DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

MOVIE REVIEW: फिल्म देखने से पहले पढ़ें कैसी है 'जीनियस'

Genius

निर्देशक - अनिल शर्मा
मूवी टाइप-  ऐक्शन,थ्रिलर
स्टार कास्ट- उत्कर्ष शर्मा, इशिता चौहान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, मिथुन चक्रवर्ती
स्टार-   1.5

 
स्टोरी
-पापा, मुझे हीरो बनना है!
-हां-हां, क्यों नहीं मेरे लाल, तू तो पैदा ही हीरो बनने के लिए हुआ है।
-तो कोई अच्छी सी रोमैंटिक एक्शन फिल्म बनाओ न, जैसे टाइगर और हृतिक के लिए बनी थीं।
-नहीं-नहीं, अभी तूने उतनी बॉडी बिल्डिंग कहां की है? चल अभी एक ऐसी पिक्चर बनाता हूं जिसमें ‘दिमाग का खेल दिल से’ खेलना होगा। मतलब समझा, तुझे ज्यादा एक्शन भी नहीं करना पड़ेगा और आधी से ज्यादा पिक्चर ये दिल-दिमाग के कैच-कैच में निकल जाएगी।
-क्या कमाल का आइडिया है पापा, और इसमें न, देशभक्ति का मसाला भी डाल दीजियेगा, आजकल काफी पसंद किया जा रहा है।
-क्यों नहीं पुत्तर! 
... और इस तरह तैयार हो गई ‘जीनियस’।

जब भी कोई अनिल शर्मा निर्देशित जीनियस की चर्चा करेगा, तो कुछ ऐसे ही अंदाज में करेगा। वैसे देखा जाए तो यह सोचने लायक विषय है कि अतीत में सफल फिल्में दे चुके निर्माता-निर्देशक अपने खुद के लाडलों के करियर की शुरुआत के लिए इस किस्म की फिल्में कैसे चुन लेते हैं। अब्बास मस्तान ने यही किया अपने बेटे मुस्तफा बर्मावाला की लॉन्चिंग के लिए और अब अनिल शर्मा भी इसी श्रेणी में शामिल हो गए हैं। कभी अगर सबसे घटिया डेब्यू फिल्म की लिस्ट बनी, तो उसमें अनिल शर्मा की जगह पक्की है। मशीन में तो चलो, कियारा आडवाणी का ग्लैमर और तनिष्क बागची का ठीकठाक संगीत था। पर जीनियस देखते हुए तो लगता है कि सबसे खराब काम करने की होड़ चल रही है।

Happy Phirr Bhag Jayegi देखने से पहले यहां पढ़ें फिल्म का REVIEW

एक्टर(?) फिल्म की लुटिया डुबोने में डटे ही थे कि कोरियोग्राफर यह बोलकर बीच में आ गए कि हम ही क्यों पीछे रहें। हम एक्टर्स को बेढंगा डांस करवा सकते हैं। तब तक साउंड वाले भी अपने स्पीकर विस्पीकर लेकर आ गए कि हमें भूलना मत। ऐसे कान फोड़ेंगे, ऐसे कान फोड़ेंगे कि दर्शक भी यह सोचकर कन्फ्यूज हो जाएंगे कि टिनाइटस (धीमी आवाज भी कान में तेज गूंजने की बीमारी) फिल्म के हीरो को है या हमें! म्यूजिक विभाग का बंदा भी बोल पड़ा कि मेहनत तो हमने भी की है बॉस (फिल्म शुरू होने के आधे घंटे के अंदर तीन गाने देखकर आपको इसका एहसास हो जाएगा)।

Review : डर का दूसरा नाम है 'Ghoul', रोंगटे खड़े कर देने वाली बेहद डरावनी कहानी!

तारीफ का मन तो और था, पर क्या करें, कहानी भी तो बतानी है। हां, तो यह कहानी है दो जीनियस इनसानों की। एक अपने दिमाग का इस्तेमाल अच्छाई के लिए करता है तो दूसरा बुराई के लिए। फिल्म का हीरो है वासुदेव शास्त्री (उत्कर्ष शर्मा) जो मथुरा में पला-बढ़ा एक प्रतिभाशाली अनाथ बच्चा है। यह अनाथ बच्चा आईआईटी के एंट्रेंस में टॉप कर लेता है जहां उसकी मुलाकात होती है नंदिनी चौहान (इशिता चौहान) से। दोनों के बीच प्यार जैसी कुछ खिचड़ी पकती है जिसके दौरान दोनों कपड़े बदल-बदल के गाने गाते हैं, क्लासों में नाचते हैं और हास्यास्पद से डायलॉग बोलते हैं। उत्कर्ष, जो खुद ही, खुद को जीनियस कहते हैं, बार-बार कहते हैं, आईआईटी से निकलते ही सीधा रॉ से जुड़ जाते हैं। या कह सकते हैं, रॉ खुद इस हीरे को तलाश लेती है। हवा में दिख रहे स्क्रीन पर उंगलियां चलाते वासुदेव को दिखाते समय निर्देशक को शायद यह याद आता है कि हम 2018 में जी रहे हैं, पर कुछेक सीन्स के बाद वो फिर इस बात को भूल जाता है। तो, रॉ के एक मिशन के दौरान वासुदेव बुरी तरह घायल हो जाता है और उसे यह बोल कर निकाल दिया जाता है कि वह शारीरिक रूप से फिट नहीं है। बाकी की पिक्चर में वासुदेव अपनी इमेज बनाने, दूसरे जीनियस (नवाज) को हराने और साथ ही लोगों की जान बचाता नजर आता है।

MOVIE REVIEW: HPBJ में 'हैप्पी' को ढूंढने में ही खो गई कहानी, खूब हंसाएगी जिम्मी की कॉमेडी

एक्टिंग एवं संगीत

इशिता चौहान की जगह किसी भी बीए/बीएससी पास थोड़ी ठीकठाक सी दिखने वाली लड़की को ले लिया जाता, तो भी यही नतीजा रहता। मजाल है कि बंदी ने एक भी सीन में अपने चेहरे पर कोई भाव आने दिया हो! नवाज भी कुछ ही हिस्सों में प्रभावित कर पाए और उन्ही की बदौलत कुछ लोग इस फिल्म को देखने भी चले जाएंगे। उनके हिस्से में कुछ ठीकठाक संवाद आए हैं। मिथुन चक्रवर्ती, आयशा जुल्का, जाकिर हुसैन जैसे कलाकारों के करने के लिए कुछ खास था नहीं। इतनी खूबियों के अलावा जो रही-सही कसर थी, वो फिल्म की चीखती हुई देशभक्ति पूरा कर देती है। चलते-चलते जीनियस से जुड़ी एक आखिरी जानकारी। फिल्म की अवधि है 2 घंटे 45 मिनट।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Genius moview Review in hindi