मोहम्मद रफी ने जब लता मंगेशकर को रीटेक देने से किया था मना, भूखे-प्यासे रहकर दोबारा गाया था ये गाना

Sushmeeta Semwal लाइव हिन्दुस्तान
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मोहम्मद रफी के आज ऐसे एक गाने के बारे में बताते हैं जिसे उन्होंने भूखे-प्यासे रहकर गाया था। इसके पीछे की उनकी वजह जानकर आप हैरान हो जाएंगे।

मोहम्मद रफी ने जब लता मंगेशकर को रीटेक देने से किया था मना, भूखे-प्यासे रहकर दोबारा गाया था ये गाना

मोहम्मद रफी ने अपने करियर में कई यादगार गानें दिए हैं। उनकी आवाज के लाखों दीवाने थे। वैसे तो मोहम्मद रफी अपने गाने को परफेक्ट बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते थे। लेकिन एक गाना ऐसा था जिसके लिए पहले रीटेक देने से रफी साहब ने मना कर दिया था। लेकिन फिर बाद में दोबारा जब गाया तो बिना खाए और पिए रिकॉर्ड किया।

जंजीर फिल्म का था वो गाना

हम जिस गाने की बात कर रहे हैं वो है अमिताभ बच्चन की जंजीर फिल्म का और गाने का नाम दीवाने हैं दीवानों को। इस गाने को मोहम्मद रफी ने लता मंगेशकर के साथ गाया है। गाने के संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी थे। जब रफी ने पहले यह गाना गाया तो लता मंगेशकर ने कहा कि उन्हें एक रीटेक और लेना चाहिए।

लता मंगेशकर को री टेक देने से कर दिया था मना

जब लता जी ने अपना पार्ट इस गाने के लिए गाया तो रफी जी के साथ-साथ सभी को ये पसंद आया लेकिन लता दोबारा रीटेक चाहती थीं। रफी साहब ने कहा कि लता जी आपने ये गाने बहुत ही अच्छा गाया है इसे दोबारा गाने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन लता मंगेशकर सिर्फ एक गायिका नहीं थी वो हर चीज को परफेक्ट करने पर विश्वास रखती थीं। वो अड़ गईं कि उन्हें एक और रीटेक चाहिए। अचानक से स्टूडियो में माहौल शांत हो गया। सामने खड़े दिग्गज संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी ने उन्हें इसकी मंजूरी दे दी।

क्यों किया था रफी साहब ने मना

रफी साहब से फिर रीटेक के लिए कहा गया तो उन्होंने मना कर दिया। दरअसल, उनका रोजा था और सुबह से उन्होंने कुछ खाया नहीं होता है और ना ही पानी पिया होता है। वह बोलते हैं कि उनसे अब दोबारा गाना नहीं गाया जाएगा।

इसके बाद वापस लौटे रिकॉर्डिंग स्टूडियो पर

रफी साहब स्टूडियो से बाहर निकल रहे थे, तभी उन्हें गीतकार गुलशन बावरा दिखाई दिए। गुलशन बावरा उनकी तरफ दौड़कर पहुंचे और खुश होकर बोले, ‘रफी भाई आपको पता है फिल्म में यह गाना मैं कह रहा हूं.’ गुलशन की बात सुनकर रफी साहब हैरान हो गए। उन्होंने ये गाना अमिताभ बच्चन को दिमाग में रखकर गाया था। ये सुनते ही रफी को यकीन नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने पूरा गाना अमिताभ के हाव भाव और चेहरे को सोचकर गाया था।

भूखे-प्यासे गाया यह गाना

इसके बाद रफी साहब तुरंत रिकॉर्डिंग स्टूडियो में गए। उन्होंने फिर भूखे-प्यासे ही गाने को दोबारा रिकॉर्ड किया। इसके बाद जब यह गाना रिकॉर्ड हुआ तो इसने रिलीज होते ही धमाल मचा दिया था।

बता दें कि इस गाने के म्यूजिक डायरेक्टर आनंदजी वीरजी शाह, कल्याणजी वीरजी शाह थे। वहीं लिरिक्स गुलशन बावरा ने लिखे थे।

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