संजय दत्त रोक सकते थे मुंबई ब्लास्ट… उज्ज्वल निकम ने बताया सजा सुनकर क्या था एक्टर का हाल
संजय दत्त को आर्म्स एक्ट में सजा दिलाने वाले लॉयर उज्ज्वल निकम का कहना है कि वह चाहते तो मुंबई ब्लास्ट रोक सकते थे। उन्होंने बताया जब संजय ने सजा सुनी तो क्या रिएक्शन था।

संजय दत्त अवैध रूप से हथियार रखने पर 7 साल की सजा काट चुके हैं। उनको बचाने के लिए बड़े से बड़ा वकील लगा था लेकिन वह जेल जाने से नहीं बच सके। जाने-माने प्रॉसेक्यूटर उज्ज्वल निकम ने उन्हें सजा दिलवाई थी। अब उन्होंने एक पॉडकास्ट में बताया है कि जब संजय दत्त को सजा सुनाई गई, उस वक्त वह कांप रहे थे। उज्ज्वल का कहना है कि उनकी नजर में संजय आतंकी नहीं हैं लेकिन इस बात से नाराजगी है कि उन्होंने आतंकी हमला नहीं रोका। वह चाहते तो ऐसा कर सकते थे।
डरे हुए थे संजय दत्त
उज्ज्वल निकम लल्लनटॉप से बात कर रहे थे। वह बोले, 'जब भी संजय दत्त रोए, लोगों ने इसके लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया। मीडिया किसी के बारे में भी पब्लिक परसेप्शन बना सकती है। जब कोर्ट ने संजय दत्त के खिलाफ वर्डिक्ट सुनाया, वह स्वाभाविक रूप से डरे हुए थे। वह जमानत पर बाहर थे लेकिन कोर्ट ने आदेश दिया था कि उन्हें कस्टडी में लिया जाए।'
आर्म्स एक्ट में दोषी थे संजय
अपना पक्ष रखते हुए उज्ज्वल ने कहा कि उनका कहना था कि संजय को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर एक्ट (पहली बार छोटी-मोटी भूल पर वॉर्निंग देकर छोड़ना) का फायदा नहीं मिलना चाहिए। वह आर्म्स एक्ट में दोषी थे। हालांकि कोर्ट ने उन्हें कॉन्सपिरेसी चार्जेज में निर्दोष माना था। इसमें उज्ज्वल सहमत थे लेकिन उनका तर्क था कि आर्म्स एक्ट में संजय को 7 साल सजा होनी चाहिए।
संजय के वकील का तर्क
उज्ज्वल बोले, 'उनके वकील का तर्क था कि यह पहला अपराध है तो बॉन्ड पर रिहा कर देना चाहिए। मैंने ऑब्जेक्शन किया क्योंकि संजय के पास जो पिस्टल थी, वो दाऊद के कई शूटर्स के पास होकर आई थी। अगर वह किसी ऐसे शख्स से हथियार लेते हैं तो वह उसके क्रिमिनल बैकग्राउंड से भी वाकिफ रहे होंगे। प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट का फायदा उन्हें मिलता है जो पहली बार अपराध कर रहे हों, मासूम हों और परिस्थितवश ऐसी सिचुएशन में फंस गए हों। संजय के साथ ये केस नहीं था।'
कांपने लगे संजय दत्त
उज्ज्वल ने बताया कि संजय को जब सजा सुनाई गई तो उनका रिएक्शन क्या था। वह बोले, 'जब फैसला आया, वह कांप रहे थे। वह बोलते रहे, 'सर, मैंने कुछ गलत नहीं किया। मैं वापस आऊंगा।' वह कांपते दिख रहे थे और मैं उनके पास खड़ा था। मैंने उनसे कहा, 'संजू, मीडिया देख रहा है, प्लीज सीधे खड़े रहो।' फिर मैंने पुलिस से कहा कि इन्हें ले जाओ। अगर मैंने उस वक्त उन्हें मोटिवेट ना किया होता तो मीडिया मुझे विलन बना देती। हर कोई मेरे खिलाफ था।'
हथियारों के शौकीन थे संजय
उज्ज्वल निकम आगे बोलते हैं, 'मैं यह बात साफ कर देना चाहता हूं कि संजय दत्त टेररिस्ट नहीं थे। वह उनका बचपना था। आप यह चीज उनकी आंखों में देख सकते थे। वह हथियारों को लेकर क्यूरियस थे, उस वक्त कई लोग अंडरवर्ल्ड से फैसिनेटेड रहते थे। उनके साथ जुड़ना लोगों के लिए फ्लैक्स होता था।'
संजय रोक सकते थे ब्लास्ट
हालांकि उज्ज्वल ने अफसोस जताया कि संजय चाहते तो ब्लास्ट रोक सकते थे। वह बोले, 'जब अबु सलेम हथियारों से भरे ट्रक के साथ आया, संजय ने कुछ रख लिए और बाकी वापस कर दिए। मेरा कहना है कि उसने तब पुलिस को बता दिया होता तो हम बम ब्लास्ट रोक सकते थे। कई जानें बच जातीं। इसमें शामिल लोग गिरफ्तार हो जाते। मुझे उससे यही शिकायत है पर वह आतंकी नहीं है।'
लेखक के बारे में
Kajal Sharmaशॉर्ट बायो : काजल शर्मा पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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काजल शर्मा भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम की लीड हैं। 2020 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।
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काजल ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबारों से की, जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2014 में अमर उजाला डिजिटल के साथ उन्होंने न्यू मीडिया की दुनिया में कदम रखा। 2017 से 2020 तक नवभारत टाइम्स (NBT) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल कवरेज के बाद वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ से जुड़ीं और वर्तमान में इन दोनों सेक्शंस की टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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