Hindi Newsएंटरटेनमेंट न्यूज़Javed Akhtar Says Urdu is Not a Muslim Language It was Equal to Hindi 200 Years Back - Entertainment News India

जावेद अख्तर ने उर्दू को बताया हिंदी के बराबर, इसे मुसलमानों की भाषा कहने पर जताई आपत्ति

Javed Akhtar on Urdu: जावेद अख्तर ने भाषाओं के बारे में बात करते हुए कहा कि 200 साल पहले तक हिंदी और उर्दू एक समान भाषाएं हुआ करती थीं। उन्होंने कहा कि भाषाओं का कोई धर्म नहीं होता।

Puneet Parashar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीWed, 17 Jan 2024 08:38 PM
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लिरिक्स राइटर जावेद अख्तर बेबाक अंदाज में अपने विचार रखने के लिए जाने जाते हैं। अब उन्होंने हिंदी और उर्दू के मुद्दे पर अपनी राय रखी है और कहा है कि भाषाएं रीजन बेस्ड (क्षेत्र आधारित) होती हैं रिलीजन बेस्ड (धर्म आधारित) नहीं। जावेद अख्तर ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हिंदी हिंदुओं की भाषा है और उर्दू मुसलमानों की। उन्होंने धर्म के आधार पर भाषा को चुने जाने की सोच का खंडन किया और कहा कि यह कहना गलत होगा कि उर्दू एक भारतीय भाषा नहीं है। जावेद अख्तर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर पर इस बारे में बात कर रहे थे।

एक बराबर हुआ करती थीं हिंदी और उर्दू
जावेद अख्तर ने कहा कि 200 साल पहले हिंदी और उर्दू एक समान हुआ करती थीं लेकिन राजनैतिक वजहों से दोनों अलग हो गईं। कोई शायद ही यह फर्क बता पाएगा कि कोई कविता हिंदी कवि ने लिखी है या फिर उर्दू कवि ने। उन्होंने कहा, "यह सब ब्रिटिश लोगों ने उत्तर भारत में सांस्कृतिक तौर पर फूट डालने के लिए किया था।" जावेद अख्तर ने कहा कि अगर उर्दू एक मुस्लिम भाषा है तो फिर बंगाल में 10 करोड़ लोग ईस्ट पाकिस्तान हैं।

'सरकारों को दोषी नहीं ठहरा सकते क्योंकि..'
जावेद अख्तर ने कहा कि मलयालम लेखक मोहम्मद बशीर उर्दू में लिखा करते थे। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट, उजबेकिस्तान, कजागिस्तान के लोग उर्दू नहीं बोलते हैं, लेकिन कई भारतीय क्षेत्रों में इसे बोला जाता है। जावेद अख्तर ने कहा कि कोई भी उर्दू को मिटाने के लिए वर्षों से चली आ रही सरकारों को दोषी नहीं ठहरा सकता क्योंकि जो लोग खुद को संस्कृति का रक्षक मानते हैं उन्होंने सही जानकारी देने का काम नहीं किया है।

भाषाएं धर्मों से नहीं इलाकों से हुआ करती हैं
जावेद अख्तर ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बंटवारे से पहले सिर्फ हिंदुस्तान हुआ करता था। इसी तरह हिंदी सिर्फ हिंदू भाषा नहीं है। जावेद अख्तर ने बताया, "यह सारी बकवास बाते हैं। भाषाएं धर्मों से नहीं हुआ करतीं। वो इलाकों (क्षेत्रों) से होती हैं।" दिग्गज स्क्रिप्ट राइटर ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि जमीन का बंटवारा किया जा सकता है लेकिन भाषा का बंटवारा नहीं किया जा सकता। जावेद अख्तर ने कहा कि कई ऐसे शब्द हैं जिन्हें तब से अभी तक नहीं बदला गया क्योंकि उनका कोई और दूसरा विकल्प नहीं था।

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