ये गलियां ये चौबारा…जानिए किसने लिखा था ये खूबसूरत गाना, आज भी रो पड़ते हैं लोग

Usha Shrivas लाइव हिन्दुस्तान
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फिल्म प्रेम रोग का गाना ‘ये गलियां ये चौबारा’ इस गीतकार ने लिखकर अमर कर दिया। आज भी गाने के अंतरे के बोल सुन रो पड़ते हैं लोग। उस समय के सबसे पॉपुलर गानों में से एक था ये गीत।

ये गलियां ये चौबारा…जानिए किसने लिखा था ये खूबसूरत गाना, आज भी रो पड़ते हैं लोग

1982 में एक फिल्म आई थी प्रेम रोग। इस फिल्म में ऋषि कपूर ने लीड रोल निभाया था। उनके साथ हीरोइन थीं पद्मिनी कोल्हापुरे। इस फिल्म की कहानी एक ऐसी विधवा की थी जिसकी शादी होते ही सुहाग उजड़ जाता है। फिर विधवा की दूसरी शादी, ठाकुर प्रथा, निचलों का शोषण जैसे सामाजिक मुद्दे को इस फिल्म में खूबसूरती से दिखाया गया था। इस रोमांटिक फिल्म ने उस समय बॉक्स ऑफिस के नंबर्स तो हिलाए ही थे, लेकिन म्यूजिक ने जो कमाल किया वो आज तक याद किया जाता है। इस फिल्म का गाना ‘ये गलियां ये चौबारा यहां आना न दोबारा’ खूब हिट हुआ था और शादी-ब्याह में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता था। लेकिन क्या आप जानते हैं इस गाने को किस गीतकार ने लिखा था?

प्रेम रोग के वो हिट गाने

प्रेम रोग उस समय की सबसे शानदार फिल्मों में से एक थी। फिल्म की कहानी ने तो छाप छोड़ी ही थी, लेकिन गाने और भी ज्यादा कमाल थे। इस फिल्म में कुल 6 गाने थे 'भंवरे ने खिलाया फूल', 'मैं हूं प्रेम रोगी', 'मेरी किस्मत में तू नहीं शायद', 'मोहब्बत है क्या चीज', 'ये प्यार था या कुछ और था' और ये गलियां ये चौबारा'। इन सभी गानों को लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल की जोड़ी ने बनाया था। सिंगर थे लता मंगेशकर और सुरेश वाडकर।'ये प्यार था या कुछ और था' को सुधा मल्होत्रा और अनवर ने गाया था। ये सभी गाने उस साल छाए रहे। लेकिन 'ये गलियां ये चौबारा' ने ऑडियंस के बीच अलग जगह बनाई। इस गाने को लिखने वाले गीतकार ने पहले भी कई शानदार गाने लिखे थे।

ये गलियां ये चौबारा लिखने वाले गीतकार

पद्मिनी कोल्हापुरे और ऋषि कपूर पर फिल्माए प्रेम रोग का गाना 'ये गलियां ये चौबारा' लिखने वाले गीतकार थे संतोष आनंद। इन गीतकार ने 1970 के लेकर 1998 तक फिल्मों में गीत लिखे। वो आनंद ही थी जिन्होंने गीत लिखा था 'एक प्यार का नगमा है', 'जिंदगी की ना टूटे लड़ी'। फिल्म प्रेम रोग में संतोष आनंद ने 4 गाने लिखे थे। वो गाने थे 'मैं हूं प्रेम रोगी','मोहब्बत है क्या चीज','ये प्यार था या कुछ और था' और 'ये गलियां ये चौबारा'। ये सभी गाने हिट हुए। वहीं 'मेरी किस्मत में तू नहीं शायद' आमिर क़ज़लबाश और 'भंवरे ने खिलाया फूल' पंडित नरेंद्र शर्मा ने लिखा था।

आज भी रो पड़ते हैं लोग

फिल्म प्रेम रोग में गाना 'ये गलियां ये चौबारा' पद्मिनी कोल्हापुरे पर फिल्माया गया था। इस गाने में वो अपनी शादी और विदाई की बात करती हैं। आज भी शादी-ब्याह में जब ये गाना बजता है तो लोग अंतरा सुन रो पड़ते हैं।

Usha Shrivas

लेखक के बारे में

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परिचय और अनुभव: ऊषा श्रीवास भारतीय डिजिटल मीडिया की एक अनुभवी एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 9+ सालों का प्रोफेशनल एक्सपीरियंस है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के लाइव हिन्दुस्तान में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रही हैं। डिजिटल एंटरटेनमेंट पत्रकारिता, वीडियो कंटेंट और ऑडियंस-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग में उनकी गहरी समझ उन्हें इस एरिया में एक मजबूत पहचान दिलाती है। करियर: पत्रकारिता में आने से पहले ऊषा अन्य कई फील्ड के साथ जुड़ी रही हैं। एकाध NGO के साथ काम करने के बाद Visa Facilitation Service (VFS) जैसी अंतरराष्ट्रीय वीजा प्रोवाइडर कंपनी में काम किया। फिर जर्नलिज्म को करियर बनाने के लिए उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जन संचार संस्थान(IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली, जिससे उन्हें न्यूज़ जजमेंट, कंटेंट स्ट्रक्चर और मीडिया एथिक्स की गहरी समझ मिली। अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत उन्होंने APN चैनल से की, जहां कंटेंट राइटिंग और सोशल मीडिया मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाली। यहां रहते हुए उन्होंने डिजिटल ऑडियंस के लिए ट्रेंड-आधारित स्टोरीज।


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