
1960 की इस कव्वाली का रीमेक है 'धुरंधर' का सॉन्ग, हूबहू मेल खाता है दोनों का म्यूजिक और लाइनें
रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर का गाना 'कारवां' खूब पसंद किया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गाना साल 1960 में आई फिल्म 'बरसात की रात' से लिया गया था और उस फिल्म में भी इस गाने को एक कव्वाली से उठाया गया था।
रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर' का गाना 'कारवां' दर्शकों की जुबां पर चढ़ गया है। यह सॉन्ग रिलीज के साथ ही सुपरहिट हो गया था और फिल्म में इसे देखने को बाद अब दर्शकों के दिलों में इसने अलग ही जगह बना ली है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गाने का म्यूजिक साल 1960 में आई फिल्म 'बरसात की रात' से इंस्पायर्ड है। इस फिल्म का म्यूजिक रोशन ने दिया था और कम लोग जानते हैं कि 1960 में भी इस गाने को नुसरत फतेह अली खान साहब के पिता की एक कव्वाली से लिया गया था, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि दुर्भाग्यवश तब इसे क्रेडिट नहीं दिया गया।
पुराने गाने का रीमेक है धुरंधर का सॉन्ग
आरजे सचिन साहनी ने अपने एक वीडियो में बताया, “धुरंधर का यह गाना 'कारवां' आया 'बरसात की रात' से। वहीं वो गाना आया था ना 'बुतकादे की कदर मुझे' से। इस कव्वाली को 50 के दशक में मुबारक अली और फतेह अली साहब ने गाया था। धुरंधर फिल्म में यह गाना 1960 में आई फिल्म 'बरसात की रात' के गाने के आधिकारिक राइट्स के साथ बनाया गया रीमेक है। लेकिन 'बरसात की रात' में जो कव्वाली है, यह असल में ऑरिजनल कव्वाली है मुबारक अली और फतेह अली (नुसरत फतेह अली खान के पिता) की।”
'बरसात की रात' में नहीं दिया था क्रेडिट
इसी वीडियो में बताया गया है कि इस कव्वाली तो मुबारक अली और फतेह अली साहब ने लेट 40s और अर्ली 50s के वक्त रिकॉर्ड किया था। इसी कव्वाली को 1960 में 'बरसात की रात' में अडॉप्ट किया गया, लेकिन बिना किसी क्रेडिट के। इस ऑरिजनल कव्वाली के और भी बहुत सारे रेफरेंस हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह हुआ कैसे? यह एक डॉक्यूमेंटेड फैक्ट है कि एक बार देव आनंद साहब ने अपने घर पर एक पार्टी रखी थी। इस पार्टी में उन्होंने मुबारक अली-फतेह अली साहब की जोड़ी को इनवाइट किया था।
पार्टी से आया इस कव्वाली का आइडिया
कहा जाता है कि यह पार्टी पूरी रात चली और इसमें हिंदी सिनेमा के बहुत सारे दिग्गज भी मौजूद थे। इसमें एक्टर्स प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स सभी लोग शामिल थे। बरसात की रात उस वक्त प्रोडक्शन में थी और नौशाद साहब इसका म्यूजिक संभाल रहे थे। जब उनसे इस कव्वाली को रीमेक करने को कहा गया तो उन्होंने बिना किसी की अनुमति की ऐसा करने से इनकार कर दिया। फिर जब नौशाद साहब इस कव्वाली से हटे तो रोशन साहब ने कमान संभाली और इस तरह यह कव्वाली इस फिल्म का हिस्सा बनी।

लेखक के बारे में
Puneet Parasharलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




