इकलौती एक्ट्रेस जिसे मिला 'शहीद' का दर्जा, बिना कपड़ों के जेल में खाई थीं लाठियां, हुई थी दर्दनाक मौत
क्या आप जानते हैं एक ऐसी अभिनेत्री रही, जिन्हें इमरजेंसी के दौरान बिना किसी वजह के काफी यातनाएं झेलनी पड़ी।

भारत के इतिहास में इमरजेंसी काल को काला अध्याय माना जाता है। 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी को घोषणा की थी। 19 महीने तक देश में इमरजेंसी लगी रही। इसके बाद 21 मार्च 1977 को इमरजेंसी खत्म हुई। इस दौरान लाखों लोगों को जेल में जाना पड़ा और बिना किसी वजह से उन्हें यातनाएं दी गईं। लेकिन क्या आप जानते हैं एक ऐसी अभिनेत्री रही, जिन्हें इमरजेंसी के दौरान बिना किसी वजह के काफी यातनाएं झेलनी पड़ी। सिर्फ इसलिए क्योंकि वो एक राजनेता से दोस्त थीं। इतना सब होने के बावजूद भी वो इंदिरा गांधी के आगे झुकी नहीं। आइए जानते हैं आखिर ऐसा क्यों और क्या हुआ था?
पहले जान लेते हैं कौन थी वो अभिनेत्री
दरअसल, हम जिस एक्ट्रेस की बात कर रहे हैं वो थीं स्नेहलता रेड्डी। स्नेहलता एक एक्ट्रेस होने के साथ-साथ निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। स्नेहलता को कन्नड़ सिनेमा , कन्नड़ थिएटर, तेलुगु सिनेमा और तेलुगु थिएटर में उनके कामों के लिए जाना जाता है । बता दें कि स्नेहलता का जन्म 1932 में आंध्र प्रदेश राज्य में ईसाई धर्मान्तरित लोगों के घर हुआ था, जिन्होंने औपनिवेशिक शासन का कड़ा विरोध किया था। इसके बाद स्नेहलता ने इस हद तक अंग्रेजो का विरोध किया कि वह अपने भारतीय नाम पर लौट आई और केवल भारतीय कपड़े पहनती थीं। स्नेहलता का विवाह कवि, गणितज्ञ और फिल्म निर्देशक पट्टाभि रामा रेड्डी से हुआ था । दंपति प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और कार्यकर्ता डॉ. राम मनोहर लोहिया के लिए समर्पित थे ।
लगा था ये आरोप
मई 1976 में स्नेहलता रेड्डी बड़ौदा डायनामाइट मामले से जुड़े आरोपों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। आरोप था कि वो डाइनामाइट से दिल्ली में संसद भवन और अन्य मुख्य इमारतों को धमाका कर उड़ाना चाहती थीं। हालांकि, आखिर में इनमें से कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ। लेकिन 'मैंनेटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट' के तहत स्नेहलता की कैद जारी रही। मीसा एक्ट वही एक्ट है जिसके तहत आपातकाल में सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां हुई थी।
8 महीने रखा गया था जेल में
जेल में स्नेहलता रेड्डी को जो यातनाएं दी गईं, उनका पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी किताब 'इमरजेंसी रीटोल्ड' में भी जिक्र किया है। स्नेहलता रेड्डी, समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस की मित्र थीं, जिन्हें इमरजेंसी के समय पुलिस पकड़ने की कोशिश में थी। जॉर्ज फर्नांडिस से दोस्ती स्नेहलता को भारी पड़ी और उन्हें जेल में डाल दिया गया। उन्हें करीब 8 महीने तक जेल में कैद रखा गया और खूब यातनाएं दी गईं। एक्ट्रेस को जिए कालकोठरी में रखा गया था वहां पर कोई टॉयलेट-बाथरूम कुछ नहीं था। वो उसी कालकोठरी में टॉयलेट करती और बराबर में सोने को मजबूर थी। यही नहीं, इस एक्ट्रेस को जेल में डाल दिया गया और कपड़े उतारकर मारा-पीटा जाता था। बाद के विवरणों में उनकी जेल डायरी से सामने आया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका मनोबल नहीं टूटा। उन्होंने लिखा कि शरीर को कष्ट दिया जा सकता है, लेकिन इंसानी आत्मा को हमेशा दबाया नहीं जा सकता।
इकलौती एक्ट्रेस जिसे मिला 'शहीद' का दर्जा
बता दें कि स्नेहलता रेड्डी भारतीय सिनेमा के इतिहास की इकलौती एक्ट्रेस रहीं, जिन्हें 'शहीद' का दर्जा मिला। वह अस्थमा की मरीज थीं, जिसके कारण और हालत खराब थी। पर इसके बावजूद उन पर कोई रहम नहीं किया गया। कुलदीप नैयर साहब ने अपनी किताब इमरजेंसी रिटोल्ड (Emergency Retold)में ये भी बताया कि जेल जिस कोठरी में वो स्नेहलता बंद थीं उनके बगल वाली कोठरी में अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी भी कैद थे। बाद में दोनों ने बताया कि जिस समय वह जेल थे उन्हें किसी महिला के चीखने की आवाज सुनाई देती थी। बाद में पता चला कि वह कन्नड़ अभिनेत्री स्नेहलता थीं। जेल में तबियत बिगड़ने के कारण 15 जनवरी 1977 को उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया गया था। रिहाई के 5 दिन बाद ही 20 जनवरी को उनकी मृत्यु हो गई।


