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Movie Review: दुविधा से भरी बोझिल फिल्म गॉडजिला 2: किंग ऑफ द मॉन्स्टर्स

godzilla king of the monsters review in hindi

फिल्म: गॉडजिला 2: किंग ऑफ द मॉन्स्टर्स
निर्देशक: माइकल दोघेर्ती, 
कलाकार: वेरा फारमिगा, मिली बॉबी ब्राउन, काइल चैंडलर

रेटिंग: 1.5/5

गॉडजिला हॉलीवुड की एक ऐसी सिरीज है, जिसका नाम साल 2014 में ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में सबसे लंबे समय तक चलने वाली फिल्म सिरीज के रूप में दर्ज किया गया था। मूल रूप से जापानी किरदार गॉडजिला को जब हॉलीवुड ने अपने अंदाज में बनाया था, तो उम्मीद थी कि ‘गॉडजिला यूनिवर्स', यानी गॉडजिला के अपने किरदारों वाली फिल्में लंबे समय तक हमारा मनोरंजन करती रहेंगी। पर ऐसा होता नजर नहीं आ रहा। 1953 में शुरू हुई इस सिरीज की 35वीं फिल्म ‘गॉडजिला 2: किंग ऑफ द मॉन्स्टर्स' कल ही रिलीज हुई है और बुरी तरह निराश करती है। यह एक ऐसी फिल्म है, जिसमें सीजीआई तकनीक से बने जानवरों ने इनसानों से बेहतर अभिनय किया है।

एमा रसेल (वेरा फारमिगा) एक पेलेबायोलॉजिस्ट हैं, जो मोनार्क नामक संस्था के लिए काम करती हैं। मोनार्क को टाइटन प्रजाति के विशालकाय जीवों को नियंत्रित करने और मारने के लिए सरकार की तरफ से नियुक्त किया गया था। एमा ने कभी अपने पति डॉ. मार्क रसेल (काइल चैंडलर) के साथ मिलकर ओरका नामक एक यंत्र बनाया था, जिसके जरिये टाइटंस से संपर्क स्थापित किया जा सकता है। मार्क और एमा का तलाक हो चुका है और उनकी बेटी मैडिसन रसेल (मिली बॉबी ब्राउन) एमा के साथ रहती है। एक दिन गुप्त प्रयोगशाला में गॉडजिला नामक टाइटन के साथ काम करते हुए कुछ लोग आक्रमण करते हैं। वे एमा और मैडिसन को अगवा कर लेते हैं और ओरगा भी चुरा लेते हैं। कुछ समय बाद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में छुपा कर रखे गए खतरनाक टाइटन्स सुप्तावस्था से जागने लगते हैं। 

फिल्म की कहानी और संवाद इतने लचर हैं कि नींद के आगोश में जाने का खतरा लगातार बना रहता है। पर एक मुश्किल यह भी है कि फिल्म का कानफोड़ू बैकग्राउंड संगीत चैन से सोने भी नहीं देता। सीजीआई इफेक्ट्स बेहद साधारण हैं। तीन मुंह वाला ड्रैगननुमा टाइटन गिटोरा फिल्म का मुख्य खलनायक है। जितना भयावह इसे लगना चाहिए था, उतना नहीं लगता। वेरा फारमिगा फिल्म में एमा रसेल का किरदार निभा रही हैं। यह किरदार जितना अहम है, उससे कहीं ज्यादा उलझन में नजर आता है। टाइटन्स को जगाकर वह क्या करना चाहती हैं, क्यों करना चाहती हैं, इसे लेकर जितनी दुविधा दर्शकों के मन में है, उतनी ही एमा के मन में भी नजर आती है। 

कभी लगता है कि वह थॉर वाले सिद्धांत, यानी आधी दुनिया का खात्मा, दुनिया में संतुलन कायम करना है- को मानती हैं। अगले ही पल उनके मन की दुविधा देख लगता है कि क्या वह वाकई ऐसा चाहती हैं? मार्क का किरदार भी कुछ खास असर नहीं पैदा करता। मुख्य किरदारों से ज्यादा बेहतर काम तो अन्य कलाकारों का है। डॉ. इशीरो सेरिजावा का किरदार निभाने वाले जापानी अभिनेता केन वाटानाबे का काम सबसे बेहतरीन कहा जा सकता है, हालांकि उनकी भूमिका बेहद छोटी है। फिल्म इतनी बोझिल बनी है कि इसे देखकर लगता है कि इसे बेमन से बनाया गया है।
 

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