राजेश खन्ना की फ्लॉप ने इस एक्टर के पिता को कर दिया था तबाह, बेबस बाप के सहारे के लिए बना हीरो
राजेश खन्ना की फिल्म से सबको काफी उम्मीदें थीं, फ्लॉप हुई तो प्रोड्यूसर से एक्टर्स ने दूरी बना ली। पिता की बेबसी देख बेटे ने हीरो बनने का फैसला लिया और आज वह बॉलीवुड के झक्कास एक्टर हैं।

सुरिंदर कपूर बॉलीवुड के जाने-माने प्रोड्यूसर थे। राजेश खन्ना की एक फ्लॉप फिल्म ने उनकी जिंदगी बदल दी। लोगों ने उनसे दूरी बना ली और कोई फिल्म में लीड हीरो बनने को तैयार नहीं था। पिता को सपोर्ट करने के लिए उनके बेटे ने हीरो बनने की ठानी। इसके साथ ही इंडस्ट्री में अनिल कपूर की लीड एक्टर के तौर पर एंट्री हुई। अपने पिता की बर्बादी की कहानी अनिल कपूर ने रीसेंटली एक पॉडकास्ट में सुनाई।
हर कोई करता था पिता की तारीफ
अनिल कपूर लिली सिंह से बात करते वक्त अपने पिता को याद किया। वह बताते हैं, 'मेरे डैड महान इंसान थे, बहुत ज्यादा विनम्र, ईमानदार और सच की राह पर चलने वाले थे। वह 50के दशक के आखिर या 60 की शुरुआत में मुंबई आए। यहां वह के आसिफ के असिस्टेंट बन गए इसके बाद उनके मैनेजर बने।' अनिल कपूर ने बताया कि वह फिल्म बिरादरी में जिससे भी मिले लोग उनके पिता के स्वभाव और ईमानदारी की तारीफ करते।
मां थी इंडस्ट्री की बेस्ट कुक
अनिल कपूर अपनी मां के बारे में बोले, 'फिल्म इंडस्ट्री में मेरी मां को बेस्ट कुक के तौर पर जाना जाता था। उनके खाने की मिसालें दी जाती थीं वह लेजंडरी कुक थीं। हम चैम्बूर में आरके स्टूडियो के पास रहते थे। कोई भी शूट कर रहा होता, खाना हमारे घर से ही जाता था।' अनिल कपूर ने बताया कि उनकी मां सबकी मां की तरह थीं, किसी को शादी, बच्चे पैदा करे या ऐसी ही कोई भी समस्या होती, लोग उनकी मां से सलाह लेने आते थे।
नहीं करना चाहते थे लॉन्च
अनिल कपूर के पिता प्रोड्यूसर थे लेकिन उनके लॉन्च में उनका कोई हाथ नहीं था। अनिल ने बताया, 'मैंने उनसे कहा कि मैं एक्टर बनना चाहता हूं तो वह बोले, 'ठीक है लेकिन मैं तुम्हारे लिए फिल्म नहीं बनाऊंगा, तुम्हें अपने लिए खुद काम खोजना होगा।''
एक फ्लॉप ने बदल दी जिंदगी
अनिल कपूर ने बताया कि कैसे एक फ्लॉप फिल्म ने उनके पिता और उनकी जिंदगी बदल दी। सुरिंदर कपूर ने राजेश खन्ना को लेकर एक फिल्म बनाई। मूवी बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई। सबको उम्मीद थी कि फिल्म बहुत चलेगी लेकिन पिक्चर पिटते है सब बदल गया। लोगों ने अनिल कपूर के पिता से दूरी बना ली। वह फिल्म के सिलसिले में बंगलुरु गए। एयरपोर्ट पर उन्हें कोई लेने नहीं आया। अनिल बताते हैं कि उनके पिता जब घर लौटकर आए तो वह बस रो नहीं रहे थे लेकिन आंखों में आंसू थे।
जब हीरो बनने की ठानी
अनिल कपूर ने बताया कि उन्होंने काम की तलाश 18-19 साल की उम्र में ही कर दी थी। उनके पिता को हार्ट अटैक हुआ था। वह बीमार थे। उनकी फिल्मों लीड हीरो के लिए कोई काम करे को तैयार नहीं था। अनिल बोले, 'उस वक्त मुझे लगा, मुझे हीरो बनना होगा, मैं लीड एक्टर बनूंगा।' इसी फीलिंग के साथ उन्होंने काम की तलाश शुरू दी।' बता दें कि अनिल कपूर की डेब्यू फिल्म के प्रोड्यूसर उनके पिता सुरिंदर कपूर थे। उन्होंने अनिल कपूर की लोफर, जुदाई, पुकार, हमारा दिल आपके पास है और नौ एंट्री जैसी फिल्में भी प्रोड्यूस की हैं।
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Kajal Sharmaशॉर्ट बायो : काजल शर्मा पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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