीकार क्यों नहीं किया। भीष्म कह रहे हैं कि गुरुदेव अंबा ने बताया कि वह शाल्य को अपना पति मान चुकी थी। मैं तो अब उसे अपने भाई से भी नहीं ब्याह सकता। ऐसे में ब्रह्मऋषि उनके साथ युद्ध करने के लिए कहते हैं। वह कहते हैं कि अगर तुमने अंबा को ग्रहण नहीं किया तो युद्ध होगा। तुम्हारे और मेरे बीच। भीष्म, युद्ध के लिए तैयार हो जाते हैं। ब्रह्मऋषि, भीष्म को कुरुक्षेत्र की ओर चलने के लिए कहते हैं। और बोलते हैं कि मैं भी तो देखूं कि मेरे शिष्य ने क्या सीखा है। भीष्म उनकी आज्ञा का पालन करते हैं और कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हो जाते हैं। 

7:25 PM- शिखंडी, अनुज को सभी बातें बता रहे हैं। अंबा प्रतिशोध के मार्ग की साक्षी थी। नारी के मान-अपमान पर पुरुषों का अधिकार है। लेकिन, यहां अपमान अंबा का हुआ था तो प्रतिशोध पर भी केवल उसी का अधिकार था। ऋषियों से अंबा प्रार्थना कर रही हैं। वह कह रही हैं कि मेरे पास कोई मार्ग खुला नहीं रह गया है। वापस भी नहीं जा सकती हूं। इसलिए मैं तपस्या करना चाहती हूं। ऐसे में ऋषि कहते हैं कि पुत्री तपस्या का मार्ग आसान नहीं बहुत कठिन है। ऐसे में अंबा तैयार हो जाती हैं और तपस्या का मार्ग चुनती हैं। अंबा की कथा सुनकर सभी ऋषि सन्न हो गए। ऐसे में ऋषि कहते हैं कि तू पिता के यहां न जा, तू परशुराम के पास जा। बाल पर्वत पर मिलेंगे वह। इतनी देर में ब्रह्मऋषि आते हैं। वह परेशानी पूछते हैं। अंबा बताती हैं कि गंगा पुत्र ने मेरा हरण किया और अब वह मुझे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। ऐसे में ब्रह्मऋषि गुस्से में आ जाते हैं और कहते हैं कि गंगा पुत्र को तुम्हें स्वीकार करना ही होगा। वह इंकार नहीं कर सकता है। 

7:17 PM- भीष्म रथ में जब रानियों को लेकर जा रहे होते हैं तो शाल्व राज उन्हें रोकते हैं। भीष्म उन्हें तीर मारकर चित्त कर देते हैं। भीष्म की बात मानकर सार्थी इसके बाद रानियों को लेकर हस्तिनापुर चले जाते हैं। अंबा, भीष्म को बताती हैं कि मैं आपके आने से पहले शाल्व को अपना पति मान चुकी थी। लेकिन, भीष्म उनका हरण करके हस्तिनापुर ले आए। ऐसे में गंगा, अंबा को वापस भिजवाने के लिए कहती हैं। सभा में अंबा अपनी बात रखती हैं और कहती हैं कि मैं वापस नहीं जाऊंगी और भीष्म के गले में वरमाला डालूंगी। लेकिन, भीष्म उन्हें कहते हैं कि मैंने ब्रह्माचारी होने की प्रतिज्ञा ली है। मैं वहां सिर्फ हस्तिनापुर का प्रतिनिधित्व करने आया था। ऐसे में अंबा कहती हैं कि मैं गंगा पुत्र भीष्म तुम्हें मेरे अपहरण के लिए कभी माफ नहीं करूंगी। 

7:12 PM- शिखंडी जब उस दिन को याद कर रहे होते हैं तो बैकग्राउंड में उस पल को दिखाया जा रहा है। भीष्म सभा में पधारते हैं। वह गुस्से में कहते हैं कि काशी की तीनों रानियों को मैं हस्तिनापुर लेकर जा रहा हूं। उनका स्वंयवर वहीं होगा। इन रानियों के स्वंयवर में मेरे अलावा कोई बैठने के लिए योग्य नहीं। वह भरे दरबार में घोषणा करते हैं कि वह राजकुमारियों को लेकर जा रहे हैं। भीष्म अपने तीर से सभा में मौजूद सभी राजाओं के मुकुट उतार देते हैं। तीनों रानियों को भीष्म लेकर जा रहे हैं। काशी नरेश भी भीष्म को आज्ञा दे देते हैं। हाथ में वरमाला लिए तीनों रानियां भीष्म के साथ जा रही हैं। 

7:05 PM- शिखंडी अपने शिविर में बैठे हैं। और गंगा पुत्र भीष्म को मारने के लिए तीर तैयार कर रहे हैं। अनुज उनके पास आते हैं और शिखंडी उन्हें काशी की रानी अंबा के अपमान का वह दिन याद दिलाते हैं। शिखंडी उस समय हुए अपमान के बारे में सोचकर गुस्से में आते हैं और थोड़ा दुखी भी होते हैं। 

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