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Main Atal Hoon Review: अटल बिहारी वाजपेयी के किरदार में छाए पंकज, कहानी पर हावी उनकी परफॉर्मेंस

पंकज त्रिपाठी की फिल्म मैं अटल हूं शुक्रवार को रिलीज हो गई है। फिल्म का पोस्टर और ट्रेलर जब रिलीज हुए थे उन्हें काफी पसंद किया गया था और अब फाइनली फिल्म देखने के लिए दर्शक एक्साइटेड हैं।

Sushmeeta Semwal मोनिका रावल कुकरेजा, नई दिल्लीFri, 19 Jan 2024 03:05 PM
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फिल्म: मैं अटल हूं
डायरेक्टर: रवि जाधव
स्टार कास्ट: पंकज त्रिपाठी, पीयूष शर्मा, राजा रमेशकुमार, प्रमोद पाठक, गौरी सुखटणकर

फिल्म एक बहुत ही महत्वपूर्ण दृश्य से शुरू होती है जिसमें बतौर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने मंत्रियों के साथ शांति प्रस्ताव या पाकिस्तान के साथ युद्ध पर चर्चा करते हैं। एक आदर्शवादी और पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुधारने में विश्वास रखने वाले व्यक्ति के रूप में, वह हमेशा अपने देश को पहले रखते हैं, लेकिन अगर दुश्मन हथियार उठाता है, तो वह किसी भी हद तक जा सकते हैं।

फिल्म की अच्छी बात यह है कि इसमें अटल बिहारी वाजपेयी की पूरी जर्नी को डिटेल में बताया है। फ्लैशबैक सीन के जरिए उनके बचपन के दिनों को दिखाया जाता है जैसे छोटे अटल जो ताज महल में कविता बोलते हैं। कुछ समय बाद बच्चा बड़ा हो जाता है और एक दिन वह एक बिल्डिंग में छुपके से चढ़कर वहां पर लगे इंग्लैंड के झंडे को हटाकर भारत का झंडा लगा देता है। राष्ट्रीय सेवा संघ (आरएसएस) के सबसे तेज मेंबर में से एक थे वाजपेयी जो अपने एक्शन से बड़े बदलाव करना चाहते हैं।

रिव्यू
दिवंगत प्रधानमंत्री की इन विशेषताओं को पूरी फिल्म में बहुत सूक्ष्म तरीके से दिखाया गया है, लेकिन इसकी राइटिंग थोड़ी सुस्त लगी जो उन्हें प्रभावशाली तरीके से दिखाने के साथ पूरा न्याय नहीं करता है। कुछ डायलॉग ऐसे हैं जिन्हें समझने में मुश्किल होती है।

फिल्म में कई अहम चीजें दिखाई हैं जैसे 1953 में कश्मीर अटैक, 1962 में चाइना वॉर, 1963 में पाकिस्तान से लड़ाई और 1975 में इमरजेंसी। वैसे फिल्म में इन इवेंट्स को दिखाना जरूरी रहा होगा, लेकिन इससे फिल्म थोड़ी स्लो हो गई। दूसरे हाफ में वाजपेयी के करियर के बड़े लैंडमार्क दिखाए जैसे पोखरण टेस्ट के बाद न्यूक्लियर पावर बनना, दिल्ली से पाकिस्तान बस सेवा और कारगिल वॉर। डायरेक्टर की कोशिश रही है 2 घंटे 19 मिनट में सब दिखाने की। लेकिन पर्दे पर ये लगातार एक के बाद एक आते हैं जो मोंटाज जैसे लगते हैं।

परफॉर्मेंस
पंकज की शानदार परफॉर्मेंस रही। जब वह स्क्रीन पर आते हैं तो आप अपनी पलकें तक नहीं झपका पाएंगे। ना सिर्फ अटल  बिहारी वाजपेयी का लुक बल्कि उनके बोलने का स्टाइल सब पंकज ने अच्छे से किया। कभी-कभी तो आपको लगेगा रियल में अटल बिहारी स्क्रीन पर नजर आ रहे हैं। पूरी फिल्म में एक सीन है जहां रामलीला मैदान में पंकज, अटल बिहारी बनकर स्पीच दे रहे हैं और बारिश हो रही है। यह फिल्म का बेस्ट सीन है।

पीयूष मिश्रा ने फिल्म में अटल बिहारी के पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी का किरदार निभाया है। भले ही उन्हें स्क्रीन में लिमिटिड टाइम मिला, लेकिन उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस से दर्शकों का दिल जीत लिया है। पापा-बेटे के सीन आपको पसंद आएंगे। बाकी के स्टार्स जैसे राजा रामेशकुमार सेवक-ले के अडवाणी और गौरी सुख्तांकर-सुष्मा स्वराज के रूप में अच्छे दिखे।

फिल्म में अटल बिहारी वाजपेयी, जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के कई शॉट्स हैं जो आपको पसंद आएंगे। इसके अलावा जो ब्लैक एंड व्हाइट में पास्ट इवेंट्स को दिखाया है वो काफी रियल लगेंगे। कुल मिलाकर अटल बिहारी वाजपेयी की जर्नी को दिखाने की अच्छी कोशिश है। हालांकि सारा क्रेडिट पंकज त्रिपाठी की एक्टिंग को जाता है।

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