ऋचा चड्ढा के साथ बचपन में हुआ था ऐसा बर्ताव, बताया कैसे बनाएं बेटियों के लिए बेहतर दुनिया
Richa Chaddha: ऋचा चड्ढा ने बताया कि कैसे उन्हें बचपन में अपने ही घर पर लिंग के आधार पर भेदभाव झेलना पड़ा था। एक्ट्रेस ने बताया कि कैसे हम देश की लड़कियों के लिए इस दुनिया को बेहतर बना सकते हैं।

बॉलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने 'मसान', 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' और 'फुकरे' जैसी आइकॉनिक फिल्में की हैं। ऋचा हर मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। एक्ट्रेस ने बताया कि जब वह छोटी थीं तो उन्हें अपने ही घर में लिंग के आधार पर भेदभाव झेलना पड़ा था। ऋचा चड्ढा ने बताया कि कैसे उनकी नानी ने बचपन में उनसे ऐसी बातें कहीं जो तब उन्हें समझ में नहीं आई थीं। ऋचा चड्ढा ने बताया कि कैसे हम लड़कियों के लिए इस दुनिया को बेहतर बना सकते हैं और बुनियादी बदलाव करके समाज में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।
ऋचा के साथ किया गया ऐसा बर्ताब
ऋचा चड्ढा ने लिली सिंह के साथ बातचीत में बताया, "मैं एक बच्ची थी जो अपने बेड पर कूद रही थी, मेरी नानी जो हमारे घर आई हुई थीं, उन्होंने कहा- अगर तुम इस तरह कूदती रहोगी तो कोई तुमसे शादी नहीं करेगा। तुम अपने ससुराल में यह सब नहीं कर सकतीं। मेरी समझ में ही नहीं आया कि वो क्या कह रही हैं। तब मैं सात या आठ साल की रही होऊंगी। मुझे लगा कि यह पागल हो गई हैं क्या।" ऋचा को उस वक्त समझ नहीं आया कि उनकी नानी क्या कह रही थीं, लेकिन बाद में उनकी मां ने ऋचा को समझने में मदद की, कि नानी जो कह रही थीं वो बातें कहां से आई थीं।
तब नानी ने बताया था अपना तजुर्बा
ऋचा चड्ढा ने बताया कि उनकी नानी उनके साथ बुरा बर्ताव नहीं कर रही थीं, वह बस उन्हें अपनी खुद की जिंदगी का तजुर्बा बता रही थीं। ऋचा ने बताया, "नानी का जन्म 1920 में हुआ था और 13 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी।" उन चीजों को याद करते हुए वो यह सब बता रही थीं। ऋचा ने इसी इंटरव्यू में यह भी बताया कि हम लड़कियों के लिए इस दुनिया को बेहतर बनाने के लिए क्या कर सकते हैं। एक्ट्रेस ने कहा, "बस बेटों पर फोकस कीजिए। आपको अपने बेटों पर फोकस करना होगा। बस इतना ही।"
ऋचा चड्ढा ने बताया प्रॉब्लम का हल
ऋचा चड्ढा ने बताया, "ऐसा नहीं है कि बेटियां दूसरों की बेटियों के साथ कुछ गलत कर रही हैं। बेटों का अपने पिता के साथ मजबूत बॉन्ड होना जरूरी है। बेटों को समझना जरूरी है कि उन्हें अपनी मां से चीजों के लिए सहमति लेनी होगी। बेटों को यह देखना जरूरी है कि उनके पिता उनकी मां और बहनों के साथ अच्छा बर्ताव करते हैं। बहनों को भी वही खाना मिलना चाहिए जो भाई को मिल रहा है, उसी स्कूल में जाना चाहिए जहां भाई जा रहा है। महिलाएं हमारे देश की रीढ़ हैं। हम खुश नहीं रह सकते अगर आपके देश की 50% जनता को यह लगता है कि कोई पूरे वक्त उन्हें देख रहा है, स्टॉक कर रहा है।"


