इस गाने को गाते हुए फूट-फूटकर रोने लगे थे मोहम्मद रफी, हर सिसिक को सुन लोगों के भी निकल गए थे आंसू

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मोहम्मद रफी वैसे अपने पास आए किसी गाने को मना नहीं करते थे, लेकिन एक गाना ऐसा उनके पास आया था जिसके बारे में जानकर उन्होंने उसे गाने से मना कर दिया था।

इस गाने को गाते हुए फूट-फूटकर रोने लगे थे मोहम्मद रफी, हर सिसिक को सुन लोगों के भी निकल गए थे आंसू

मोहम्मद रफी उन सिंगर में से एक थे जिनके पास हर संगीतकार गाने के लिए जाता था। यहां तक कि जब बड़े दिग्गज भी किसी गाने को लेकर झिझकते थे तब मोहम्मद रफी अपनी आवाज में गाकर उस गाने को अमर कर देते थे। लेकिन एक ऐसा गाना था जिसे गाने से मोहम्मद रफी ने पहले मना कर दिया था।

किस गाने को लेकर घबरा गए थे मोहम्मद रफी

दरअसल, मोहम्मद रफी के पास फिल्म लाल किला की एक गजल लाई गई जिसके बोल थे ना किसी के आंख का नूर हूं। उन्हें बताया गया कि ये कोई आम गजल नहीं है बल्कि भारत के आखिरी मुघल बादशाह बहादुर शाह जफर का वो दर्द है जो उन्होंने अपने बच्चों को कत्ल और रंगून के जेल में तड़पते हुए लिखा था।

इस वजह से हो गए थे परेशान

रफी साहब इस बात को सुनकर घबरा गए। उन्होंने कहा कि मैं आज तक कभी जफर की दरगाह पर नहीं गया। मैं एक बादशाह की खौंफनाक पीड़ा और तड़प को अपनी आवाज से न्याय नहीं दे पाऊंगा। लेकिन म्यूजिक डायरेक्टर एस एन त्रिपाठी अड़ गए। उन्होंने कहा कि रफी साहब बस एक बार इसके बोल पढ़ लीजिए।

आंखों से आंसू ही नहीं रुक रहे थे

रफी साहब ने फिर गाना गाया और गाते वक्त उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे। वह बार-बार रुमाल से अपने आंसू साफ कर रहे थे। गाते वक्त जो सिसिक उनकी निकल रही थी उसे गाने में डाला भी गाया गया।

60 साल बाद आया फिर बड़ा ट्विस्ट

हालांकि कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट 60 साल बाद आया। फैंस के साथ-साथ रफी साहब और मेकर्स को लगा था कि उन्होंने बादशाह जफर का दर्द गाया है, लेकिन 2014 में जावेद अख्तर ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ये जफर की गजल नहीं थी। इसे जावेद अख्तर के दादा मुस्तर खैराबादी ने लिखा था। रफी साहब से अंजाने में झूठ बोला गया था। लेकिन उन्होंने गाने में ऐसा दर्द डाला कि सबको सही लगा।

खैर मोहम्मद रफी ने जैसे भी करके ये गाना गाया होगा, लेकिन यह जरूर है कि उन्होंने इस गाने से सबको हैरान कर दिया था और अपना फैन बना दिया था। इस गाने को अगर आप ध्यान से सुनेंगे तो आपको रफी का दर्द साफ समझ आएगा।

वैसे मोहम्मद रफी की खास बात ही यही थी कि वह पार्टी से लेकर सैड सॉन्ग, रोमांटिक सॉन्ग, गजल और भजन सब गाते थे। हर संगीतकार और एक्टर उनसे अपना गाना गवाना चाहते थे।

Sushmeeta Semwal

लेखक के बारे में

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सुष्मिता सेमवाल भारतीय डिजिटल मीडिया में पिछले 8+ सालों से हैं। वह फिलहाल 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के मनोरंजन सेक्शन में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। सुष्मिता को मनोरंजन जगत के हर इवेंट, मूवी रिलीज और लाइव इवेंट्स को कवर करना पसंद है।


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