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24 जनवरी, 2020|2:53|IST

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पीरियड फिल्मों के मास्टर हैं आशु सर: कृति

अपनी फिल्म ‘हीरोपंती’ की रिलीज के बाद से ही कृति बॉलीवुड में लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ती रही हैं। इंडस्ट्री में पांच साल बिता लेने के बाद अब वह आशुतोष गोवारिकर की पीरियड ड्रामा फिल्म ‘पानीपत’ में मुख्य महिला किरदार में दिख रही हैं। 29 वर्षीया कृति ने अपने करियर और इस फिल्म से जुड़े तमाम सवालों पर बेबाकी से अपनी राय सामने रखी।

पानीपत आपको कैसे मिली?
मैं लंबे समय से चाह रही थी कि आशु सर के साथ काम करने का कोई मौका हाथ आए। मैंने इससे पहले किसी ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म में काम नहीं किया था, इसलिए मैं बहुत खुश हूं कि मुझे यह मौका मिला। आशु सर पीरियड फिल्में बनाने में मास्टर हैं। ईमानदारी से कहूं, तो जब मैंने इस फिल्म की कहानी सुनी, तब तक मुझे पानीपत के युद्ध के बारे में बस थोड़ी बहुत जानकारी ही थी। मुझे यह याद नहीं था कि यह युद्ध किसके बीच में हुआ था, यह जानने के लिए मुझे गूगल की मदद लेनी पड़ी थी। मुझे लगता है कि इस किस्म की ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्में बनती रहनी चाहिए। सिनेमा एक ऐसा माध्यम है, जो आपको इतिहास को दोबारा जीने का मौका दे सकता है।

यह फिल्म असली कहानी पर आधारित है। ऐसे में आपने इसकी तैयारियां किस तरह कीं?
मैंने पार्वती बाई के बारे में पढ़ने की कोशिश की थी, पर उनके बारे में इंटरनेट पर ज्यादा जानकारी नहीं है। किसी किरदार में जान डालने के लिए मेरे हिसाब से सबसे जरूरी होता है निर्देशक का एक्टर होना। पार्वती बाई के बारे में मैंने काफी हद तक आशु सर और उनकी कल्पना के जरिये जाना। उन्होंने इस ऐतिहासिक किरदार को भी आज के दौर के हिसाब से ढाल दिया। आशु सर अपनी फिल्मों की महिलाओं को कभी कमजोर नहीं बनाते, यह उनकी बड़ी खासियत है।

आशुतोष की पिछली कुछ फिल्मों में भी बेहद सशक्त महिला किरदार थे, जैसे फिल्म ‘स्वदेश’ की गीता और ‘जोधा अकबर’ की जोधा। आप अपने किरदार को कहां पाती हैं?
फिल्म ‘जोधा अकबर’ में आपको जोधा याद हैं न! इसी तरह पार्वती बाई को भी आशु सर ने सशक्त बनाया है, ताकि वह दर्शकों के जेहन में लंबे समय तक रहे। इस किरदार में कई परतें हैं। वह एक वैद्य है। मुझे नहीं पता कि उस दौर में भारत में कितनी महिलाएं कामकाजी होती थीं। पार्वती अपनी भावनाओं को बेहद आसानी से व्यक्त कर देती हैं, विशेष रूप से अपने पति सदाशिव भाऊ (पेशवा ) के प्रति अपने प्यार को लेकर।

पेशवा बाजीराव के एक वंशज ने इस फिल्म को बनाने वालों को आपके एक संवाद के चलते नोटिस भेजा था- ‘मैंने सुना है पेशवा जब अकेले मुहिम पर जाते हैं तो एक मस्तानी के साथ लौटते हैं।’ इस विवाद पर आप क्या कहेंगी?
मैं सिर्फ इतना कहूंगी कि यह संवाद बेहद मासूमियत भरे अंदाज में कहा गया है। यह एक पत्नी ने ईष्र्या की भावना में भरकर कहा है। वह  हमेशा पति की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती है। जब वह लंबे समय की यात्रा पर जा रहा है, तो वह असुरक्षित महसूस करती है, जिस वजह से वह यह बात कहती है। किसी का अपमान करना हमारा मकसद नहीं था।

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  • Web Title:Kriti Sanon Says This About Panipat Film Director Ashutosh Gowarikar