इंग्लिश ना बोलने पर लोगों ने मुझे गरीब घर का समझ लिया… पंकज त्रिपाठी ने बताया क्यों नहीं हिला कॉन्फिडेंस
पंकज त्रिपाठी ने बताया कि वह इंग्लिश में बात नहीं करते थे तो लोगों ने उन्हें कमजोर बैकग्राउंड का समझ लिया। इस बात से उन्होंने खुद में हीनता नहीं आने दी। उन्होंने बताया कि कैसे कॉन्फिडेंट रहे।

पंकज त्रिपाठी का कहना है कि वह पेड़ बनना चाहते हैं। उसमें परफेक्शन नहीं। टेढ़ी-मेढ़ी डालियां बढ़ रही हैं फिर भी इतना सुंदर लगता है। वह एक पॉडकास्ट में जीवन के नए-पुराने अनुभवों पर बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल से नफरत है। उन्होंने बीते दिनों को याद करके बताया कि जब दिल्ली आए तो कल्चरल शॉक लगा। सिगरेट पीती लड़कियों को देख हैरान थे। वहीं उन्हें इंग्लिश नहीं आती थी तो लोग जज करते थे। हालांकि इस बात ने पंकज त्रिपाठी के मन में हीनभावना नहीं आने दी।
लगा, ये कैसी लड़कियां हैं?
पंकज त्रिपाठी युवा यूट्यूब चैनल पर थे। उन्होंने बताया कि जब वह दिल्ली आए तो थोड़ा कल्चरल शॉक लगा। पंकज बताते हैं, 'मैं 2001 में दिल्ली आया, एनएसडी आया तो थोड़ा कल्चरल शॉक था। मैंने लड़कियों को सिगरेट पीते देखा तो लगा, 'ये कैसी लड़कियां हैं।' फिर 101 दिन आत्ममंथन के बाद मुझे लगा कि लड़के भी तो देख रहा हूं सिगरेट पीते। लड़का है तो रिएक्ट नहीं किया, नुकसान तो बराबरी का होगा ना कि लड़की को ज्यादा होगा।' पंकज बोले, लिटरेचर ने उनकी समझ खोली थी पर इतनी भी नहीं कि सिगरेट को स्वीकार लें।
लोगों ने गरीब समझ लिया
पंकज ने बताया कि उनके हिंदी बैकग्राउंड को लेकर भी लोगों ने जज किया। वह बोले, 'लोगों ने मुझे भाषा पर बहुत जल्दी जज किया। लोगों ने सोचा कि अगर कोई फ्लुएंटली इंग्लिश नहीं बोल पा रहा तो वह गरीब बैकग्राउंड का है। आप जो भाषा बोलते हैं फिर लोग उसके आधार पर आपकी क्षमता का आकलन करते हैं। जबकि हकीकत में दोनों का आपस में कोई लेना-देना नहीं।'
नहीं आने दी हीनता
पंकज बोले, 'इससे निपटने के दो तरीके हैं या तो इनफीरिऐरिटी कॉम्प्लैक्स में आ जाओ या इससे ऊपर उठ जाओ। शुक्र है कि मैं हीनता के भाव में नहीं आया, मुझे लगा कि मेरा व्यक्तित्व एकदम शानदार है जिसको नहीं समझना है वो उसकी प्रॉब्लम है।'
मोबाइल से नफरत
पंकज त्रिपाठी ने जेन जी कि इंग्लिश पर तंज कसा। बोले कि सेंटेंस इतने छोटे हो गए हैं कि खत्म ही हो गए हैं। पंकज बोले कि जीवन में आनंद होना चाहिए। पैसे का खेल क्षणिक है। इसके लिए 10 पेज किताब के पढ़िए, मोबाइल के नहीं। 15-20 मिनट घास पर घूमिये और पेड़-पौधे देखिए। पंकज त्रिपाठी बोले कि उन्हें मोबाइल से भयंकर चिढ़ है। उसका सही इस्तेमाल नहीं हो रहा। उनका वश चले तो दुनिया को मोबाइल मुक्त कर दें।
लेखक के बारे में
Kajal Sharmaशॉर्ट बायो : काजल शर्मा पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
परिचय एवं अनुभव
काजल शर्मा भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम की लीड हैं। 2020 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।
करियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल)
काजल ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबारों से की, जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2014 में अमर उजाला डिजिटल के साथ उन्होंने न्यू मीडिया की दुनिया में कदम रखा। 2017 से 2020 तक नवभारत टाइम्स (NBT) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल कवरेज के बाद वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ से जुड़ीं और वर्तमान में इन दोनों सेक्शंस की टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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B.Sc (बायोलॉजी) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट होने के कारण काजल को विज्ञान और पत्रकारिता का अनूठा संयोजन मिला। इसी वजह से वह मनोरंजन बीट पर कमांड होने के साथ मेडिकल रिसर्च और हेल्थ से जुड़े विषयों पर ‘एक्सपर्ट-वेरिफाइड’ और रिसर्च-ड्रिवेन मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज़ लिख रही हैं।
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