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Haseen Dillruba Review: रोमांस और बदले का कॉकटेल, जानें कैसी है तापसी पन्नू की ‘हसीन दिलरुबा’

लाइव हिन्दुस्तान,मुंबईPublished By: Shrilata
Fri, 02 Jul 2021 01:54 PM
Haseen Dillruba Review: रोमांस और बदले का कॉकटेल, जानें कैसी है तापसी पन्नू की ‘हसीन दिलरुबा’

फिल्म: हसीन दिलरुबा
निर्देशक: विनील मैथ्यू
कलाकार: तापसी पन्नू, विक्रांत मैस्सी, हर्षवर्धन राणे, आदित्य श्रीवास्तव और दया शंकर पांडे
ओटीटी: नेटफ्लिक्स

लॉकडाउन की वजह से जब से सिनेमाघर बंद हुए, बड़े-बड़े सितारों ने ओटीटी प्लेटफॉर्म का रुख किया। तापसी पन्नू की यह पहली फिल्म है जो सीधे ओटीटी पर रिलीज हुई। फिल्म में उनके किरदार का नाम रानी है। उनके पति रिशु का रोल विक्रांत मैस्सी ने किया है। ट्रेलर रिलीज होने के बाद लगा था कि यह सस्पेंस और थ्रिलर से भरपूर होगी लेकिन शुरुआत होने के 10 मिनट के अंदर ही कई सारी चीजें एक साथ होने लगती हैं जिसके बाद लगने लगता है कि एक ब्रेक की जरूरत है।

क्या रोमांच पैदा कर पाती है फिल्म?
रोमांस और बदले के इस कॉकटेल में तीन अलग-अलग किरदार एक साथ जुड़ते हैं। पूरी फिल्म के बाद ऐसा लगता है कि मेकर्स ने ऐसा क्यों किया। 

फिल्म के ट्रेलर में दिनेश पंडित के उपन्यासों की झलक दिखाई गई है। इस तरह की किताबें आमतौर पर रेलवे स्टेशनों पर मिलती हैं हालांकि फिल्म की कहानी देखें तो उन किताबों में छपने वाली कहानियों जितना रोमांच भी पैदा नहीं कर पाती। ‘हसीन दिलरुबा’ का कोई भी किरदार आम इंसान की तरह व्यवहार करता नहीं दिखता। 

निराश करतीं तापसी पन्नू
‘जुड़वा 2’ तापसी के करियर की सबसे खराब फिल्म मानी जाती है। विनील मैथ्यू की ‘हसीन दिलरुबा’ उनकी खराब फिल्मों की लिस्ट को आगे बढ़ाती दिखती है। तापसी की परफॉर्मेंस एक उबाऊ गृहिणी के रूप में हैं। हालांकि कुछ सीन में वह अपने स्टैंडर्ड को सेट करती दिखती हैं लेकिन अगले ही पल उनका अभिनय फिर से उसी ढर्रे पर चलने लगता है। 

आमतौर पर यह निर्देशक और लेखक का काम होता है कि वह किरदारों को पर्दे पर किस तरह उभारता है। क्योंकि रानी के अलग-अलग व्यक्तित्व के बीच का जुड़ाव नहीं दिखता तो ऐसा लगता है कि आप पूरी तरह से दो अलग लोगों को देख रहे हैं। 

यहां देखें ट्रेलर:

विक्रांत मैस्सी भी रहे फीके
फिल्म की शुरुआत में रिशु यानी विक्रांत मैस्सी और तापसी पन्नू को मिलवाया जाता है। तापसी की तरह ही विक्रांत भी उतने ही अच्छे कलाकार हैं लेकिन एक कमजोर स्क्रिप्ट के चलते वह भी निराश करते हैं। निर्देशक विनील मैथ्यू दोनों को एक साथ कम्फर्टेबल करने में बहुत समय ले लेते हैं। 

फिल्म में हर्षवर्धन के लिए कुछ खास नहीं
हर्षवर्धन राणे नील के किरदार में हैं। उनका रोल रिशु को ध्यान में रखकर लिखा गया है। नील का किरदार फिल्म का काफी समय बर्बाद करता हुआ लगता है। हर्षवर्धन अपने किरदार से न्याय नहीं कर पाते। फिल्म में वह सबकुछ करना चाहते हैं जो रिशु नहीं कर पाता। ऐसे पुरुष किरदार खासकर ‘मजबूत महिला किरदार’ को ध्यान में रखकर लिखे जाते हैं। 

छोटे शहर की कहानी
निर्माता आनंद एल राय ने एक बार फिर से छोटे शहर की कहानी को पर्दे पर दिखाया है। हालांकि राइटर कनिका ढिल्लों वह जादू नहीं रच पातीं और फिल्म ‘हसीन दिलरुबा’ निराश करती है। 
 

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