क्या आपको पता है भोजपुरी लोकगीत 'सइयां मिले लरकैया मैं क्या करूं' गाने का मतलब? सिंगर को मिला पद्मश्री सम्मान

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इन दिनों बॉलीवुड ही नहीं बल्कि साउथ की फिल्मों में भी भोजपुरी सॉन्ग सुनने को मिल रहे हैं। ऐसा ही एक फेमस भोजपुरी सॉन्ग है, जो इन दिनों काफी ट्रेंड हैं। इस गाने पर लोग भर-भरकर रील बना रहे हैं। लेकिन कई लोगों को इस गाने का मतलब तक नहीं पता। ये गाना है 'सइयां मिले लरकैया मैं क्या करूं'।

क्या आपको पता है भोजपुरी लोकगीत 'सइयां मिले लरकैया मैं क्या करूं' गाने का मतलब? सिंगर को मिला पद्मश्री सम्मान

Saiyaan Mile Larkaiya Bhojpuri Folk Song: हिंदी गानों की तरह इन आज भोजपुरी गानों का काफी क्रेज है। हिंदी गानों से कहीं ज्यादा भोपजुरी सॉन्ग पसंद किए जाते हैं। इसके बिना मानों शादी-पार्टी अधूरी लगती है। इन दिनों बॉलीवुड ही नहीं बल्कि साउथ की फिल्मों में भी भोजपुरी सॉन्ग सुनने को मिल रहे हैं। ऐसा ही एक फेमस भोजपुरी सॉन्ग है, जो इन दिनों काफी ट्रेंड हैं। इस गाने पर लोग भर-भरकर रील बना रहे हैं। लेकिन कई लोगों को इस गाने का मतलब तक नहीं पता। ये गाना है 'सइयां मिले लरकैया मैं क्या करूं'। तो चलिए हम आपको बताते हैं इस गाने का आखिर क्या मतलब है।

पहले जान लेते हैं गाने की लाइनें

सइयां मिले लरकैया,

मैं का करूं?

हाय, मैं का करूं?

सइयां मिले लरकैया, मैं का करूं?

हाय, मैं क्या करूं?

सोलह बरस मोरी बाली उमरिया,

सोलह बरस मोरी, सोलह बरस मोरी,

सोलह बरस मोरी बाली उमरिया,

नादान सइयां से कैसे निभैया?

हाय, मैं क्या करूं?

दिन भर वो गुल्ली-डंडा खेले,

दिन भर वो गुल्ली-डंडा खेले,

सांझ भये घर आवे,

सांझ भये घर आवे,

मैया के आगे वो रोना रोवे,

मैया के आगे वो रोना रोवे,

मैं समझा-समझा के हारी,

हाय, मैं क्या करूं?

सइयां मिले लरकैया,

मैं का करूं?

हाय, मैं क्या करूं?

अब जानते हैं इस गाने का मतलब

'सइयां मिले लरकैया' मालिनी अवस्थी द्वारा गाया गया एक बेहद लोकप्रिय लोकगीत है। इस पारंपरिक गीत में एक नई नवेली दुल्हन की पीड़ा और हंसी-मजाक का वर्णन है, जिसका पति बहुत नादान और बेहद कम उम्र का होता है। नासमझ और बच्चा है होने की वजह से वो अपनी पत्नी की भावनाओं को नहीं समझता है और न ही उससे रोमांस करता है। यही नहीं, पूरा दिन वो गिल्ली-डंडा खेलता है और जैसे ही घर आता है तो अपनी पत्नी को छोड़कर अपनी बस मैया-मैया यानी मां-मां करता है।

छोटी उम्र में शादी का दर्द

सीधे शब्दों में कहा जाए तो लोकगीत में यह लाइन उन दिनों का हास्य और व्यंग्य भी दर्शाती है, जब छोटी उम्र में शादियां कर दी जाती थीं और दुल्हन को अपने नासमझ पति के साथ तालमेल बिठाने में दिक्कत होती थी।

Priti Kushwaha

लेखक के बारे में

Priti Kushwaha

प्रीति कुशवाहा को डिजिटल मीडिया में 9+ सालों का प्रोफेशनल एक्सपीरियंस है। वह फिलहाल 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के मनोरंजन सेक्शन में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं। प्रीति को मनोरंजन जगत के हर इवेंट, मूवी रिलीज और लाइव इवेंट्स को कवर करना पसंद है।

करियर
प्रीति ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया कानपुर हिन्दुस्तान प्रिंट से की थी। इसके बाद मेरठ जनवाणी में फीचर डेस्क पर एक साल काम किया। इसके बाद दैनिक भास्कर (रोहतक) में सब-एडिटर के तौर पर एक साल में काम। साल 2019 में डिजिटल मीडिया में काम शुरू किया और राजस्थान पत्रिका (जयपुर) में डिजिटल एंटरटेनमेंट पत्रकारिता, वीडियो कंटेंट पर काम किया। गृहलक्ष्मी मैगजीन में उनके डिजिटल और मैगजीन के लिए काम किया। दैनिक जागरण डिजिटल में साढ़े तीन साल एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा रहीं।

एजुकेशन: प्रीति ने कानपुर यूनिवर्सिटी से बीकॉम की डिग्री और फिर भारतीय विद्या भवन से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। साथ ही राजश्री टंडन ओपन यूनिवर्सिटी से मास्टर्स किया।

एंटरटेनमेंट पत्रकारिता और डिजिटल विजन: प्रीति का मानना है कि एंटरटेनमेंट पत्रकारिता में खबरों को रोचक बनाने के साथ ही उसमें फैक्ट का पूरा ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही सोशल मीडिया के ट्रेंड को फॉलो करना बेहद जरूरी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऑडियंस बिहेवियर को समझकर वह हाई-रीच और हाई-एंगेजमेंट स्टोरीज तैयार करती हैं।

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