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24 जनवरी, 2020|1:36|IST

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हीरोइन की परिभाषा बदलनी है: भूमि

भूमि पेडनेकर की फिल्मों पर एक नजर डालने की देर है कि आप उनका मकसद समझ जाएंगे कि वह पारंपरिक बॉलीवुड हीरोइन की छवि तोड़ना चाहती हैं। उन्हें देखकर कुछ लोग इस हैरत में भी पड़ सकते है कि आखिर वह फिल्मों को चुन रही हैं या फिल्में उन्हें? भूमि जवाब देती हैं, ‘दोनों ही बातें हैं। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मेरे पास फिल्मों को लेकर इतने विकल्प मौजूद हैं। जब मैंने पहली बार फिल्म में काम किया था, तभी से फिल्म मेकर्स के मन में मुझे लेकर यह विश्वास पैदा हो गया था। उन्हें पता है कि मैं जोखिम उठाने के लिए तैयार हूं।’ जिस काबिलियत के साथ भूमि ने अपने किरदारों के लिए वजन बढ़ाया, उम्रदराज महिला का लुक अपनाया और त्वचा के रंग को गहरा करवाया, वह वाकई हिम्मत की बात है।

दरअसल भूमि नहीं मानतीं कि हीरोइन को किसी विशेष खांचे में फिट होना चाहिए। या, अगर वह किसी खास किस्म की दिखेगी, तभी खूबसूरत मानी जाएगी। वह कहती हैं,‘मैं पारंपरिक बॉलीवुड हीरोइन की छवि तोड़ने की कोशिश कर रही हूं। मैं ऐसी महिलाओं के किरदार निभाना चाहती हूं, जो मजबूत तो हैं ही, साथ ही जिनकी अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं, जो खुले ख्यालात की हैं, अपनी कमियों के साथ खुद को स्वीकार करती हैं। परंपरागत भारतीय समाज जिस रूप में औरत को देखता है, मैं उसे तोड़ना चाहती हूं। ग्लैमर की परतों में छुपी और आदर्श...। यह हकीकत से कोसों दूर है। हम इनसान हैं। हमसे भी गलतियां होती हैं।’ भूमि को इस बात पर गर्व है कि उन्होंने अब तक जितने भी किरदार निभाए, उन सभी का अपना एक अलग व्यक्तित्व था और उनमें निर्णय लेने की क्षमता थी। यही भूमि का मकसद है। महिलाएं आत्मविश्वास से भरी हों, अपनी शख्सीयत का जश्न मनाएं, खांचों से बाहर निकलें। 30 वर्षीया भूमि आगे कहती हैं, ‘मुझे पता है कि मैं क्या हूं, मेरी कमियां क्या हैं, खूबियां क्या हैं।’     

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  • Web Title:Bhumi Pednekar Wants To Change The Meaning and Entity of Heroine In Bollywood After Pati Patni Aur Woh