‘पेनिट्रेशन के बिना इजैक्युलेशन…’; छत्तीसगढ़ HC के फैसले पर भड़के विशाल ददलानी- उनकी बेटियों, मांओं…

Feb 19, 2026 02:09 pm ISTKajal Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के रेप केस में सजा कम करने के फैसले पर विशाल ददलानी ने गुस्सा निकाला है। कोर्ट का कहना है कि बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना रेप नहीं बल्कि रेप की कोशिश है।

‘पेनिट्रेशन के बिना इजैक्युलेशन…’; छत्तीसगढ़ HC के फैसले पर भड़के विशाल ददलानी- उनकी बेटियों, मांओं…

रेप के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का एक फैसला चर्चा में है। कोर्ट ने दोषी की सात साल की सजा कम कर दी है जो कि 2004 में एक निचली अदालत ने दी थी। कोर्ट का कहना है कि महिला के प्राइवेट पार्ट में पेनिट्रेशन के बिना ही इजैक्युलेशन हो जाए तो इसे रेप नहीं बल्कि रेप की कोशिश माना जाएगा। दोषी की अपील सुनते हुए कोर्ट ने सजा अब घटकर तीन साल छह महीने का कठोर कारावास कर दी है और 200 रुपये जुर्माना लगाया है। अब विशाल ददलानी ने छत्तीसगढ़ एचसी के फैसले पर रिएक्शन दिया है। उन्होंने कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताई है और हैशटैग दिया है, रेपिस्ट बचाओ अभियान।

क्यों भड़के विशाल ददलानी

विशाल ददलानी ने इंस्टाग्राम पर Live Law का ट्वीट शेयर किया है। इस ट्वीट में है, पेनिस को वजाइना के ऊपर रखना और बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना रेप नहीं है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप के दोषी की सजा घटाई। इस पर विशाल ने लिखा है, सीरियली? क्या!!!??? लाइवलॉ आपको इन जजेज के नाम लेना शुरू करना चाहिए और इनकी तस्वीरें फैसलों के साथ पोस्ट करनी चाहिए। उनकी पत्नियों, बेटियों, बहनों, मांओं को देखने दो कि उनके घर के पुरुष क्या सोचते हैं। कोई वाकई में रेपिस्ट बचाओ अभियान चला रहा है।

विशाल ददलानी ने किया इंस्टा पोस्ट

क्या है छत्तीसगढ़ रेप का मामला

मामला 2004 का है। इसमें पीड़ित पक्ष का आरोप था कि वासुदेव गोंड ने 21 मई 2014 को धमतरी में रहने वाली पीड़िता को फुसलाकर अपने घर बुलाया था। उसे एक कमरे में लेजाकर हाथ-पैर बांधे और यौन शोषण किया। इस मामले की शिकायत अर्जुनी पुलिस स्टेशन में दी गई थी। पीड़िता के बयान में विरोधाभाष पाया गया। पहले उसने कहा कि सेक्शुअल इंटरकोर्स हुआ था लेकिन बाद में कहा कि पेनिट्रेशन नहीं हुआ बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट पर अपना प्राइवेट पार्ट करीब दस मिनट तक रखा था। मेडिकल में भी पीड़िता के कपड़ों पर वाइट डिसचार्ज और स्पर्म मिले लेकिन हायमन सुरक्षित था।

हाई कोर्ट ने क्या कहा

इस केस में निचली अदालत ने 6 अप्रैल 2005 को वासुदेव गोंड को आरोपी मानते हुए सात साल की सजा सुनाई थी। आईपीसी के सेक्शन 342 के तहत छह महीने की सजा भी थी। दोनों सजाएं साथ में चलनी थीं। आरोपी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। 16 फरवरी 2026 को जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने फैसला दिया, 'रेप साबित करने के लिए पेनिट्रेशन का सबूत जरूरी है भले ही थोड़ा-बहुत हो। इस मामले में जो सबूत हैं वो पूरी तरह रेप साबित नहीं करते हालांकि ये साबित करते हैं कि रेप की कोशिश हुई थी।' कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी ने अपराध करने के इरादे से ऐसा किया था और अपराध पूरा होने वाला भी था।

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शॉर्ट बायो : काजल शर्मा पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
काजल शर्मा भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम की लीड हैं। 2020 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।


करियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल)
काजल ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबारों से की, जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2014 में अमर उजाला डिजिटल के साथ उन्होंने न्यू मीडिया की दुनिया में कदम रखा। 2017 से 2020 तक नवभारत टाइम्स (NBT) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल कवरेज के बाद वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ से जुड़ीं और वर्तमान में इन दोनों सेक्शंस की टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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