दिग्गज सिंगर जानकी का निधन, तमिल-कन्नड़ समेत कई भाषाओं में गाए 48 हजार गाने
एस. जानकी का उम्र संबंधी बीमारियों के चलते निधन हो गया। परिवार की ओर से खबर शेयर करते हुए, उनकी पोती अप्सरा व्यद्युला ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि यह बहुत दुख के साथ साझा कर रही हूं कि मैं अपनी प्यारी दादी और महान गायिका श्रीमती एस जानकी के निधन हो गया है।

दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी का शनिवार को मैसुरु के एक प्राइवेट अस्पताल में उम्र संबंधी बीमारियों के चलते निधन हो गया। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। वह 88 वर्ष की थीं। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एस. जानकी ने मुख्य रूप से कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषाओं में 48,000 से अधिक गीत गाए। छह दशकों के करियर में, उन्होंने हिंदी, उड़िया, तेलुगु, उर्दू, पंजाबी और बंगाली सहित लगभग 20 भारतीय भाषाओं में फिल्मों, एल्बम, टेलीविजन और रेडियो के लिए गाना गाया।
परिवार की ओर से खबर शेयर करते हुए, उनकी पोती अप्सरा व्यद्युला ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, "यह बहुत दुख के साथ साझा कर रही हूं कि मैं अपनी प्यारी दादी और महान गायिका श्रीमती एस जानकी के निधन हो गया है।" उन्होंने कहा, "वह अपने परिवार के प्यार के साथ शांति से हमें छोड़कर चली गईं। जबकि हमारे दिल भारी हैं, हम उनके असाधारण जीवन और अपने शाश्वत संगीत के माध्यम से लाखों लोगों को दी गई असीम खुशी के लिए कृतज्ञता से भी भरे हुए हैं।"
'परिवार की गोपनीयता का सम्मान करें'
उन्होंने आगे लिखा, "दुनिया के लिए वह एक प्रतिष्ठित आवाज थीं, जिनके गाने अनगिनत यादों का हिस्सा बन गए। हमारे लिए वह एक प्यारी दादी थीं, जिनकी गर्मजोशी, विनम्रता, दयालुता और अनुग्रह हमेशा हमारे साथ रहेंगे। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप इस कठिन समय के दौरान हमारे परिवार की गोपनीयता का सम्मान करें क्योंकि हम शोक मना रहे हैं और इस नुकसान से उबर रहे हैं।''
जानकी का जन्म 23 अप्रैल, 1938 को हुआ
बता दें कि जानकी का जन्म 23 अप्रैल, 1938 को ब्रिटिश भारत के मद्रास प्रेसीडेंसी में गुंटूर में स्थित पल्लापटला, रेपल्ले तालुका में हुआ था। उनके पिता सिस्ला श्रीराममूर्ति थे, जोकि एक आयुर्वेदिक डॉक्टर और एक टीचर थे। उन्होंने अपने बचपन का ज्यादातर समय सिरसिला में बिताया। यहां उन्होंने केवल नौ साल की उम्र में पहली बार परफॉर्म किया। हालांकि, उन्होंने संगीत की मूल बातें पेडीस्वामी नामक नादस्वरम विद्वान से सीखीं, लेकिन उन्होंने कभी भी शास्त्रीय संगीत में कोई ऑफिशियल ट्रेनिंग नहीं ली।
लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
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