एक ऐसा गाना जिसे सेंसर बोर्ड ने अश्लील बताकर कर दिया था रिजेक्ट, दो फिल्मों से निकाला..आज है अमर गीत

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एक ऐसा गाना जिसे सेंसर बोर्ड ने दो बार किया रिजेक्ट, दो फिल्मों से निकाला गया। अंत में जब वो गाना रिलीज हुआ तो अमर गीत बन गया। आज भी सुना जाता है सालों पुराना ये गाना। इस गाने पर थिरकने से खुद को रोक नहीं पाते लोग।

chaliya song nutan

हिंदी फिल्मों में कई अमर गीत बने हैं। अमर गीतों की लिस्ट में एक ऐसा भी गाना है जिसे एक नहीं बल्कि तीन बार रिजेक्ट किया गया। सेंसर बोर्ड ने गाने के कुछ बोल पर आपत्ति जताई जिसके बाद उस गाने को फिल्म में लाना मुश्किल हो गया। लेकिन अंत में जब वही गाना सालों बाद किसी दूसरी फिल्म में सुनाई दिया तो वो गाना हमेशा के लिए अमर हो गया। आज भी बारिश के गानों में एक उस गाने की गिनती भी की जाती है।

सेंसर बोर्ड ने रिजेक्ट किया गाना

ये 50 का दशक था। उस दौर में मम्यूजिक कंपोजर कल्याण जी आनंदजी की नई जोड़ी थी जो फिल्म मदारी के लिए गाने बना रही थी। फिल्म रिलीज के लिए तैयार थी। जब इस फिल्म को सर्टिफिकेट के लिए सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया तो गाने के कुछ बोल को लेकर उसे रिजेक्ट कर दिया गया। बोर्ड की तरफ से गाने के बोल में बदलाव करने की बात कही गई। लेकिन गाना तो पहले ही शूट हो चुका था। और रिलीज डेट भी करीब थी। ऐसे में मेकर्स ने रिस्क नहीं लिया और गाने को ही फिल्म से हटा दिया। लेकिन कल्याणजी आनंदजी जानते थे कि इस गाने में वो बात है जो ऑडियंस को खुश कर सकती है। उन्होंने वो गाना अपनी आने वाली फिल्मों में इस्तेमाल करने के बारे में सोचा।

दूसरी फिल्म से रिजेक्ट हुआ गाना

इसके बाद 1959 में कल्याणजी आनंदजी को फिल्म घर घर की बात में गाने देने का मौका मिला। लेकिन इस फिल्म में भी वो अपना रिजेक्ट हुआ गाना इस्तेमाल नहीं कर पाए, क्योंकि फिल्म की सिचुएशन वैसी नहीं थी। इसके बाद 1960 में दिल भी तेरा हम भी तेरे रिलीज हुई। फिल्म के हीरो थे धर्मेंद्र। फिल्म का गाना कल्यानजी आनंदजी बना रहे थे। उन्होंने अपना वही गीत डायरेक्टर अर्जुन हिंगोरानी को सुनाया। लेकिन उन्हें ये गाना पसंद नहीं आया। ऊपर गाना सेंसर बोर्ड ने रिजेक्ट किया था। तो डायरेक्टर रिस्क नहीं लेना चाहते थे। अब तक ये गाना दो फिल्मों से रिजेक्ट हो चुका था। लेकिन म्यूजिक कंपोजर की जोड़ी को अपने गाने पर यकीन था।

राज कपूर की फिल्म में मिला मौका

1960 में एक फिल्म आई छलिया। इस फिल्म में राज कपूर और नूतन लीड रोल में थे। फिल्म की कहानी भारत-पाकिस्तान के बीच हुए बंटवारे पर बेस्ड थी। इस फिल्म में कल्यानजी आनंदजी को म्यूजिक देने का मौका मिला। मनमोहन देसाई की ये पहली डायरेक्टोरियल फिल्म थी। इस फिल्म के लिए उन्हें एक बारिश सॉन्ग की जरूरत थी। उन्होंने ये बात जब म्यूजिक कंपोजर की जोड़ी कल्यानजी और आनंदजी को बताई तो उन्होंने फटाक से अपना रिजेक्टेड गाना उन्हें सुना दिया। मनमोहन देसाई को गाना बहुत पसंद आया। क्योंकि सेंसर बोर्ड को गाने के कुछ बोल से आपत्ति थी तो गीतकार कमाल जलालाबादी को फिर से उस गाने के बोल बदलने के लिए बुलाया गया। मुखड़ा वैसा ही रखा लेकिन अंतरे में बदलाव किया गया। इस गाने को आवाज देने वाले मुकेश को फिर से बुलाया गया और गाना अंतरा फिर से रिकॉर्ड किया गया।

आज अमर है ये गीत

गाने के नए वर्जन पर राज कपूर और नूतन ने खूब डांस करते हुए शूट किया। लेकिन जब फिल्म सेंसर बोर्ड के पास पहुंची तो गाना फिर से अटक गया। सेंसर बोर्ड ने फिर से अंतरे के बोल पर आपत्ति जताई। गीतकार कमाल जलालाबादी को फिर से बुलाया गया। गाने के बोल फिर से बदले गए। और जिस गाने को लेकर सभी को इतनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था वो था ‘डम डम डिगा डिगा, मौसम भीगा भीगा’ । इस गाने के अंतरे के पहले बोल थे ‘देखो लुटारा आज लुट गया हाय अल्लाह’ की जगह ‘देखो रे आज कोई लुट गया’ और ‘भोला भाला छुप के डाका डाला जाने तू कैसा मेहमान है’ की जगह ‘सनम हम माना गरीब हैं नसीब खोटा ही सही सही बंदा छोटा सही दिल खजाना है प्यार का हाय अल्लाह’। ये गाना जब बनकर फिल्म में सुना गया तो अमर हो गया। आज भी ये गीत अमर है।

Usha Shrivas

लेखक के बारे में

Usha Shrivas

परिचय और अनुभव: ऊषा श्रीवास भारतीय डिजिटल मीडिया की एक अनुभवी एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 9+ सालों का प्रोफेशनल एक्सपीरियंस है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के लाइव हिन्दुस्तान में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रही हैं। डिजिटल एंटरटेनमेंट पत्रकारिता, वीडियो कंटेंट और ऑडियंस-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग में उनकी गहरी समझ उन्हें इस एरिया में एक मजबूत पहचान दिलाती है। करियर: पत्रकारिता में आने से पहले ऊषा अन्य कई फील्ड के साथ जुड़ी रही हैं। एकाध NGO के साथ काम करने के बाद Visa Facilitation Service (VFS) जैसी अंतरराष्ट्रीय वीजा प्रोवाइडर कंपनी में काम किया। फिर जर्नलिज्म को करियर बनाने के लिए उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जन संचार संस्थान(IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली, जिससे उन्हें न्यूज़ जजमेंट, कंटेंट स्ट्रक्चर और मीडिया एथिक्स की गहरी समझ मिली। अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत उन्होंने APN चैनल से की, जहां कंटेंट राइटिंग और सोशल मीडिया मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाली। यहां रहते हुए उन्होंने डिजिटल ऑडियंस के लिए ट्रेंड-आधारित स्टोरीज।


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