Hindi NewsEntertainment NewsAmjad Khan birthday when he talks about death director said action and I take my last breath

Amjad Khan: 'डायरेक्टर बोले एक्शन और वहीं आखिरी सांस हो', सिनेमा का सबसे बड़ा विलेन, जिसने चाही थी ऐसी मौत

हिंदी सिनेमा के विलेन की बात होगी तो गब्बर सिंह का किरदार निभाने वाले अमजद खान का नाम सबसे पहले लिया जाएगा। शोले में उन्होंने गब्बर के किरदर को जीवंत बना दिया। यह रोल उन्हें सलीम खान ने ऑफर की थी।

Amjad Khan: 'डायरेक्टर बोले एक्शन और वहीं आखिरी सांस हो', सिनेमा का सबसे बड़ा विलेन, जिसने चाही थी ऐसी मौत
Shrilata लाइव हिंदुस्तान, मुंबईSat, 11 Nov 2023 11:06 PM
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हिंदी सिनेमा जगत का ऐसा महान कलाकार जिसके लिए एक्टिंग ही सबकुछ था। वह चाहता था सेट पर ही उसकी मौत हो जाए। इससे बढ़कर उसके लिए कुछ नहीं हो सकता। यह अभिनेता थे अमजद खान। 12 नवंबर 1940 को मुंबई में उनका जन्म हुआ। उन्होंने अपनी पढ़ाई सेंट एंड्रयू हाई स्कूल से की। आगे चलकर उन्होंने आरडी नेशनल कॉलेज में एडमिशन लिया। स्कूल के दिनों से ही अमजद को एक्टिंग का शौक था और वह कॉलेज में थियेटर में परफॉर्म करने लगे। उनके छोटे भाई इम्तियाज भी एक एक्टर थे तो वह भाई के साथ स्टेज पर एक्टिंग करते थे।

छोटी उम्र से शुरू की एक्टिंग
अमजद जब 11 साल के थे तब उन्होंने पहली फिल्म 'नाजनीन' की। इसके बाद उनकी अगली फिल्म 17 साल की उम्र में 'अब दिल्ली दूर नहीं' थी। वह के आसिफ के एसिस्टेंट भी रहे और उनके साथ कुछ फिल्में कीं जिनमें उनका छोटा रोल था। 1975 में अमजद की किस्मत 'शोले' से बदल गई। सलीम खान ने उन्हें यह रोल ऑफर किया था, जो इसके राइटर्स में से एक थे। फिल्म के रोल के लिए उन्होंने काफी तैयारी की और डाकुओं पर लिखी गई किताबें पढ़ीं।

अमर कर गए गब्बर सिंह का किरदार
'शोले' का डायलॉग 'सो जा नहीं तो गब्बर आ जाएगा' उस वक्त बच्चे-बच्चे की जुबान पर चढ़ गया। 1975 में आई 'शोले' ना केवल उस साल की बल्कि उस दशक की सबसे बड़ी फिल्म साबित हुई। गब्बर का रोल कर अमजद सिनेमा जगत के सबसे बड़े विलेन बन गए। उनके जैसा दूसरा फिर कोई नहीं बन पाया। उसके बाद भी उन्होंने कितनी ही फिल्में कीं लेकिन वह हमेशा गब्बर के लिए याद किए जाते रहे हैं। फिल्म के बाद अमजद ने गब्बर सिंह के रोल में ब्रिटानिया ग्लूकोज बिस्कुट का प्रचार किया जिसमें वह कहते 'गब्बर की असली पसंद'। यह पहली बार था जब कोई एक्टर विलेन के रूप में इतना पॉपुलर प्रोडक्ट बेच रहा था। 'शोले' की सफलता के बाद अमजद के पास निगेटिव रोल के ऑफर आने लगे। वह अधिकतर फिल्मों में अमिताभ बच्चन के अपोजिट रहे। उनकी मुख्य फिल्मों में 'देस परदेस', 'नास्तिक', 'सत्ते पे सत्ता', 'चंबल की कसम', 'गंगा की सौगंध' और 'नसीब' सहित अन्य हैं।

ऐसी मौत की जताई थी इच्छा
एक पुराने टीवी इंटरव्यू में जब अमजद से पूछा गया कि अगर उन्हें चुनने का मौका दिया जाए तो वह किस तरह मरना चाहेंगे तो उन्होंने कहा, 'एक हाथ में चाय का गिलास हो, दूसरे हाथ में सिगरेट हो, मेरे बच्चे मेरे चारों तरफ हों और मैं शूटिग करता रहूं। वो (डायरेक्टर) कहें एक्शन और मैं गिर जाऊं, उसके बाद नहीं उठूं। यह सबसे बेस्ट होगा।' 

अमजद ने 1972 में शीला खान से शादी की। उनके दो बेटे और एक बेटी हुई। साल 1992 में जब वह केवल 51 साल के थे तो हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।

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