मोहम्मद रफी ने जब गाते-गाते बदली अपनी आवाज, आशा भोसले भी रह गई थीं दंग, रिलीज होते ही रच दिया था इतिहास
मोहम्मद रफी एक ऐसे सिंगर थे जिनकी आवाज का जादू ऐसा था कि सब उनकी ओर खिंचे चले आते थे। अब रफी साहब का किस्सा बताते हैं जब एक गाने के लिए उन्होंने अपनी आवाज ही बदल दी थी।

मोहम्मद रफी ने अपने करियर में कई हिट गाने दिए हैं। उनकी आवाजा के लोग दीवाने थे। जब भी उनका गाना आता था तो फैंस के दिल में अपनी जगह जरूर बनाता था। अब हम आपको एक ऐसे गाने के बारे में बताने वाले हैं जिसके लिए रफी साहब ने अपनी आवाज ही बदल दी थी और सबको हैरान कर दिया था।
किस फिल्म का था वो गाना
यह गाना फिल्म राजकुमार का था जो 1964 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में शम्मी कपूर, साधना, पृथ्वीराज कपूर और प्राण जैसे सितारे थे।
जब मोहम्मद रफी ने दिखाया अपना करिश्मा
इस फिल्म के गाने मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर, आशा भोसले, सुमन कल्याणपुर ने गाए थे। लेकिन इनमें से एक गाना ऐसा था जिसमें मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज का एक जादुई करिश्मा दिखाया।
अब एक गाना था जिसका नाम था दिलरुबा दिल पे तू सितम किए जाए। इस गाने को मोहम्मद रफी साहब ने आशा भोसले के साथ गाया है। उस वक्त स्टूडियो में म्यूजिक की पूरी टीम के साथ शम्मी कपूर भी थे क्योंकि शम्मी अपने गानों को लेकर काफी फोकस रहते थे इसलिए वह अपने गानों की रिकॉर्डिंग के दौरान स्टूडियो आते थे।। अब सारे गाने गाने के बाद आई बारी 'दिलरुबा दिल पे तू सितम किए जा' की। यह एक जोशीला गीत था जिसमें रात के वक्त तबेले के लोग जश्न मना रहे हैं।
रफी साहब ने स्टूडियो में सबको किया हैरान
इस गाने में मोहम्मद रफी की इस लाइन से एंट्री होती है हम भी तो आग में जलते रहे। इस गाने में उनकी आवाज का अंदाज अलग था। इतना ही नहीं शंकर जयकिशन ने इसके लिए ऐसे इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल किया था जो अलग थे। जब रफी साहब इस गाने की आखिरी लाइन तक पहुंचे तब कुछ ऐसा हुआ कि स्टूडियो का माहौल ही बदल गया।
सबने कहा कमाल ही कर दिया
रफी साहब ने अपनी आवाज ही बदल दी। रिकॉर्डिस्ट ने शंकर जयकिशन की ओर देखा, लेकिन उन्होंने इशारा किया कि गाने को चलने दो। आशा भोसले भी हैरान होकर देख रही थीं। लेकिन उनका हिस्सा पहले ही खत्म हो गया था। अब रिकॉर्डिंग खत्म हुई तो रफी साहब के चेहरे पर एक अलग ही राहत थी। रिकॉर्डिस्ट ने कहा कि आपने तो कमाल ही कर दिया।
आशा ने कहा कि रफी साहब अच्छा हुआ आपने ये सब मेरे बाद किया, अगर मेरे साथ करते तो मैं वहीं रुक जाती। वैसे कहा जाता था कि रफी साहब अपनी आवाज में इम्प्रोवाइज कम करते थे, लेकिन जब करते थे तो इतिहास ही रच देते थे।
मुश्किल में रफी साहब के पास ही आते थे संगीतकार
मोहम्मद रफी के ऐसे कई कारनामे हैं जो वह म्यूजिक स्टूडियो में दिखाते थे। यही वजह है कि ज्यादातर संगीतकार उनसे ही गाना गाने को बोलते थे। इतना ही नहीं कई बार तो किसी गाने को जहां और सिंगर मना कर देते थे, वहीं रफी साहब हमेशा अपनी आवाज देकर उनकी मदद करते और उसे हिट जरूर बनाते थे। यही वजह है कि उनके कॉम्पटीटर्स भी उन्हें ही रिकमेंड करते थे कुछ गानों के लिए।
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