मैं यहां नहीं मरना चाहता… जब जेल में विक्रम भट्ट ने देवी मां से की प्रार्थना, बताया चमत्कार
विक्रम भट्ट ने अपने जेल के अनुभव के बारे में एक लंबा नोट लिखा है। उन्होंने बताया कि वहां उन्हें इतना तेज बुखार था कि चार कंबल ओढ़ने के बाद भी कांप रहे थे। विक्रम को इलाज नहीं मिला तो ईश्वर को याद किया और राहत मिली।

फिल्ममेकर विक्रम भट्ट धोखाधड़ी के केस में उदयपुर जेल में रह चुके हैं। वह बेल पर बाहर हैं और वहां बिताए वक्त के बारे में लंबा पोस्ट लिखा है। उन्होंने एक तस्वीर डाली है जिसके साथ लिखा है, पावर ऑफ प्रेयर। विक्रम ने इस पोस्ट में बताया है कि जब वह जेल में थे तो उनकी तबीयत खराब हुई। वहां ठीक से इलाज नहीं हो पाया और उन्हें बाहर के अस्पताल नहीं भेजा गया। इसके बाद उन्होंने प्रार्थना की और विक्रम पर देवी की कृपा हुई।
विक्रम को आया तेज बुखार
विक्रम भट्ट ने अपने सोशल मीडिया पर अपने जेल का अनुभव लिखा। वह उदयपुर सेंट्रल जेल में थे। उन्होंने अपनी हेल्थ के बारे में लिखा, 'उदयपुर जेल की कैद में तीन से चार हफ्ते हुए होंगे। मिड जनवरी की बात है, ठंड इतनी ज्यादा जिन्होंने सर्दी में जेल काटी है, उन्हें ही पता होगा। मुझे बैरक नंबर 10 की एक रात याद है। जेल में घड़ियां नहीं थीं, तो मुझे पता नहीं था कि क्या टाइम हुआ। पर मुझे याद है कि अचानक जागा और बुरी तरह कांपने लगा। मेरा शरीर ऐसा लग रहा था कि जैसे जल रहा है। जाहिर सी बात है मुझे बुखार था पर नापने का कोई तरीका नहीं था।'
चार कंबलों में भी कांप रहे थे विक्रम
विक्रम ने आगे लिखा, 'मेरे चारों ओर दो ब्लैंकेट लपेटे गए। मैं ऐसे कांप रहा था जैसे कपड़े ही ना पहने हों। दो लोग जो मेरे अगल-बगल थे वो जागे और मुझे कांपते देखा। कुछ ज्यादा कहे बिना वे कहीं से दो और कंबल ले आए और मुझे ओढ़ा दिया। चार कंबलों के नीचे भी मेरा शरीर कांप रहा था। मैंने एक पैरासिटामोल टेबलेट खाई और उम्मीद की कि ठीक हो जाएगा।'
नहीं मिला ठीक इलाज
विक्रम भट्ट का बुखार सुबह तक और बिगड़ गया। उन्हें जेल के हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टर नहीं आया था और दुर्भाग्य से कोई थर्मोमीटर नहीं था जो मेरा टेम्परेचर चेक कर सके। उन्होंने मेरा ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल देखा और बोले कि सब ठीक है। विक्रम ने अटेंडेंट से कहा, 'आप मजाक कर रहे हैं। मैं बुखार से कांप रहा हूं और आप कह रहे हैं कि मैं ठीक हूं?' जब डॉक्टर आए तो मैंने उन्हें अपनी हालत के बारे में बताया।
जेल से नहीं भेजा गया हॉस्पिटल
विक्रम ने लिखा कि डॉक्टर ने एक नोट लिखा कि उन्हें हॉस्पिटल ले जाना चाहिए लेकिन कोई नहीं आया। वह लिखते हैं, 'पहले पुलिस वीआईपी को बचाने में बिजी थे। इसके बाद किसी आदिवासी मेले में बिजी थे। मैं अपने बैरक के बाहर इंतजार करता रहा। मेरे दिन दर्दभरे थे। रातों में बुखार आ रहा था। एक पॉइंट के बाद मुझे लगा कि मैं कहीं नहीं जाने वाला।'
विक्रम ने की देवी से प्रार्थना
विक्रम लिखते हैं, 'तो मैंने बस वही किया जो कर सकता था। मैंने तेल और नमक खाना बंद कर दिया, जितना पानी हो सकता था पिया। बैरक में देवी की एक बड़ी पेटिंग थी जिसके सामने बैठा। मैंने प्रार्थना की। कहा, 'अगर आप हैं, अगर आपके लिए मेरी प्रार्थना के कोई मायने हैं तो मुझे चमत्कार दिखाइए। मैं यहां मरना नहीं चाहा। मेरे बच्चों को मेरी जरूरत है। मेरी बीवी को जरूरत है, मेरे 90 साल के पिता को जरूरत है।' मैंने हर दिन प्रार्थना की और धीरे-धीरे कुछ बदला।' विक्रम के वकील जेल में मिलने आए तो उन्होंने बताया कि लगता है वह जेल में मर जाएंगे। विक्रम ने बताया कि बुखार धीरे-धीरे कम हुआ और दर्द भी घटने लगा। एक सुबह उन्होंने देवी का धन्यवाद किया कि उन्होंने जिंदगी दी। विक्रम लिखते हैं, 'इस घटना के 15 दिन बाद एक पुलिस आया और फाइनली मुझे हॉस्पिटल लेकर गया।'
क्यों जेल गए थे विक्रम भट्ट
विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को 30 करोड़ के फ्रॉड के आरोप में राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर उदयपुर के एक बिजनसमैन के साथ धोखाधड़ी का आरोप था। उनके खिलाफ 17 नवंबर को केस दर्ज हुआ था। विक्रम के साथ 8 और लोगों पर चीटिंग का आरोप था। फरवरी 2026 में विक्रम और उनकी पत्नी को बेल मिलचुकी है।
लेखक के बारे में
Kajal Sharmaशॉर्ट बायो : काजल शर्मा पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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