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हिंदी न्यूज़ मनोरंजनखुद को 'मसीहा' कहने पर ट्रोल करने वालों को सोनू सूद ने दिया जवाब, कहा- सपने में ऐसा नहीं सोचा

खुद को 'मसीहा' कहने पर ट्रोल करने वालों को सोनू सूद ने दिया जवाब, कहा- सपने में ऐसा नहीं सोचा

एक्टर सोनू सूद ने अपनी पुस्तक 'आई एम नो मसीहा' के टाइटल को लेकर ट्रोल किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। लॉकडाउन के दौरान गरीब प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए आगे आए सोनू सूद ने कहा कि...

खुद को 'मसीहा' कहने पर ट्रोल करने वालों को सोनू सूद ने दिया जवाब, कहा- सपने में ऐसा नहीं सोचा
Surya Prakashहिन्दुस्तान ,नई दिल्लीThu, 31 Dec 2020 02:26 PM
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एक्टर सोनू सूद ने अपनी पुस्तक 'आई एम नो मसीहा' के टाइटल को लेकर ट्रोल किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। लॉकडाउन के दौरान गरीब प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए आगे आए सोनू सूद ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी खुद को मसीहा मानने की बात नहीं सोची थी। दरअसल अपनी पुस्तक में मसीहा शब्द का इस्तेमाल किए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर एक वर्ग उन्हें ट्रोल कर रहा था। कोरोना काल में मजदूरों की मदद करने वाले सोनू सूद अब ऐसे लोगों की मदद में जुटे हैं, जिन्हें सर्जरी की जरूरत है या फिर जिन लोगों की कोरोना काल में नौकरी गई है।

किताब को लेकर ट्रोल करने वाले लोगों को जवाब देते हुए सोनू सूद ने कहा, 'ये लोग पेड ट्रोल हैं। किताब को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। जहां तक मेरी ओर से खुद को मसीहा कहे जाने पर निंदा की बात है तो मैंने कभी सपने में भी खुद को मसीहा मानने की बात नहीं सोची थी। यहां तक कि मैं अपने फैन्स को भी मना करता हूं कि वे मेरे लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल न करें।'

सोनू सूद ने Spotboye को दिए इंटरव्यू में कहा, 'मैंने हमेशा ही निगेटिविटी  को नजरअंदाज किया है। अपने विश्वास वाले काम की ओर आगे बढ़ने का यही तरीका है। मैं मानता हूं कि मुझे धरती पर एक उद्देश्य के साथ भेजा गया है। मैं अपना काम जारी रखूंगा। किसी की ओर से मसीहा कहा जाना या फिर मसीहा कहे जाने पर ट्रोल होना मेरी चिंता नहीं है।'

सोनू सूद ने कहा कि 2020 में एक चुनौतीपूर्ण साल रहा है। इसी दौरान मुझे लाखों तक पहुंचने और उनसे सीधे तौर पर जुड़ने का अवसर मिला है। इस यात्रा के दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा है और काफी चीजें हासिल की हैं। अपनी किताब को लेकर सोनू सूद ने कहा, 'मैंने अपने संस्मरण में अपने अनुभवों को साझा किया है। यह खुशी की बात है कि किताब को सिर्फ रीडर्स ही पसंद नहीं कर रहे हैं बल्कि ऐसे संगठनों और संस्थानों ने भी सराहना की है, जो वास्तव में कठिन समय में लोगों की मदद करने में यकीन रखते हैं।' 

सोनू सूद ऐसे वक्त में गरीब मजदूरों की मदद के लिए आगे आए थे, जब लॉकडाउन के दौरान लाखों लोगों के गांवों की ओर पलायन की स्थिति बन गई थी। उस मौके पर सोनू सूद ने लोगों को उनके गंतव्य स्थल तक पहुंचने में मदद की थी। सोनू सूद के इस प्रयास की काफी सराहना की गई थी। बता दें कि हाल ही में सोनू सूद के नाम से तेलंगाना में उनके प्रशंसकों ने मंदिरा का निर्माण भी कराया है।

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