ऐसा था राज कपूर का आखिरी वक्त, परिवार से दूर हॉस्पिटल के बिस्तर पर कोमा में रहे, ये साउथ स्टार पहुंचा था मिलने
बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर के अंतिम दिनों के बारे में जानते हैं आप? परिवार से दूर दूसरे शहर के हॉस्पिटल के बिस्तर पर गुजरा आखिरी वक्त। साउथ का ये एक्टर पहुंचा था मिलने।

बॉलीवुड एक्टर-फिल्ममेकर राज कपूर को हिंदी सिनेमा को नया रूप देने का क्रेडिट दिया जाता रहा है। एक्टर ने अपने फिल्मी करियर में कई अलग मुद्दों पर बनी फिल्मों में एक्टिंग की। उनकी कहानियां और एक्टिंग ने ग्लोबली उन्हें स्टार बना दिया था। श्री 420 से लेकर अनाड़ी तक वो अपनी फिल्मों से छाए रहे और जब डायरेक्शन में कदम रखा तो महिला किरदार, सामाजिक कुप्रथाओं पर आवाज उठाई। राज कपूर का फिल्मी सफर खास रहा। वो अपने आखिरी समय में भी फिल्मों पर काम कर रहे थे। लेकिन जब मौत आई तो महीना हॉस्पिटल के बिस्तर पर कटा और दूसरे शहर में ली अपनी आखिरी सांस।
राज कपूर को हुआ था अस्थमा का अटैक
राज कपूर को अस्थमा था लेकिन उनका फिल्में बनाने का उनका जुनून कम नहीं हो रहा था। अस्थमा होने के बावजूद वो खुद अपने फिल्म हीना की शूटिंग के लिए पहाड़ो पर गए थे। राज कपूर की दिक्कत इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान से बढ़ गई थी। इसी समय एक्टर को दादा साहब फाल्के अवॉर्ड लेने दिल्ली जाना पड़ा। 2 मई 1988 में दिल्ली के सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम में अवॉर्ड प्रोग्राम चल रहा था। राज कपूर को इसी समारोह में अस्थमा का अटैक हुआ। साथ बैठी उनकी पत्नी ऑक्सीजन का एक छोटा सिलेंडर लेकर बैठीं थीं। उन्होंने राज कपूर को तुरंत सिलेंडर लगाया।
राष्ट्रपति की एम्ब्युलेंस में ले जाया गया हॉस्पिटल
राष्ट्रपति वेंकट रमन स्थिति को समझ गए और प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना एक्टर की सीट के पास पहुंचे और उन्हें दादा साहब फाल्के अवॉर्ड दिया। इसी समारोह के दौरान राज कपूर की हालत और बिगड़ने लगी। इस इवेंट को कवर करने के लिए सीनियर जर्नलिस्ट प्रदीप सरदाना पहुंचे हुए थे। उन्होंने देखा कि एक्टर के तबीयत को देखते हुए एक महिला डॉक्टर वहां आई और उन्हें डेरीफाइलिन इन्जेक्शन का इंजेक्शन दिया। लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। ऐसे में राष्ट्रपति की एम्ब्युलेंस में राज कपूर को दिल्ली के एम्स ले जाया गया।
साउथ का ये सुपरस्टार पहुंचा था मिलने
प्रदीप सरदाना ने बताया था कि राज कपूर को समारोह से बाहर लाया गया। लोगों की भीड़ ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया था जिस वजह से सांस लेने में और दिक्कत होने लगी। ऐसे में प्रदीप सरदाना ने सबसे पहले एक्टर के जूते और जुराबें उतारी और उन्हें एम्ब्युलेंस में एम्स लेकर पहुंचे। इस मुश्किल वक्त में प्रदीप एक्टर के साथ रहे। एम्स में भर्ती किए जाने के बाद उनका इलाज शुरू हुआ। हालत में सुधार भी हुआ। प्रदीप सरदाना ने बताया इस दौरान हॉस्पिटल में उनसे मिलने एक्टर कमल हासन आए। दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई। लेकिन इसके बाद राज कपूर की दिक्कत फिर से बढ़ गई। उन्होंने सवाल किया कि उन्हें अब आराम क्यों नहीं लग रहा है। वो एक-एक सांस के लिए तड़प रहे थे। उन्होंने प्रदीप सरदाना से कहा कि अब शायद मैं ठीक नहीं हो पाऊंगा, 'मुझे मरने दो'। ये सुनते ही उनकी पत्नी कृष्णा राज कपूर ने कहा कि वो ऐसी बातें ना कहें। उनकी पत्नी ने अपने तीनों बेटों को पिता की इस हालत के बारे में जानकारी दी। उस समय ऋषि कपूर नेपाल में फिल्म की शूटिंग में बिजी थे।
ऐसा था आखिरी वक्त
कृष्णा राज कपूर वापस वार्ड में आई। डॉक्टर ने बताया कि उनका निमोनिया बिगड़ गया है। एक-एक सांस के लिए तड़पते राज कपूर कोमा में चले गए। एक महीना वो कोमा में ही रहे। इस दौरान परिवार के सदस्य उन्हें मिलने, देखने आते रहे। सभी को उम्मीद थी कि राज कपूर फिर से लौटेंगे। लेकिन 2 जून 1988 को राज कपूर ने दुनिया को अलविदा कह दिया। ऐसा भी कहा जाता था है कि राज कपूर को अस्थमा होने के बाद भी वो सिगरेट नहीं छोड़ पाए और एक दिन में कई सिगरेट फूंक देते थे। उनका अंतिम संस्कार मुंबई में उनके परिवार, स्टूडियो के लोग और फैंस के सामने किया गया।
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Usha Shrivasपरिचय और अनुभव: ऊषा श्रीवास भारतीय डिजिटल मीडिया की एक अनुभवी एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 9+ सालों का प्रोफेशनल एक्सपीरियंस है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के लाइव हिन्दुस्तान में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रही हैं। डिजिटल एंटरटेनमेंट पत्रकारिता, वीडियो कंटेंट और ऑडियंस-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग में उनकी गहरी समझ उन्हें इस एरिया में एक मजबूत पहचान दिलाती है। करियर: पत्रकारिता में आने से पहले ऊषा अन्य कई फील्ड के साथ जुड़ी रही हैं। एकाध NGO के साथ काम करने के बाद Visa Facilitation Service (VFS) जैसी अंतरराष्ट्रीय वीजा प्रोवाइडर कंपनी में काम किया। फिर जर्नलिज्म को करियर बनाने के लिए उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जन संचार संस्थान(IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली, जिससे उन्हें न्यूज़ जजमेंट, कंटेंट स्ट्रक्चर और मीडिया एथिक्स की गहरी समझ मिली। अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत उन्होंने APN चैनल से की, जहां कंटेंट राइटिंग और सोशल मीडिया मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाली। यहां रहते हुए उन्होंने डिजिटल ऑडियंस के लिए ट्रेंड-आधारित स्टोरीज।
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